दिल्ली के रामलीला मैदान में अहिंसक तरीके से चल रहे धरने में रात्रि को बाबा रामदेव और आम आदमी पर पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों द्वारा केंद्र सरकार के इशारे पर की गई कारवाई पर भारतेंदु ह्यूमन केयर एंड डेवलोप्मेंट सोसाइटी की बैठक में इसकी घोर निंदा कि गई. सोसाइटी के सचिव डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश हैं यहाँ किसी भी व्यक्ति को अपनी बात शांति पूर्वक कहने का मौलिक अधिकार प्राप्त हैं. कल रात की घटना हमारे ६० साल से अधिक पुराने लोकतंत्र का काला अध्याय हैं. यह घटना हमें चीन के थेनयान चौक की याद दिलाती हैं जहाँ आम आदमी की आवाज़ को टैंको से कुचला गया था. डॉ. पीयूष ने कहा कि संस्था इस घटना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में हस्ताक्षर अभियान चलाएगी.
न्यूरो सर्जन डॉ. अनूप सिंह यादव ने कहा कि राम लीला मैदान में जो कुछ भी हुआ वो हमें सोचने को विवश करता हैं कि क्या हम वास्तविक रूप से स्वतंत्र हैं. निहत्थे सत्याग्रहियों का क्या सिर्फ इतना दोष था की वह भ्रष्ट नेताओं और नौकरशाहों द्वारा अर्जित किये गए काले धन को देश वापस लाने की मांग कर रहे थे. सोते समय हजारों की संख्या में पुलिस बल द्वारा लाठी चार्ज, आंसू गैस के गोले दागना हमें अंग्रेजी हुकूमत कि याद दिलाता हैं. इन काले अंग्रजों से मुक्ति के लिए देश को फिर से एक स्वाधीनता संग्राम की जरूरत हैं.
संस्था के महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी पूनम बाला ने कहा कि रामदेव जी सत्याग्रह कर रहे थे कोई राजद्रोह जैसी स्थिति नहीं थी. लेकिन भ्रष्टाचार के चलते भीतर से जर्जर हो चुकी केंद्र सरकार ने बच्चों और महिलाओं तक के ऊपर जो करवाई की इससे और दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता हैं. इसी क्रम में पत्रकार सुभाष चन्द्र सिंह ने कहा कि रामदेव जिस मुद्दे पर धरना दे रहे थे वो जनहित का मामला हैं. पूरे देश की जनता जात पात को दरकिनार कर उनके साथ हैं. केंद्र सरकार ने जो भी सोच कर यह घृणित कार्य किया हैं उसका खामियाजा कहीं न कहीं उसको भुगतान होगा. मीडिया ने अपने काम को बखूबी किया हैं और जनता को सच दिखाया हैं. बैठक में विनय प्रताप, दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. गायत्री कुमारी, डॉ सुमन यादव, अलोक सिंह, सुधीर यादव, मिथलेश तिवारी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
जौनपुर से दिग्विजय सिंह राठौर की रिपोर्ट.

