: बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए बुकी से पैसा लिए पाकिस्तानी खिलाड़ी! : हाल ही में घटित हुए दो किस्से ‘शायद इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त होंगे कि पाकिस्तान आतंकवादियों का ही नहीं बल्कि उन देशप्रेमियों का घर भी है, जो अपने देश की अस्मिता एवं सम्प्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक गिर सकते है! पाकिस्तानी खिलाड़ियों एवं राजनेताओं ने दुनिया के सामने देशप्रेम की एक नई परिभाषा प्रस्तुत की है। पाकिस्तानियों ने दुनिया को सिखाया है कि मुसीबत के वक्त देश एवं देशवासियों की मदद के लिए क्या-क्या और किस-किस तरह के हथकन्डे अपनाए जा सकते है। इंग्लैंड दौरे पर गए पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों को जब पता चला कि बाढ़ की विकरालता से पीड़ित पाकिस्तानियों की मदद के लिए विश्व के दूसरे देश कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। उन पाकिस्तानियों की मदद के लिए, जिन्होंने अपनी फसलें बर्बाद होती देखी हैं और अपने आखों के सामने अपने आशियाने को उजड़ते हुए देखा है, पाकिस्तान के ही लोग हाथ आगे नहीं बढ़ा रहे है तो दौरे पर गए खिलाड़ियों का खून खौल गया।
क्रिकेट के मैदान एवं मैदान के बाहर उनको ये बातें चुभती रहती थी कि कैसे अपने देशवासियों की मदद की जाए। अचानक बुकी मजहर मजीद खुदा के बन्दे के रूप में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की मुश्किल हल करने के लिए प्रकट हो गया! पाकिस्तानी क्रिक्रेट टीम में कहने को तो सभी देशभक्त हैं, पर असली देशभक्त वो है, जो देश के लिए कोई भी घटिया से घटिया काम करने में संकोच न करें! टीम के कप्तान सलमान बट, मो. आमिर, मो. आसिफ और कामरान अकमल समेत तीन अन्य खिलाड़ियों ने परम देशभक्त(!) होने का फर्ज निभाते हुए बुकी मजीर से स्पॉट फिक्सिंग की और बदले में काफी पैसा लिया। देशसेवा के लिए इन खिलाड़ियों ने मैच तो ‘शहीद(गंवा) कर दिया लेकिन बाढ़ से पीड़ित पाकिस्तानियों की मदद के लिए पाकिस्तानी रुपया नहीं बल्कि पौंड कमा लिए, जो कि देश सेवा के काम आएंगें।
अब अगर पूरी क्रिकेट बिरादरी इन खिलाड़ियों पर प्रतिबन्ध चाहती है तो ये तो इन देशभक्त(!) खिलाड़ियों के साथ अन्याय होगा। क्या अपने देश की अस्मिता, सम्प्रभुता एवं सेवा के लिए मैच फिक्स करना गलत है? क्या क्रिकेट का एक मैच उन लाखों लोगों की फसलों (अफीम!) एवं पशुओं (बकरे-बकरियों) से बढ़कर है? मेरी नज़र में पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने वहीं किया जो एक सच्चे देशभक्त(!) को अपने देश के लिए करना चाहिए। एक ऐसे देश के लिए जिसके एक प्रांत के लोग दूसरे मुसीबत से त्रस्त प्रांत के लोगों की मदद करने से कतराते है, जिनके अपने ही अपनों की इबादतगाहों पर बम फोड़ते हैं, जिनके अपने ही दूसरे धर्मों के लोगों को धार्मिक ‘शत्रुता’ के तहत गोमांस परोसते है और धर्म परिवर्तित करने के लिए दबाव बनाते है।
