मायानगरी यानी मुंबई जहाँ बसा है बॉलीवुड जो आम लोगों के मनोरंजन के लिए रात-दिन काम करता रहता है। पर कुछ वक्त से मायानगरी को पायरेसी नामक “‘नाग” डस रहा था, जिसने अब अजगर का रूप ले लिया है और मायानगरी को निगलता जा रहा है। यह पायरेसी का धंधा न सिर्फ बड़े-बड़े शहरों में होता है बल्कि छोटे शहरों में भी इसका जाल फैल गया है। ये जाल ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी लोकल पुलिस प्रशासन को नहीं होती। जी हां, ये धंधा पुलिसिया संरक्षण में चलता है और पायरेसी माफिया प्रशासन की मदद से खुद तो करोड़पति बन जाते हैं मगर देश को कितना चूना लगाते हैं, ये उनको भी शायद अंदाजा नहीं।
आज जहां भी देखो, नई फिल्मों के हॉल-माल में रिलीज होने की देर नहीं होती और गली-नुक्कडों पर इसकी सीडी की खुलेआम बिक्री शुरू हो जाती है। पालिका बाजार, चांदनी चौक, लाजपत राय मार्केट इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। हमारे देश का कोई भी ऐसा जिला नहीं होगा जहां पर पायरेसी नामक राक्षस अपने पैर न पसार चुका हो। कुछ वक्त पहले पालिका बाजार में हजारों नकली सीडी और डीवीडी छापे में बरामद हुई। माना कि आज एक गरीब तबके का व्यक्ति हॉल-माल का टिकट खरीदकर फिल्म नहीं देख सकता पर जिनके पास ये सुविधाएं हैं उन्हें तो ये सोचना चाहिए कि वो पायरेटेड सीडी यूज करके इस गोरखधंधे को बढावा दे रहे हैं।
वैसे, इस धंधे के बढ़ने के पीछे फिल्मों के महंगे होते जा रहे टिकट का भी हाथ है। अगर आप किसी नई फिल्म की पायरेटेड सीडी या डीवीडी बाजार से खरीदते हैं तो उसकी कीमत लगभग 30-40 रुपये होती है। यही फिल्म अगर आप किसी माल में देखने जाते हैं तो सौ से चार सौ रुपये तक का टिकट खरीदना पड़ता है। खराब से खराब सिनेमा हाल में भी बीस से चालीस रुपये तो खर्च हो ही जाते हैं। पायरेटेड सीडी या डीवीडी का उपयोग करने वाले ये तो जानते ही हैं कि इन्हें दो-चार बार यूज करो तो फिर ये किसी काम के नहीं रह जाते। इनका प्रिंट क्लियर नहीं होता। कई बार ये सीडी-डीवीडी चलते-चलते साइलेंट हो जाती हैं तो कई बार फिल्म पूरी ही नहीं हो पाती।
देश को चूना लगाने वाले पायरेटेड सीडी-डीवीडी के धंधे का हम लोगों को बहिष्कार करना चाहिए। अगर हमें सीडी या डीवीडी ही खरीदकर देखना है तो फिल्म की ओरीजनल सीडी या डीवीडी आने का इंतजार करना चाहिए। जो फिल्म इंडस्ट्री हम सभी के लिए मनोरंजन का खजाना लेकर हालों-मालों पर दस्तक देती है, कभी समाज की बुराई दिखाने के लिए तो कभी प्यार बरसाने के लिए तो कभी देश की आन बढ़ाने के लिए तो कभी मनुष्य के जिजीविषा बताने के लिए, उसके प्रति हमारा कर्तव्य बनता है कि हम पायरेटेड सीडी-डीवीडी न खरीदकर उन्हें नैतिक समर्थन दें। करोड़ों का बजट लगाकर जब कोई निर्माता फिल्म बनाता है तो उस फिल्म से जुड़े बहुत से कलाकारों को कई बड़ी-बड़ी उम्मीदें होती हैं। अगर फिल्म फ्लॉप हो जाती है तो कई लोग बेरोजगार तो कई कंगाल हो जाते हैं। बॉलीवुड से खुद हम दर्शक हर बार यही उम्मीद करते हैं कि वो अगली बार हमारे सामने और भी अच्छी फिल्में लेकर आएंगे। फिल्म इंडस्ट्री के बचाव के लिए हमें पायरेटेड सीडी-डीवीडी न खरीदने का इरादा कर लेना चाहिए। तभी हम फिल्म इंडस्ट्री और इससे जुड़े हजारों-लाखों लोगों को सपोर्ट कर सकते हैं। ध्यान रखिए, पायरेटेड सीडी-डीवीडी का गोरखधंधा करने वाले अपराधी हैं और हम उन्हें बढ़ावा देकर अपराध कर रहे हैं।
ब्रजेश निगम झांसी के पत्रकार हैं। कई अखबारों और टीवी चैनलों के लिए काम कर चुके हैं। उनसे संपर्क 09889988989 के जरिए या फिर [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

