इस रहस्य को समझ पाना बेहद कठिन है कि नए अखबार खोलने वाले संस्थानों पर आयकर विभाग के छापे क्यों पड़ जाते हैं, इस रहस्य को बूझने के लिए गहन चिंतन करना पड़ेगा। हाल ही बसंल ग्रुप पर पड़े आयकर विभाग के छापों ने इस रहस्य को और भी ज्यादा गहरा दिया है। बंसल न्यूज आरंभ हुए कुछ ही दिन हुए हैं और यहां छापे पड़ गए। इसके पहले पीपुल्स समाचार के साथ भी यही हुआ था अखबार चालू हुआ और छापा पड़ गया। इसके पीछे यही कारण हो सकता है कि इन संस्थानों द्वारा अखबार यह सोचकर निकाला गया कि अब उनकी तरफ कोई भी झांक नहीं सकेगा लेकिन आयकर विभाग ने ऐसे लोगों का मुगालता सबसे पहले दूर कर दिया।
बहरहाल इन दिनों मध्यप्रदेश में मीडिया के वैसे भी बुरे दिन चल रहे हैं राज ग्रुप पर सरकार ने हमला बोल रखा है। इधर सहारा न्यूज के भी बुरे हाल हैं देखिए आगे आगे क्या होता है। हां संवादनगर घोटाले ने भी कई पत्रकारों की नींद हराम कर रखी है जाने कब जेल जाना पड़े। अखबार खोलने और आयकर के छापे पड़ने का यह मामला पत्रकारों में खासा चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। मध्यप्रदेश में अखबारों की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। राज एक्सप्रेस के मालिक के मामले में सरकार ने मिनाल माल गिराने की जो कार्रवाई की है वह भी अखबार वालों के लिए एक चेतावनी है।
इधर इन्दौर में शनिवार दर्पण नामक एक साप्ताहिक के बिल्डर मालिक के हाथों से एक अरब साठ करोड़ की जमीन हाईकोर्ट में प्रकरण हारने के बाद विकास प्राधिकरण ने वापस लेने की कार्रवाई आरंभ कर दी है। इन्दौर में गुटका किंग किशोर वाधवानी ने एक्साइज विभाग के छापों के बाद अपना अखबार दबंग समाचार आरंभ किया है, जिसमें दैनिक भास्कर शिमला के सम्पादक कीर्ति राणा सम्पादक बनाए गए हैं। कहा जा रहा है कि कीर्तिराणा शिमला छोड़कर शिमला गुटके वाले के अखबार में आ गए हैं। बहरहाल उनकी घर वापसी का सभी स्वागत कर रहे हैं।
लेखक अर्जुन राठौर पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

