Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

बातों बातों में

सरकार बड़ी निकम्‍मी है, न अन्‍ना को सेट कर पाई न पैसे को

भ्रष्टाचार प्रधान हमारा देश आजकल अन्ना प्रधान देश हो गया है। गूंगे भी अन्ना की प्रशंसा में धाराप्रवाह बोल रहे हैं। धाराप्रवाह बकवास में माहिर नेता गैस पर रखे कुकर में उछलते आलूओं की तरह अन्ना के समर्थन में भ्रष्टाचार को कोसने की प्रतियोगिता में वीरता चक्र हासिल करने पर आमादा हैं। और-तो-और भिखारियों की मंडली में भी फीलगुड की भावनाएं हिलोरें मारने लगी हैं। फुटपाथ पर बैठकर भीख मांगने और रात में सोने तक के लिए पुलिसवालों को पैसे देने पड़ते थे। जिन्हें बैठकर भीख मांगने के लिए ठीया नसीब नहीं था उन्हें जनगणना की ड्यूटी पर लगे सरकारी मास्टरों की तरह घर-घर जाकर भीख मांगनी पड़ती थी। वे भी इस गोल्डन सप्ताह में ठप्पे से रामलीला मैदान जाकर दो टाइम भरपेट इज्जत की रोटी तो क्या तबीयत से तरह-तरह के माल उड़ा रहे हैं।

भ्रष्टाचार प्रधान हमारा देश आजकल अन्ना प्रधान देश हो गया है। गूंगे भी अन्ना की प्रशंसा में धाराप्रवाह बोल रहे हैं। धाराप्रवाह बकवास में माहिर नेता गैस पर रखे कुकर में उछलते आलूओं की तरह अन्ना के समर्थन में भ्रष्टाचार को कोसने की प्रतियोगिता में वीरता चक्र हासिल करने पर आमादा हैं। और-तो-और भिखारियों की मंडली में भी फीलगुड की भावनाएं हिलोरें मारने लगी हैं। फुटपाथ पर बैठकर भीख मांगने और रात में सोने तक के लिए पुलिसवालों को पैसे देने पड़ते थे। जिन्हें बैठकर भीख मांगने के लिए ठीया नसीब नहीं था उन्हें जनगणना की ड्यूटी पर लगे सरकारी मास्टरों की तरह घर-घर जाकर भीख मांगनी पड़ती थी। वे भी इस गोल्डन सप्ताह में ठप्पे से रामलीला मैदान जाकर दो टाइम भरपेट इज्जत की रोटी तो क्या तबीयत से तरह-तरह के माल उड़ा रहे हैं।

मुफ्ते माल दिल बेरहम। सब के सिर पर टोपी है, जिस पर लिखा है- मैं अन्ना हूं। ड्यूटी पर तैनात सिपाही उन्हें पहचानकर ऐसे देख रहा है जैसे कि बकरे को कसाई देखता है। वो गुस्से से बुदबुदाता है- अन्ना ने तो अपनी रोटी मर्ज़ी से छोड़ी मगर हमारी दिहाड़ी जबरदस्ती मार दी। सरकार भी निकम्मी है। हम तो बड़े से बड़ा केस ले-देकर हाल सुलटा देते हैं। यहां पूरी सरकार मिलकर भी एक अदद अन्ना को सेट नहीं कर पा रही। किरण बेदी मैडम तो अपने ही महकमे की दबंग अफसरों में रही हैं। वो भी कुछ नहीं कर पा रहीं। अरे अगर सरकार नहीं मान रही तो अन्ना को ही झुकाने की जुगत लगानी चाहिए। अपनी तो जब से यहां ड्यूटी लगी है रोज की दिहाड़ी मारी जा रही है।

अन्ना तो फौज में रहे हैं उन्हें क्या मालूम पुलिस महकमें का दस्तूर। वो स्साला रामलाल ही फायदे में रहा। जिसकी यहां ड्यूटी नहीं लगी। सभी का हिस्सा अकेले ही डकार रहा होगा। रेड़ीवाले, तहबाजारीवाले सभी पर डंडा फिराकर उसने अपनी जन्माष्टमी तो खूब तबीयत से मनाई होगी। अपनी तो बांसुरी इस अन्ना ने बजा रखी है। अरे कानून व्यवस्था का काम पुलिस का है। हमने रातोंरात बाबा रामदेव को निबटा दिया। कैसे सलवार पहनकर भागा था। भागता कैसे नहीं। पुलिस के डंडे के आगे तो भूत भी लंगोटी छोड़कर भाग जाते हैं। ये सरकार तो खामख्वाह मामले को आगे बढ़ा रही हैं। हमारे महकमे पर ही विश्वास नहीं रहा सरकार का। तो खुद तो डूबेगी ही हमें भी जबरदस्ती उपवास करवाएगी। अरे अगर दम नहीं तो क्या जरूरत थी अन्ना से पंगा लेने की।

हमने कालू से हफ्ता बांध लिया कि नहीं। क्या फायदा लड़ाई-झगड़े में। दोनों का ही नुकसान होता है। इस नासमझ सरकार की तो इज्जत खराब हो ही रही है हमारी भी उसने इज्‍जत के चीथड़े उड़ा दिए। वर्दी में भी ऑन ड्यूटी बीड़ी खरीद के पीनी पड़ रही है। क्या चलेगी ये सरकार। अब तो पत्रकार भी इनकी रोज़ बखिया उधेड़ रहे हैं। हमारे थानेदार साहब मुहल्ले तक के पत्रकार को सेट रखते हैं। यह सरकार होकर भी कुछ नहीं कर पाई। न अन्ना को सेट कर पाई न पैस को। यह ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी। क्या करू, अन्ना के साथ एक फोटो खिंचवा ही लूं। वक्त जरूरत काम आएगा।

व्यंग्य लेखक पंडित सुरेश नीरव हिंदी काव्यमंच के लोकप्रिय कवि हैं. 16 पुस्तकें प्रकाशित. 7 धारावाहिकों का पटकथा लेखन. अंग्रेजी, उर्दू, फ्रेंच में अनुवाद. 30 वर्ष तक कादम्बिनी के संपादन मंडल से संबद्ध. छब्बीस देशों की विदेश यात्राएं. भारत के राष्ट्रपति से सम्मानित. आजकल स्वतंत्र लेखन और यायावरी. उनसे संपर्क सुरेश नीरव, आई-204, गोविंद पुरम, गाजियाबाद या मोबाइल नंबर 09810243966 के जरिए किया जा सकता है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...