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सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो या सिर्फ सोनिया गाँधी

नूतन ठाकुर: वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अशोक पांडे ने सोनिया के नाम को लेकर रिट दायर किया : लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक पांडे ने एक बिलकुल अलग किस्म के मुद्दे पर रिट याचिका दायर किया है. इसमें उन्होंने सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो को प्रतिवादी बनाया है. इस रिट में पांडे का कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए अपने नाम से अलग नाम का इस्तेमाल कर रही हैं. इसमें उन्होंने उनके अलावा भारत के चुनाव आयोग तथा कैबिनेट सचिव को प्रतिवादी बनाया है. उनका कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो, पत्नी स्वर्गीय राजीव गाँधी, तत्समय निवासी एक, सफदरजंग रोड, नयी दिल्ली ने गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग में नागरिकता अधिनियम की धारा पांच में इसी नाम से अपना पंजीकरण कराया और भारत की नागरिकता प्राप्त की, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर सोनिया गाँधी कर लिया और इस बारे में गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग से नागरिकता अधिनियम के अनुसार अनुमति नहीं ली. इस प्रकार पांडे के अनुसार सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो का नाम बदलना अवैध है.

नूतन ठाकुर: वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अशोक पांडे ने सोनिया के नाम को लेकर रिट दायर किया : लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक पांडे ने एक बिलकुल अलग किस्म के मुद्दे पर रिट याचिका दायर किया है. इसमें उन्होंने सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो को प्रतिवादी बनाया है. इस रिट में पांडे का कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए अपने नाम से अलग नाम का इस्तेमाल कर रही हैं. इसमें उन्होंने उनके अलावा भारत के चुनाव आयोग तथा कैबिनेट सचिव को प्रतिवादी बनाया है. उनका कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो, पत्नी स्वर्गीय राजीव गाँधी, तत्समय निवासी एक, सफदरजंग रोड, नयी दिल्ली ने गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग में नागरिकता अधिनियम की धारा पांच में इसी नाम से अपना पंजीकरण कराया और भारत की नागरिकता प्राप्त की, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर सोनिया गाँधी कर लिया और इस बारे में गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग से नागरिकता अधिनियम के अनुसार अनुमति नहीं ली. इस प्रकार पांडे के अनुसार सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो का नाम बदलना अवैध है.

नागरिकता नियमावली 1956 के नियम 10(2) और 27 का हवाला देते हुए पांडे ने कहा है कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद भारत के निर्वाचन आयोग और कैबिनेट सचिव को निर्देशित करे की सभी शासकीय स्थानों पर उनका असली नाम ही लिखा जाए. अब कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेगी यह तो आगे देखना है पर इतना जरूर है कि यह अपने आप में एक अलग ही किस्म का रिट है.

लेखक डॉ. नूतन ठाकुर पीपल’स फोरम की संपादक हैं.

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