आखिर, भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सरकार के सामने घुटने टेक ही दिए और घोषित महा भ्रष्ट (मैच फिक्सर) मोहम्मद अज़हरुद्दीन को महिमामंडित कर दिया. बताने की जरूरत नहीं कि एक के बाद एक महाघोटालों में फंसी केंद्र सरकार का पाखण्ड इसी बात से समझ में आता है कि एक ओर तो वो देश के साथ गद्दारी करने वाले को, जिसने पैसे की खातिर अपना ईमान बेच दिया और कई मौकों पर भारतीय टीम की हार सुनिश्चित की, वोटों की गणित के चलते सांसद बनाती है और दूसरी ओर लोकपाल बिल ३० जून तक तैयार करने का दम भरती है. देश के बुद्धिजीवी वर्ग ने सरकार पर से रहा सहा भरोसा भी अज़हर को बीसीसीआई द्वारा टीम इंडिया के विश्व कप जीतने के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह के लिए न्योता भेज कर खो दिया है.
दरअसल, आजीवन प्रतिबंधित अज़हर को आईसीसी और बीसीसीआई द्वारा बहिष्कृत किये जाने से सत्तारूढ़ दल की काफी किरकिरी हो रही थी कि लोकसभा में बैठने का अधिकारी शख्स क्रिकेट बिरादरी में अछूत रहे. इसलिए कांग्रेस ने अपने एक प्रवक्ता के जरिये बोर्ड पर दबाव बनाया. पिछले दिनों देश में संपन्न विश्व कप के दौरान मैदान से दूर रखे गए अज़हर को पहले आईपीएल में बुलाया गया और जब देखा कि इसे सभी ने सहज लिया और कोई शोरगुल नहीं हुआ तो आज होने जा रहे सम्मान समारोह के लिए एक दिन पहले बोर्ड के आज तक के सबसे “इमानदार” सचिव, चेन्नई सुपर किंग का स्वामित्व रखने वाले श्रीनिवासन ने अज़हर से संपर्क कर उन्हें ये यादगार तोहफा प्रदान किया और साथ ही प्रकारांतर में देश के क्रिकेटरों को यह सन्देश भी भेजा कि स्पाट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग, ये दोनों ही अपराध भारतीय दंड विधान संहिता में देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए धतकरम की तुम लोगों को खुली छूट है. अज़हर के लिए अब आगे की राह आसान हो चली है. जल्द ही हम सुनेंगे कि बोर्ड ने उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंप दी है. वाकई बलिहारी है बोर्ड और कांग्रेस दोनों की.
लेखक पदमपति शर्मा देश के जाने माने पत्रकार और क्रिकेट विशेषज्ञ हैं. कई चैनलों और अखबारों के शीर्ष पदों पर रहे पदमपति इन दिनों काशी नगरी में निवास करते हुए स्वतंत्र लेखन और मुक्त चिंतन का आनंद उठा रहे हैं.

