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ब्‍लॉग के माध्‍यम से पूर्वांचल विश्‍वविद्यालय रखेगा अपनी बात

ब्लॉग की दुनिया में अब वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर भी अपनी बात रखने आ गया हैं. अपनों से दो तरफा संवाद स्थापित करने के लिए के कुलपति प्रो.सुन्दर लाल ने पूरब बानी ब्लॉग बनाया है. यह ब्लॉग विश्वविद्यालय का आधिकारिक ब्लॉग हैं. ब्लॉग आज अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम हैं. इसके द्वारा बहुत ही आसानी से अपनी बात वैश्विक स्तर पर रखी जा रही हैं. खास हो या फिर कोई आम आदमी सबके ब्लॉग इन्टरनेट के माध्यम से पढ़े जा रहे हैं और चर्चा का विषय बन रहे हैं. देश में कुछ गिने चुने ही शायद ऐसे सरकारी विश्वविद्यालय होंगे जिनका अपना ब्लॉग हो.

ब्लॉग की दुनिया में अब वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय जौनपुर भी अपनी बात रखने आ गया हैं. अपनों से दो तरफा संवाद स्थापित करने के लिए के कुलपति प्रो.सुन्दर लाल ने पूरब बानी ब्लॉग बनाया है. यह ब्लॉग विश्वविद्यालय का आधिकारिक ब्लॉग हैं. ब्लॉग आज अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम हैं. इसके द्वारा बहुत ही आसानी से अपनी बात वैश्विक स्तर पर रखी जा रही हैं. खास हो या फिर कोई आम आदमी सबके ब्लॉग इन्टरनेट के माध्यम से पढ़े जा रहे हैं और चर्चा का विषय बन रहे हैं. देश में कुछ गिने चुने ही शायद ऐसे सरकारी विश्वविद्यालय होंगे जिनका अपना ब्लॉग हो.

http://vbspurvanchaluniversity.blogspot.com/ पर बनाया गया पूरब बानी ब्लॉग अभी अपने प्रारंभिक अवस्था में हैं. इस ब्लॉग को २५ मई को बनाया गया और उस पर पहली पोस्ट जनसंचार विभाग द्वारा बनाई ‘बापू बाजार’ पर वृत्त चित्र को लगाया गया हैं. इस विश्वविद्यालय का जनसंचार विभाग पहले से ही ब्लॉग जगत में चर्चा में रहा हैं. विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के सभी छात्र छात्राओं का अपना ब्लॉग हैं. जिस पर उनके द्वारा लिखी गई कवितायें, रूपक, लेख, चित्र एवं विभाग की गतिविधियाँ रहती हैं. इनमें से कई छात्र छात्राएं सक्रिय ब्लॉगर के रूप में अपनी पहचान बना ली हैं. जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र का ब्लॉग माँ पलायनम लोक परंपरा एवं लोक संस्कृति से जुड़ी पोस्ट को लेकर माटी से जुड़े लोगों के भी जाना और पहचाना जाता हैं.

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुन्दरलाल का कहना हैं कि ब्लॉग विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों को दो तरफ़ा मंच प्रदान करेगा. बहुत सारी बातों की जानकारी भी हमें इसके माध्यम से हो जाया करेगी. इसके साथ ही विश्वविद्यालय की गतिविधियाँ आदि को भी प्रस्तुत किया जायेगा. इस विश्वविद्यालय से जुड़े रहे लोग जो विश्व में किसी भी कोने में हैं हमसे फिर से जुड़ेंगे और हम उनको और वो हमारी बातों को जान सकेंगे.

लेखक दिग्विजय सिंह राठौर पूर्वांचल विश्‍वविद्यालय के जनसंचार विभाग में प्राध्‍यापक हैं.

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