बाढ़ से पीड़ित पाकिस्तानी जनता की मदद एवं देशभक्ति(!) का प्रदर्शन करने में पाकिस्तानी नेता, क्रिकेट खिलाड़ियों से कुछ कम नहीं हैं। प्राकृतिक आपदा के समय विदेश यात्रा पर गए पाकिस्तानी राष्ट्रपति विदेश (ब्रिटेन) से जूता! खाकर वापस आए और देश में चहुंओर मची त्राहि-त्राहि देखी तो उनके साथ-साथ अन्य पाकिस्तानी नेताओं ने भी मन ही मन मगरमच्छी आंसू बहाए।
देशभक्ति की पराकाष्ठा तो तब हुई जब पाकिस्तानियों ने भारत द्वारा दी गई सहायता राशि को लेने से इनकार कर दिया! बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत(शत्रु) से आर्थिक मदद लेकर पाकिस्तानी राजनेताओं ने देश की कथित सम्प्रभुता एवं अमेरिकी आत्मनिर्भरता को खतरे में डालना उचित नहीं समझा। उन्होंने तुरन्त क्लोरोमिन्ट(!)खाई और दिमाग की बताई जलाई। भारत सरकार द्वारा दी गई सहायता राशि को ठुकरा देने के जोश में पाकिस्तानी सरकार ने ब्रिटेन द्वारा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दी गई सैन्य सहायता को भी मना कर दिया। गद्दार पाकिस्तान ने लाखों बाढ़ पीड़ितों को दांव पर लगा कर अपनी ‘खुद्दारी’ को बरकरार रखा। देश हो तो ऐसा!
वैसे तो पाकिस्तानियों को मनु व मनु के सिद्धान्तों से कोई लगाव नहीं है, लेकिन मुसीबत के वक्त पाकिस्तानी नेताओं को मनु के राष्ट्र के सिद्धान्त याद आए। मनु के सिद्धान्त ‘शत्रु का शत्रु मित्र होता है’ का पालन करते हुए पाकिस्तान को अपने परम मौकापरस्त मित्र चीन की याद आई और चीनी मदद के लिए हाथ लपका लिए, बिना समय व्यर्थ किए।
पाकिस्तानी नेताओं ने जिस देशप्रेम का उदाहरण दिया है, वो लाजवाब और काबिले तारिफ है। बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए जब पैसे का बन्दोबस्त किसी देश से नहीं हुआ तब पाकिस्तानी नेताओं और सेनाधिकारियों ने सोचा कि कश्मीर में अशांति व आतंकवाद फैलाने में जो पैसा उग्रवादियों एवं आतंकवादियों पर खर्च किया जा रहा है, उस पैसे को बाढ़ पीड़ितों की मदद में इस्तेमाल कर लिया जाए। पाकिस्तानी नेताओं ने एक तीर से दो शिकार करने की युक्ति निकाली। युक्ति के तहत पाकिस्तान ने भारत को परेशान करने व कश्मीर में अशांति व आतंकवाद बनाए रखने का जिम्मा अपने मौकापरस्त कम्युनिस्ट मित्र चीन को सौंप दिया और आतंकवादियों पर खर्च होने वाले पैसों को बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगा दिए।
पाकिस्तानी सरकार ने थोड़ा सोचा और निर्णय लिया कि वक्त अमेरिका परस्त बनने का नहीं बल्कि चीनी रूख अख्तियार करने का है, इसलिए पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तानी कब्जे का कश्मीरी क्षेत्र चीन को भेंट कर दिया। पाकिस्तानी सरकार ने बलूचिस्तान-गिलगिट के रास्ते चीन की मदद खाड़ी के देशों तक पहुंचने तथा चीनी विवादित क्षेत्र सिंकियांग को बलूचिस्तान से जोड़ने में खून-पसीना एक कर दिया है। एक बात तो साफ हो गई कि पाकिस्तान ने विश्व पटल पर ‘शक्ति संतुलन व देशप्रेम’ का अनूठा व अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया है। चीन को खाड़ी के देशों तक पहुंचने में मदद कर पाकिस्तान ने अमेरिका व चीन के बीच ‘शक्ति को संतुलित’ करने में अहम भूमिका निभाई है।
लेखक नीरज अम्बुज स्वतंत्र पत्रकार हैं.

