: सौ रुपये से लेकर पन्द्रह हजार तक के गधे-घोड़े रहेंगे उपलब्ध : विविधताओं से लबरेज भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अनेक मेले लगते हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग विशेषता रहती है। लेकिन धोरों की धरती राजस्थान की राजधानी जयपुर के निकट स्थित छोटे से गांव भावगढ़ बंध्या में लगने वाले श्री खलखाणी माता के गधे मेले की अपनी अनूठी ही विशेषता है। गर्दभ मेला अथवा गधा मेला के नाम से पहचाना जाने वाला यह मेला देश ही नहीं बल्कि एशिया में भी लगने वाला पहला ऐसा मेला है, जो केवल गधों के लिए ही आयोजित किया जाता है। जयपुर नगर निगम और अखिल भारतीय गर्दभ मेला विकास समिति, भावगढ़ बंध्या के सामूहिक सहयोग से प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले इस ऐतिहासिक मेले का आगाज इस बार 14 अक्टूबर को होगा। तीन दिवसीय मेले के पहले दिन गुरुवार को उद्घाटन समारोह आयोजित होगा।
मेला स्थल भावगढ़ बंध्या में लगने वाले इस मेले के उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि जयपुर नगर निगम की महापौर ज्योति खण्डेलवाल होंगी। उद्घाटन जयपुर के सांसद महेश जोशी करेंगे। कार्यक्रम में सिविल लाइंस (जयपुर) के विधायक प्रतापसिंह खाचरियावास और क्षेत्रीय विधायक गंगादेवी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय गर्दभ मेला विकास समिति के अध्यक्ष ठाकुर उम्मेद सिंह राजावत करेंगे। मेले में दूर-दराज के गांवों सहित प्रदेशभर से लोग भाग लेने के लिए आते हैं। कार्यक्रम के समापन पर शनिवार को समापन समारोह और पारितोषिक वितरण कार्यक्रम होगा। इसके तहत श्रेष्ठ नस्ल के पशु लाने वाले, सर्वाधिक पशु लाने वाले और विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी रहे पशुओं के पशुपालकों को पुरस्कृत किया जाएगा।
रैम्प पर गधे-घोड़ों की कैटवॉक
मेले के तहत शुक्रवार और शनिवार को एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बहार होगी, जिसमें पर्यटन विभाग की ओर से भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समिति के उपाध्यक्ष भगवत सिंह राजावत ने बताया कि मेले का खास आकर्षण गधों और घोड़ों की सौंदर्य प्रतियोगिता (फैशन शो) रहेगी, जिसमें फैंसी परिधानों में सजे गधे और घोड़े रैम्प पर कैटवॉक करते नजर आएंगे। इसके अलावा गधा दौड़, घुड़ दौड़ और घोडिय़ों की नृत्य प्रतियोगिता सहित कई विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इनमें पशुपालकों के साथ ही स्थानीय कलाकार भाग लेंगे।
हाट बाजार में सजेंगे कई उत्पाद
मेले में इस बार करीब एक हजार गधों और दो हजार से अधिक घोड़ों के आने की संभावना जताई जा रही है। मेले में सौ रुपए से लेकर करीब पंद्रह हजार रुपए के गधे उपलब्ध रहेंगे। मेले के दौरान हाट बाजार भी लगेगा, जिसमें करीब बीस से भी अधिक स्टॉलें सजाई जाएंगी। स्टॉलों पर जहां गधों और घोड़ों से संबंधित विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित होंगे वहीं महिलाओं और बच्चों के रोजमर्रा में काम आने वाले तथा सजावटी उत्पाद भी प्रदर्शित होंगे।
एशिया का एकमात्र मेला
यह एशिया का एकमात्र ऐसा मेला है जिसमें केवल गधों, घोड़ों व खच्चरों का ही व्यापार होता है। इस मेले का आकर्षण का मुख्य केन्द्र गधा ही होता है या यूं कहिए कि इस फिल्मरूपी मेले का नायक गधा ही होता है। इसी कारण मेले में सबसे दिलचस्प मेले का उद्घाटन व समापन समारोह होता है। इस दौरान आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिताएं और रंगारंग सांस्कृतिक समारोह मेले की शोभा में चार चांद लगाते हैं।
नहीं आते नेता-अधिकारी
मेले के उद्घाटन समारोह में बतौर अतिथि शिरकत करने के लिए कोई भी मंत्री, विधायक या अधिकारी सहजता से तैयार नहीं होते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो नेता मेले के उद्घाटन समारोह में शामिल होता है, वह दोबारा चुनाव नहीं जीत पाता है। हालांकि यह सब निर्मूल बातें हैं। मेले के इतिहास को लेकर इतिहासकारों के अपने मत-मतांतर हैं। कहा जाता है कि इस मेले का जिक्र पौराणिक काल में भी आता है। माना जाता है कि यह मेला करीब नौ सौ वर्षों से भी अधिक समय से लगातार आयोजित होता आ रहा है।
लेखक अमित गर्ग जयपुर में दूरदर्शन से जुड़े हुए हैं.

