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शोध को बढ़ावा देने के लिए पत्रकारिता विश्वविद्यालय और प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम के बीच एमओयू

पत्रकारिता विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली

भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल और डॉ. गोस्वामी गिरधारी लाल शास्त्री प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली के बीच शोध कार्य के क्षेत्र को विस्तार देने के लिए संस्थागत सहयोग सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एमओयू के अनुसार प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली में विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा। संस्थागत सहमति पत्र के मुताबिक डॉ. गोस्वामी गिरधारी लाल शास्त्री प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली विशेषकर संस्कृत और प्राच्य ज्ञान की संचार परंपरा के क्षेत्र में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा। प्रतिष्ठानम दिल्ली राज्य सरकार की पंजीकृत संस्था है और यह शोध के क्षेत्र में कार्यरत है।

पत्रकारिता विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली

भोपाल । माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल और डॉ. गोस्वामी गिरधारी लाल शास्त्री प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली के बीच शोध कार्य के क्षेत्र को विस्तार देने के लिए संस्थागत सहयोग सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एमओयू के अनुसार प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली में विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा। संस्थागत सहमति पत्र के मुताबिक डॉ. गोस्वामी गिरधारी लाल शास्त्री प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानम, नईदिल्ली विशेषकर संस्कृत और प्राच्य ज्ञान की संचार परंपरा के क्षेत्र में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के शोध केंद्र के रूप में कार्य करेगा। प्रतिष्ठानम दिल्ली राज्य सरकार की पंजीकृत संस्था है और यह शोध के क्षेत्र में कार्यरत है। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला की उपस्थिति में कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा और प्रतिष्ठानम के निदेशक जीतराम भट्ट ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय की शोध परियोजना ‘संवाद की भारतीय परंपरा’ के अंतर्गत प्रतिष्ठानम के साथ यह एमओयू किया गया है। इस शोध केंद्र के विकसित होने से प्राच्य भारतीय ज्ञान में संचार पर केंद्रित शोधकार्य को बढ़ावा मिल सकेगा। प्राच्य भारतीय ज्ञान में संचार के क्षेत्र में अनुसंधान करने वाले शोधार्थी इस शोध केन्द्र से शोध उपाधि (पीएचडी) भी प्राप्त कर सकेंगे। पीएचडी के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नियम लागू होंगे। गौरतलब है कि वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परंपरा में शोधकार्य की महती आवश्यकता है।

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