अच्छी छवि बनाने की होड में आज का बाज़ार नैतिक छवियों का दुरूपयोग करने में माहिर है. पत्रकारिता का धंधा करनेवाले एक बड़े और विश्वप्रतिष्ठित कंपनी (समूह) ने भोपाल में एक बड़ा मॉल खड़ा किया है, जिसकी दीवारों पर इसने पहले गांधी की दो बड़ी- बड़ी तस्वीर टांग रखी थी. उसके नीचे गांधी के नैतिक वचन भी लिखे गए थे. गांधी के साथ इस समूह के द्वारा किया गया यह पहला घोर मजाक था. गांधी कभी भी इस तरह के बाजार और मॉल के पक्ष में नहीं बोले. लेकिन इस समूह ने जैसे उन्हें अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाकर मॉल के ऊपर टांग दिया और भोपाल के किसी गांधीवादी ने इस पर चूं तक नहीं किया. गांधी सरेआम नंगे बदन लाठी लिए मॉल पर टंगे थे और उनके नीचे विदेशी ब्रांड के पेंट-शर्ट का शोरूम था.
इस समूह के व्यापारिक सोच का दुश्चरित्र पूरे बाजार के चरित्र का नंगा दृश्य उपस्थित करता है. गांधी बाबा को सरेआम लज्जित करने के बाद इस समूह ने उनके साथ दूसरा भद्दा मजाक किया. जिस जगह पर गांधी बाबा टंगे थे, उस जगह पर नोकिया और रिलायंस के बड़े-बड़े विज्ञापन लग गए. हालाँकि यह भी बाजार और मुनाफा कमाने के लालच में किया गया, लेकिन वहाँ भी गांधी की औकात पर भोगवादी वस्तुएं चढ बैठी. आखिर में इसी बहाने गांधी दीवारों में चुन दिये गए और बाजार ने भोग के सामान के आगे गांधी को दो कौड़ी का साबित किया. आज के युग में उनका यही बुरा और तार्किक हश्र होना था.
लेखक राजीव सिंह पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

