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संगीत-सिनेमा

हमू काका बाबा ना पोरया रे….

भारत के हर हिस्से का अपना खाना, पीना, गीत, संगीत, मुहावरे, वाणी, नृत्य, संस्कृति आदि है। लोक से जुड़ी ये चीजें बाजार के दौर में हाशिए की ओर खिसक रही हैं। ग्लोबल कल्चर इन लोक कल्चर को निगलने के लिए आगे बढ़ रहा है। ग्लोबल कल्चर में जहां पैसा और उपभोक्तावाद को तवज्जो दिया जाता है, वहीं लोक कल्चर में श्रम, संवेदना और आत्मा को सर्वोच्च रखा जाता है। यहां हम आपको लेक्चर सुनाने नहीं बल्कि लोक गीत-संगीत से रूबरू कराने लाए हैं। झाबुआ इलाके के इस लोक नृत्य और लोक गीत-संगीत का आनंद लेते वक्त आप भूल जाएंगे कि आप खुद किस इलाके या भाषा वाले हैं। इनकी बातें भले समझ में न आए लेकिन भाव तो खूब समझ में आ रहा है। यह गीत झाबुआ इलाके का सुपरहिट गीत है। इन अलमस्त झाबुआवासियों को सुनिए और झूमिए, यू-ट्यूब के इस वीडियो पर क्लिक करिए–

नीचे यू-ट्यूब वीडियो लगाना है।

 

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