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रामदेव से घबराया आरएसएस!

बाबा स्वामी रामदेव ने भारत स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से संघ परिवार के सभी एजंडों पर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं बाबा के संग आरएसएस के अनुशांगिक संगठन भी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे है। बाबा ने चुनाव में भी अपना राजनैतिक दल बनाकर कूदने की घोषणा कर दी है। जिससे संघ परिवार की दिक्कतें बढ़ती नजर आ रही है। संघ परिवार का झुकाव सदैव ही भाजपा के पक्ष में रहा है। संघ परिवार के राष्ट्रवाद के एजेंडे को बाबा रामदेव ने पूरी तरह से कब्जा लिया है। इतना ही नहीं इन एजेंडों को लेकर बाबा ने राजनीति के मैदान में भी जोर आजमाईश करने की घोषणा कर डाली है। उनके संग आरएसएस के सहयोगी माने जाने वाले संगठन स्वदेशी जागरण मंच व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता बढ़ चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। इन दिनों तो बाबा ने रामजन्म भूमि और विदेश से काला धन वापस लाने तथा साथ ही घरेलू रोजगार को पुनः स्थापित करने हेतु मल्टीनेशनल कंपनियों का भी विभिन्न मंचों से विरोध करना शुरू कर दिया है। जिससे संघ परिवार भीतर ही भीतर परेशानी महसूस करने लगा है। उसके बाद संघ बाबा के नेटवर्क को तोड़ने की जुगत लगा रहा है। इसलिए उत्‍तराखण्ड में आरएसएस की गतिविधियां लगातार बढ़ती दिख रही हैं।

रामदेव

बाबा स्वामी रामदेव ने भारत स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से संघ परिवार के सभी एजंडों पर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं बाबा के संग आरएसएस के अनुशांगिक संगठन भी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे है। बाबा ने चुनाव में भी अपना राजनैतिक दल बनाकर कूदने की घोषणा कर दी है। जिससे संघ परिवार की दिक्कतें बढ़ती नजर आ रही है। संघ परिवार का झुकाव सदैव ही भाजपा के पक्ष में रहा है। संघ परिवार के राष्ट्रवाद के एजेंडे को बाबा रामदेव ने पूरी तरह से कब्जा लिया है। इतना ही नहीं इन एजेंडों को लेकर बाबा ने राजनीति के मैदान में भी जोर आजमाईश करने की घोषणा कर डाली है। उनके संग आरएसएस के सहयोगी माने जाने वाले संगठन स्वदेशी जागरण मंच व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता बढ़ चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। इन दिनों तो बाबा ने रामजन्म भूमि और विदेश से काला धन वापस लाने तथा साथ ही घरेलू रोजगार को पुनः स्थापित करने हेतु मल्टीनेशनल कंपनियों का भी विभिन्न मंचों से विरोध करना शुरू कर दिया है। जिससे संघ परिवार भीतर ही भीतर परेशानी महसूस करने लगा है। उसके बाद संघ बाबा के नेटवर्क को तोड़ने की जुगत लगा रहा है। इसलिए उत्‍तराखण्ड में आरएसएस की गतिविधियां लगातार बढ़ती दिख रही हैं।

रामदेवसूत्रों का कहना है कि पिछले एक महीने में आरएसएस कार्यकर्ता उत्‍तराखण्ड में स्थिति का जायजा लेने के लिए आ रहे हैं, किन्तु उनके आने का क्या औचित्य था इसका सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया। संघ चालक मोहन भागवत भी शुक्रवार को प्रदेश की राजधानी देहरादून में थे। जिससे सत्‍ता के गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि देशभर में भारत स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से बाबा रामदेव की बढ़ रही गतिविधियां से संघ परिवार दिक्कत महसूस कर रहा है। चूंकि संघ परिवार के एजेंडे पर बाबा रामदेव पूरी तरह से कब्जा जमाए बैठे हैं और वे संघ का अंग बनने को भी कतई तैयार नहीं हैं। उल्टे बाबा ने तो प्रदेश की भाजपा सरकार के एक मंत्री पर 2 करोड़ रूपये की रिश्वत मांगने का आरोप जड़ दिया है। इससे साफ जाहिर होता है कि बाबा रामदेव भाजपा से सदैव दूरी बनाए रखेंगे। सूत्रों का कहना है कि बाबा की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा और संघ परिवार दोनों ही अंदरूनी तौर पर घबराए हुए हैं। जिसके चलते ये दोनों बाबा के नेटवर्क को तोड़ने की पुरजोर कोशिश में जुटे हैं।

लेखक अनिल पंछी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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