भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रख्यात समाजसेवी अण्णा हजारे की मुहिम का असर पूरे देश में नजर आ रहा है। जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर जहां अन्ना हजारे दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं। वहीं गाजीपुर में भी कई समाजसेवी अन्ना के समर्थन में आमरण अनशन कर रहे है। पूरे देश में अबतक अन्ना के साथ सिर्फ गाजीपुर के तीन सामाजिक कार्यकर्ता आमरण अनशन कर रहे है। जिनका दावा है कि मर जायेंगे लेकिन अन्ना से पहले अनशन नही तोड़ेंगे। इनके जज्बे को देख लोग इन्हें गाजीपुर का अन्ना कह रहे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू होने वाली है आम आदमी की लड़ाई। इसकी कमान संभाली है सन पैंसठ की भारत-पाक जंग लड़ चुके समाजसेवी अन्ना
हजारे। वो जनता को जगाने के लिए राजधानी के जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। अन्ना हजारे देश में जन लोकपाल नाम की एक ऐसी संस्था चाहते हैं, जो एमपी से लेकर पीएम तक सबको भ्रष्टाचार की सजा देने में सक्षम हो। गाजीपुर के लोगों ने भी अन्ना के इस पहल का समर्थन ही नहीं किया बल्कि उनके कदम से कदम मिलाते हुए तीन सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण दूबे, उमेश श्रीवास्तव और विकलांग फूलचन्द ने 5 अप्रैल से ही आमरण अनशन शुरू कर दिया है। और साथ ही यह ऐलान भी की अब इन्हें भ्रष्टाचार गवारा नही..!
दो दिनों से अन्ना हजारे के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे इन अनशनकारियों
ने अन्ना के आन्दोलन जारी रखने तक आमरण अनशन का दावा किया है। इस मुहिम के चलते देश के तमाम लोग इनसे जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में नेशनल कुश्ती खिलाड़ी और वर्तमान में पंजाब में कुश्ती प्रशिक्षक पहलवान अजीत सिंह ने भी इन अनशनकारियों को समर्थन देते हुए गाजीपुर पहुंचकर जनजागरूकता का ऐलान किया।
अन्ना हजारे के इस मुहिम का समर्थन आम लोग कर रहे हैं इस कोशिश से बेहतर कल की उम्मीद की जा सकती है …आज लोग गाजीपुर के इन अनशनकारियों के समर्थन में हजारों की संख्या में रैलियां निकाल रहे हैं, लगता है इस पहल पर जनता भ्रष्टाचार से दो दो हाथ करने के मूड में है।
लेखक केके गाजीपुर में पत्रकार हैं.

