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समाज-सरोकार

समान वेतन के लिए केन्द्रीय कानून बनाए सरकार

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वर्कर्स फ्रंट ने की गोष्ठी

आगरा :  देश के राष्ट्रपति भवन, संसद की कैन्टीन से लेकर आगरा के विद्युत वितरण खण्ड में कम्प्यूटर आपरेटर, लाइन मैन, आपरेटर से लेकर हर विभाग में नियमों और कानूनों का उल्लंधन करके स्थायी प्रकृति के कामों में संविदा  श्रमिकों से काम कराया जा रहा है। यह श्रमिक अपनी पूरी जिन्दगी एक ही स्थान पर काम करते हुए महज सात हजार से लेकर नौ हजार तक मजदूरी पर काट देते है। अपने बाल बच्चों की परवरिश की मजबूरियां उनसे खतरनाक व असम्मानजनक हालातों में काम कराती है। जबकि उसी काम के लिए उस विभाग में उसी पद पर लगा स्थाई श्रमिक सत्तर हजार तक वेतन प्राप्त करता है। इसलिए 26 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए निर्णय के आलोक में केन्द्र सरकार को समान काम के लिए समान वेतन हेतु तत्काल केन्द्रीय कानून बनाकर संविदा श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वर्कर्स फ्रंट ने की गोष्ठी

आगरा :  देश के राष्ट्रपति भवन, संसद की कैन्टीन से लेकर आगरा के विद्युत वितरण खण्ड में कम्प्यूटर आपरेटर, लाइन मैन, आपरेटर से लेकर हर विभाग में नियमों और कानूनों का उल्लंधन करके स्थायी प्रकृति के कामों में संविदा  श्रमिकों से काम कराया जा रहा है। यह श्रमिक अपनी पूरी जिन्दगी एक ही स्थान पर काम करते हुए महज सात हजार से लेकर नौ हजार तक मजदूरी पर काट देते है। अपने बाल बच्चों की परवरिश की मजबूरियां उनसे खतरनाक व असम्मानजनक हालातों में काम कराती है। जबकि उसी काम के लिए उस विभाग में उसी पद पर लगा स्थाई श्रमिक सत्तर हजार तक वेतन प्राप्त करता है। इसलिए 26 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए निर्णय के आलोक में केन्द्र सरकार को समान काम के लिए समान वेतन हेतु तत्काल केन्द्रीय कानून बनाकर संविदा श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करना चाहिए।

यह बातें आज यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने छीपीटोला स्थित अम्बेडकर सामुदायिक केन्द्र में आयोजित विचार गोष्ठी में कहीं। इस गोष्ठी में बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई से लेकर तमाम विभागों के संविदा श्रमिक सैकड़ों की संख्या में उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में आयी सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में तो तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के सरकारी पदों को ही खत्म करने की संस्तुति की है जिसे भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यानि आने वाले समय में स्थायी कामों पर और भी संविदा श्रमिकों से काम कराया जायेगा। इन संविदा श्रमिकों की हालत इतनी बुरी है कि इनके लिए बने नियम कानून लागू नहीं होते और सरकारी शासनादेश तक रद्दी की टोकरी में डाल दिए जाते है। आमतौर पर इन्हें न्यूनतम मजदूरी, बोनस, ईपीएफ, ईएसआई, रोजगार कार्ड, वेतन पर्ची जैसी तमाम कानूनी लाभ नहीं प्राप्त होते है। यहां तक की यदि यह अपने कानूनी हक की बात उठाते है तो ठेकेदार व मालिक व प्रबंधन द्वारा बिना किसी नोटिस, सूचना के काम से निकाल कर बाहर कर दिया जाता है। इन मजदूरों के सम्मानजनक जीवन के प्रति सरकारों की हालत यह है कि केन्द्र सरकार के वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2 सितम्बर की हड़ताल से पहले न्यूनतम मजदूरी 350 रू0 करने की घोषणा की थी। इस घोषणा की थी। इसके अनुसार हर मजदूर की मजदूरी में 100 रू0 की वृद्धि की जानी थी पर आज तक इस सम्बंध में आदेश जारी नहीं हुए और अक्टूबर माह में हुई वृद्धि में महज 4 रू0 की बढोत्तरी हुई। उन्होंने इन मजदूरों के संविधान प्रदत्त अधिकारों को देने की मांग उठाई।

गोष्ठी की अध्यक्षता यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के जिला संयोजक आर0 के0 पाठक और संचालन ठेका मजदूर यूनियन के महामंत्री हरी मोहन शर्मा ने किया। गोष्ठी को बृजमोहन, राजेन्द्र सिंह, दुष्यंत वर्मा, मुकंदी लाल नीलम, राम विलास शर्मा, सुखबीर त्यागी, रामवीर सिंह, गजेन्द्र सिंह, शेर सिंह, विनय आदि ने सम्बोधित किया।

आर0 के0 पाठक
जिला संयोजक
यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट

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