ज़ीसस- का राम सुने कि तुमरे भक्त को पुलिस उठा ले गई.
राम- देखो ज़ीसस, अभी मूड बहुत डिस्टर्ब है. मज़ाक मत करो.
ज़ीसस- का हुआ, रेडी देखने नहीं चलना है क्या?राम- क्या बताएं यार. इन सालों को कितनी बार सपने में आकर समझाया कि मेरे नाम पर ऊटपटांग हरकतें मत किया करो लेकिन मानते कहां हैं सब. नाम जपेंगे मेरा लेकिन मेरी सुनेंगे नहीं. धर्म को मानेंगे लेकिन धर्म की नहीं मानेंगे. सारा उल्टा सीधा काम मेरे नाम पर कर रहे हैं सब.
ज़ीसस- अरे भाई हमरे यहां भी वही स्थिति है. देखे नहीं बुसवा का किया. मुहम्मद साहब से कल बात हुई थी. वो भी इन चीजों से परेशान थे. दुखी मन से कह रहे थे कि बताइए ज़ीसस भाई, यहां हम लोग कितना मिल जुलकर रहते हैं और ई सब धरती पर नरक मचाए हुए हैं. कह रहे थे कि धर्म के नाम पर ई सब क्या कर रहे हैं. ओसामा को तो कल उन्होंने गियर में लिया है. बता रहे थे कि ओसामा गिडगिड़ा कर माफी मांग रहा था. कह रहा था कि मांफ कर दीजिए मैंने अपने स्वार्थ के लिए आपके नाम का इस्तेमाल किया. हां, आप कुछ अपना बता रहे थे.
राम- कल राजीव मेरे पास आया था कहा कि भगवन आपके लिए मैंने आपके जन्मस्थान अयोध्या में ताला खुलवा दिया था. आप खुश हैं न.
ज़ीसस- आपने क्या कहा?
राम- हम कहे कि बेटा पहले ई बताओ कि किसने बताया कि हम अयोध्या में कहां पैदा हुए. ससुर तुम लोग हमरे जन्मस्थान पर दावा ऐसे कर रहे हो कि मानों तुम्हरे सामने हम वहां जन्म लिए हो. एक दूसरे को काट मार रहे हो. कल इंदिरा आई थी. रो रहे थी .कह रहे थी कि भगवन मैंने जेपी पर नर्कलोक में जो अत्याचार किया उसका दुख मुझे आज तक हैं. कई बार स्वर्गलोग की कैंटीन में मैं जेपी से माफी मांग चुकी हूं, लेकिन आज भी जेपी मुझसे सीधे मुंह बात नहीं करते हैं. बाबूजी और गांधी जी भी कई बार सुलह की कोशिश करा चुके हैं. कल जब रामदेव पर हमला हुआ तो उनका मोबाइल पर मैसेज आया था कि देखा, जो तानाशाही का जहर तुमने अपने समय में बोया था उसकी फसल आज लहलहा रही है. आज भी सरकार के खिलाफ बोलने पर डंडे खाने पड़ते हैं. सरकार का विरोध करना जितना कठिन उस समय था आज भी उतना ही कठिन है.
लेखक बृजेश सिंह मध्य प्रदेश में तहलका से जुड़े हुए हैं.

