पिछले दिनों समाजवादी पार्टी को आरएसएस के खाकी निकर को उजली धोती में छुपा कर रखने वाले नेता का दल कहने वाले, भारत माता को डायन की उपमा से विभूषित करने वाले एक मशहूर नेता ने जो उत्तर प्रदेश के प्रतिपक्ष के नेता पद की कुर्सी पर ललचाई आँख गड़ाए हुए है, स्वयं को समाजवादी पार्टी की सोच और मुझे पहिया मात्र बताया. रेल की पटरी पर क्या रेल बिना पहिया चलेगी? तेज चलती मोटर कार का पहिया फट जाए तो उस मोटर कार का क्या होगा? बिना पहिया की रेल और चलती कार के जोर से फटे पहिये की मार की छमता बराए करम सारी दुनिया देखे. पहिया चाहे बैलगाड़ी का हो, हवाई जहाज का हो, ट्रक का हो, ट्रैक्टर का हो, तांगे का हो, स्कूटर या मोटर साइकिल का हो या फिर बेचारी साइकिल का हो पंचर ना कीजिये और ना होने दीजिए, महफूज करके शराफत से संभाले रहिये वरना साइकिल का पंचर पहिया ना जाने किस दोजख में आपको डाल दे.
और इसके अलावा एक पहिया कालचक्र का भी होता है जो बड़ा ही क्रूर, निर्मम और अताताई होता है, जिसने युधिष्ठिर के अलावा पांडवों में किसी को नहीं बख्शा, जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान कृष्ण को भी अपना रूप दिखा गया. यहाँ तक कि नारायण भगवान राम को भी बनवास से लेकर पत्नी वियोग तक दिखा डाला. भाई, पहिया बड़े काम की चीज है. कल पंडित नेहरू का जन्मदिन था, वे भी महात्मा गांधी के सपनों के पहिया ही तो थे, जो खुद भी खूब चले और मुल्क को भी खूब चलाया और दौड़ाया. पहिया अगर योग्य है तो यह बहुत उपयोगी और बेहद जरूरी है, बिना पहिया के सिद्धांत और सोच बिना टांगों के आदमी की भांति विकलांग हो जाते है. शुक्रिया दोस्त आपने खूब पहचाना, मुझे कम से कम पहिया तो माना. आजकल आप पर मेहरबान आपकी पार्टी के नेता के बड़बोले एक भाई ने मुझ जैसे छोटे पहिये को तोड़ कर जार-जार कर दुनिया को बताया कि डाल पर बैठ उसी डाल को काटने वाले कालिदास हर युग में होते है.
सदा आदाब की आती हुई हर एक जानिब से
रवादारी का बख्शा एक तमगा छोड़ आए है
मोहब्बत से मिले थे चोली दामन मुद्दतों पहले
जुबाँ हम साथ ले आए है भाषा छोड़ आए है.
अमर सिंह के ब्लाग से साभार.

