
महाजूता
इस जूते की साइज को लेकर तमाम तरह के कयास, संशय, आशंका और अनुमान लगाने का सिलसिला शुरू हो गया. लोगों इंसान के पूर्वजों की शारीरिक बनावट को लेकर भी विभिन्न प्रकार की चर्चा करने लगे. पीछे तर्क यह दिया गया कि आज के छोटी सरीसृप गिरगिट, छिपकली, कछुआ, मेढ़क इत्यादि के पूर्वज डायनासोर को माना जाता है. जबकि खोजों में यह जानकारी मिल चुकी है कि आदिकाल के जीव डायनासोर का आकार काफी विशाल होता था. जूते की साइज को भी देखकर इसी प्रकार के कयास लगाया जाने लगा. माना गया कि पांच-छह सौ साल पूर्व हमारे पूर्वज भी विशालकाय शरीर वाले थे. आदिकाल की कहानियों तथा गाथाओं के उदाहरण दिये जाने लगे. हमारे पूवर्जो के भारी भरकम हथियारों के इस्तेमाल करने के कई किस्से और कहानियां सुनाई जाने लगी. हालांकि इस तथ्य में सच्चाई कितनी है यह तो जांच का विषय है. किन्तु जूते की साइज को देखकर मन में सवाल तो जरुर पैदा होते हैं. क्या हमारे पूर्वज सचमुच विशाल शरीर के होते थे? हालांकि देखने से जूता बहुत प्राचीन प्रतीत नहीं होता है. लोगों का अनुमान है कि अगर यह जूता सचमुच हमारे पूर्वजों का है, और यह उपयोग में लाई गई है तो निश्चित रूप से हमारे पूर्वजों का कद सामान्यत: दस फीट से अधिक रहा होगा. सवाल यह है कि यह जूता कुंए में कैसे और किन परिस्थितियों में पहुंचा. कुछ लोग पानी में रहने के चलते जूते के बड़े होने की बात कर रहे हैं तो कोई कुंए की उम्र पर सवाल उठा रहा है. अब इस जूते की सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन इसने लोगों को तर्क-वितर्क करने का मौका तो दे दिया है.

