उत्तर प्रदेश में 2012 का विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने में भले ही अभी एक साल शेष हैं, लेकिन राजनैतिक दलों में चुनावी जंग फतह करने के लिये अभी से ही चौसर बिछायी जाने लगी है। सारे दलों ने अपने-अपने मोहरे बिठाने शुरु कर दिये हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार को राजधानी आए राहुल गांधी भी प्रदेश कांग्रेसियों मे नया जोश फूंकने पहुंचे हैं। वे कांग्रेस संगठन की मजबूती को प्राथमिकता देते हुये बेहतर परिणाम लाने को आतुर हैं. यह बात दीगर है कि कल तक उनके करीब पहुंचने वाले कार्यकर्ता भारी सुरक्षा के चलते मायूस हुये हैं। मुलायम सिंह यादव ने भी सोमवार को संगठन पदाधिकारियों की बैठक कर 2012 मे सपा की सरकार होने का राग अलाप तथा परिवर्तन रथ चलाने की घोषणा कर अपने कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री मायावती अपने धुर विरोधियों से निपटने का खाका तैयार कर अपने मंत्रियों व विधायकों को सरकार द्वारा कराये गये विकास कार्यों को आमलोगों तक प्रचारित-प्रसारित करने का निर्देश देकर चुनावी तैयारी में जुटजाने का इशारा कर दिया है।
खुद वे प्रदेश के आला अफसरों की क्लास लेनी भी शुरु कर दी हैं। रविवार को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पार्टी के जिलाध्यक्षों व पदाधिकारियों को इकट्ठा कर अति पिछड़ों व अति दलितों को जोड़ने की नसीहत दे दी है। पिछले दो तीन दिनों से प्रमुख पार्टियों के राजनैतिक दिग्गज राजधानी लखनऊ में अपनी ऊर्जा खपा रहें हैं, जिससे प्रदेश की राजनैतिक हलचल काफी बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी खराब कानून-व्यवस्था व बढ़ती महंगाई के मामले को जनता के बीच रख बसपा सरकार व कांग्रेस को बेनकाब करने की तैयारी में है। राजनाथ सिंह ने तो पार्टी जिलाध्यक्षों को यहां तक आगाह किया है कि अति पिछड़ों व अति दलितों को जोड़े बगैर भाजपा का जनाधार बढ़ नहीं पाएगा। प्रतिक्रिया में जिलाध्यक्षों ने जनाधार बढ़ाने के लिए बड़े नेताओं से गांवों का दौरा करने की मांग करते हुये विधान सभा चुनाव के प्रत्याशियों की
जल्द घोषणा का सुझाव दिया है। भाजपा ने गांव चलो कार्यक्रम को 31 जनवरी तक जारी रखने, 6 सांगठनिक क्षेत्रों में बड़े नेताओं की रैलियों के साथ साथ 6 अप्रैल को प्रत्येक गांव में झंडा फहराने का संकल्प एवं 12 फरवरी से 15 मार्च तक सभी ब्लाकों में भ्रष्टाचार, महंगाई व जर्जर कानून व्यवस्था के खिलाफ भाजपा कार्यकर्र्ताओं द्वारा धरना-प्रदर्शन करने और कम से कम 200 सीटें जीतने का लक्ष्य लिया है।
प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति की सोमवार से यहां चल रही दो दिवसीय बैठक में भी मिशन 2012 का ताना-बाना ही बुना गया। कड़ी सुरक्षा के बीच यहां पहुंचे राहुल गांधी की सुरक्षा में सैंकड़ों पुलिस वाले लगे रहे। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते राहुल के यूपी दौरे के दौरान भारी विरोध हुआ था। जिसके चलते प्रधानमंत्री कार्यालय ने मायावती सरकार को लिखकर पूछा था कि राहुल के इलाहाबाद दौरे में यूपी सरकार ने सुरक्षा के क्या इंतजाम किए थे। ज्ञात हो कि इलाहाबाद दौरे के समय समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राहुल के गाड़ी पर चढ़ कर विरोध व हंगामा किया था। इस बार राहुल गांधी की भारी सुरक्षा के चलते कई कांग्रेसी करीब पहुंचने से भी वंचित रहे। प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह, यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी, प्रमोद तिवारी, श्रीप्रकाश जायसवाल, राजीव शुक्ला और पूर्व क्रिकेटर और मुरादाबाद से सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन, मोहसिना किदवई समेत कई दिग्गज नेता आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में पार्टी को सत्ता में पुनः वापस लाने का मसौदा तय करने में मसगूल रहे। समन्वय समिति द्वारा तैयार किए गए ब्लू प्रिंट के अनुसार ही कांग्रेस पूरे साल पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए कार्यक्रम करेगी।
इधर सपा ने भी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं पार्टी द्वारा प्रत्याशियों के चयन का होम वर्क लगभग पूरा कर लिया गया है। दो तिहाई विधानसभा क्षेत्रों में पैनल तैयार हो गए हैं। सपा के राज्य संसदीय बोर्ड ने रविवार को चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी की है। राजनैतिक सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2012 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की अटकलों ने राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ा दी है। हालांकि आधी से ज्यादा सीटों पर प्रत्याशी घोषित करके बसपा तैयारियों में बाजी मार चुकी है, जबकि सपा ने विधानसभा का चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों से 10 हजार रुपये फीस के साथ छह माह पूर्व ही आवेदन मांग लिये थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश भर से 3500 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं तथा जिलों में पर्यवेक्षक भेजकर उनकी रिपोर्ट भी ले ली गई है और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने सभी आवेदकों का साक्षात्कार भी लिया है। दावेदारों से उनकी जीत का आधार, जातीय समीकरण, पार्टी में अनुभव और निष्ठा, सामाजिक पृष्ठभूमि, बसपा सरकार में आंदोलन आदि के संबंध में जानकारी कर हर विधानसभा क्षेत्र से टिकट के गंभीर दावेदारों का पैनल तैयार कर लिया गया है।
पार्टी रणनीति के पहले हिस्से में मायावती सरकार की नाकामियों के खिलाफ हर जिले में अभियान चलाना है। जनता के बीच 2012 में सत्ता में बदलाव का संदेश देना है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव की अगुवाई में चलने वाला परिवर्तन रथ फरीदाबाद (हरियाणा) में बनकर तैयार है। किसानों व नौजवानों से जुड़े मसलों पर भी सरकार को घेरने की योजना है। इसके साथ ही सपा प्रमुख मुलायम सिंह व फिर से पार्टी में लौटे पूर्व मंत्री आजम खां मुस्लिम बहुल जिलों में खासतौर से जनसभाएं कर मुस्लिमों को मोहित करेंगे। मकसद, सपा को लेकर मुसलमानों की गलतफहमियां दूर करना होगा, साथ ही उनके हितों के मामले में कांग्रेस व बसपा को बेनकाब करना होगा। यह बात दीगर है कि आजम मुस्लिमों को बरगलाने में सफल न हो सकें।
लेखक रिजवान चंचल रेड फाइल के संपादक और जनजागरण मीडिया मंच के महासचिव हैं.

