असम और पूर्वोत्तर में कार्य कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट के महासचिव परमानंद पांडेय ने कहा है कि असम के साथ पुर्वोत्तर के अन्य राज्यों में कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा के लिए यहां की सरकारों को गंभीरता से विचार करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार को पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ और यूपी के साथ अन्य कई राज्यों की तरह यहां के पत्रकारों के लिए पेंशन और बीमा सुरक्षा योजनाएं लागू करनी चाहिए। ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की रक्षा में लगे लोगों का कल्याण हो सके।
आज यहां गुवाहाटी प्रेस क्लब के कार्यक्रम प्रेस से मिलिए में स्थानीय पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ पत्रकार पांडे ने कहा कि मौजूदा दौर में पत्रकार ही एक ऐसा प्राणी है जिसका न कोई वेतनमान है, न सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा और न ही जीवन की अंतिम बेला में जीने के लिए कोई पेंशन, इसलिए देश के सभी प्रदेशों की सरकारों को चाहिए कि वे पत्रकारों के लिए पेंशन और बीमा सुरक्षा की सुविधा देकर समाज के इस महत्वपूर्ण अंग को सामाजिक आर्थिक सुरक्षा दें। देश के अन्य भागों की अपेक्षा पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में पत्रकारिता को थोड़ा मुश्किल बताते हुए प्रेस कौंसिल आफ इंडिया के पूर्व सदस्य पांडे ने कहा कि सीमाई इलाके के पत्रकारों के लिए विशेष सरकारी सुविधा होने की बातों पर जोर दिया।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि जस्टिस मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए संघर्ष किया जा रहा है और इससे हर हाल में लागू करवाया जाएगा। लेकिन वे फिलहाल सुप्रिम कोर्ट में एक याचिका दायर करने पर विचार कर रहें हैं। जिसमें पत्रकारों की सामाजिक, आर्थिक और जानमाल से जुड़े मुद्दों पर विचार करने के लिए न्यायालय से आग्रह किया जाएगा। आजादी के बाद देश के इस पहले ट्रेड यूनियन के महासचिव तथा अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री पांडे ने कहा कि पेड न्यूज और पत्रकारिता के गिरते स्तर को रोकने के लिए यह जरुरी है कि पत्रकारों और गैर-पत्रकारों का वेतन स्तरीय हो।
गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.

