मैंने अपने फेसबुक वाल पर कुछ प्रश्न पूछे. मसलन- “आईआईएम हेतु कैट की परीक्षा केवल अंग्रेजी में ही क्यूँ- क्या हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वाले अच्छे मैनेजर नहीं बन सकते?” तथा “आईआईएम प्रवेश के लिए कैट परीक्षा हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी क्यों नहीं?” इस पर, मुझे कई तरह की टिप्पणियाँ प्राप्त हुई हैं, जिनमे से कुछ मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँ. एक सज्जन कहते हैं- “कैट के काटने से ख़तरा है आईआईएम वालों को, इसीलिए शायद” तो दूसरे ने कहा- “जब तक इस देश में अंग्रेजी को प्रतिबंधित नहीं किया जाता तब तक हिंदी और क्षेत्रीय भाषा के अस्तित्व पे खतरा मंडराता रहेगा… और ऐसा तबतक नहीं हो सकता जबतक अंग्रेजों के दलालों के कब्जे में ये देश रहेगा… अंग्रेज तो चले गए लेकिन उनके कुकर्मों से उत्पन्न दलाल का वंश यहीं है.” एक और व्यक्ति ने कहा- “सही कहा आपने, हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी है. इसीलिए कैट हिंदी में होनी ही चाहिए.”
एक विचार यह आया कि परीक्षा और बाद में होने वाली पढ़ाई में समरूपता लाने के लिए यह उचित प्रतीत होता है कि कैट की भाषा अंग्रेजी रखी जाए. इसका यह मतलब नहीं है कि हमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को किसी प्रकार से कमतर आंकना चाहिए या उन्हें कम महत्व देना चाहिए पर चूँकि हमारे देश में क्षेत्रीय भाषाओं में गहरी खाई है, अतः हमारे देश में राष्ट्रीय भाषा के प्रश्न को ले कर भी विवाद बना ही रहता है.
इसका विरोध करते हुए एक दूसरा दृष्टिकोण यह सामने आया कि आज भी हमारे देश की सत्तर फीसदी आबादी कृषि पर आधारित है और इस प्रकार की आबादी को सपोर्ट करने के लिए मूल रूप से अंग्रेजी भाषा की कोई जरूरत नहीं है. यह हमारा आतंरिक भय और हमारी कुंठा है कि हम अंग्रेजी के बगैर काम नहीं चला सकते हैं. ठीक है हमें अंग्रेजी की जरूरत है पर इसका यह अर्थ नहीं कि हम हिंदी से काम नहीं चला सकते.
एक तरफ से तुरंत जापानी और चीनी भाषा का तर्क आया कि उन देशों में तो अंग्रेजी की ऐसी जरूरत नहीं होती, वे अपनी भाषाओं में अपना काम आराम से चला रहे है. पर यह भी कहा गया कि उन देशों से हमारी स्थिति इस रूप में भिन्न है कि जहां उन देशों में मात्र एक भाषा पर लोगों की आम सहमति है, वहीं हमारे देश में अभी इस बात पर भी आम सहमति नहीं है कि हमारी सामूहिक भाषा क्या हो.
एक तर्क यह भी आया कि ये बातें अपनी जगह सही हैं पर यह तो एक तथ्य है ही कि हिंदी हमारे देश के एक बड़े भू-भाग पर बोली जाती है और ऐसे में यदि आईआईएम के लिए ली जाने वाली कैट परीक्षा भी हिंदी भाषा में ली जाए तो इससे हमारी भारतीय भाषाओं की स्थिति में तो निश्चित सुधार होगा. बल्कि कहने वाले ने इसके लिए हिंदी फिल्मों का तर्क सामने रखा कि किस तरह हिंदी फिल्मों ने पूरे देश में इस भाषा के प्रचार-प्रसार का कार्य किया है. इस तरह से ही यदि उच्चस्तरीय परीक्षाओं की भाषा भी हिंदी रखी जायेगी तो वह हिंदी के लिए निश्चित तौर पर हितकारी होगी.
एक आदमी ने तो बहुत तीखे स्वर में कहा कि यह सब तो ठीक है, पर चूँकि आईआईएम के सारे लड़के मुख्य रूप से मल्टीनेशनलों में जा रहे हैं इसीलिए वे तो केवल अंग्रेजी को ही अपनी भाषा मानेंगे. उनकी कोई रूचि हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं के लगाव में थोड़े ही है. एक और नाराज़ स्वर आया- “जब हम ही अपनी इज्जत नहीं करते तो दूसरे क्या करेंगे, विदेशों में आज हिन्दी भाषा का बोलबाला हैं, लेकिन जब तक हम स्वयं ही मातृभाषा के महत्व को नहीं समझेंगे तब तक यूं ही चलता रहेगा.”
प्रतिपक्ष का तर्क भी सुनिए- “क्या आप को लगता है कि अब इस स्थिति से वापसी हो सकती है. अरे देखिये, अब तरक्की का पहिया इतना घूम चुका है कि उसे पीछे रोटेट करना संभव नहीं है. और फिर अंग्रेजी में बुराई क्या है? इंग्लिश तो हमारे लाइफ के पार्ट में ऐसे घुल चुकी है कि उसके बगैर गुज़ारा नहीं. आप खुद ही सोचिये कि कार, बस, सिनेमा, कंप्यूटर, साइकिल, रेल, ट्रेन जैसे शब्दों के बगैर जीवन कैसे चल सकता है. कैट परीक्षा को हिंदी में क्या बोलेंगे यह भी एक चैलेन्ज हो जाएगा. फिर पूरे विश्व से संपर्क रखने के लिए एक ऐसी भाषा होनी चाहिए जो सभी जगहों पर स्वीकार्य हो. मेरी दृष्टि में अंग्रेजी ही एकमात्र ऐसी भाषा है.”
फिर एक मत यह आया कि- “जरूर यह परीक्षा हिंदी में होनी चाहिए. अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अतिरिक्त योग्यता है जो वैश्वीकरण के दौर में समृद्ध अकादमिक व संपर्क भाषा है.” तो एक बड़ी ही मजेदार टिप्पणी आई- “सर जी, हिंदी और अन्य भाषा जानने वाले लोग मालिक बनते हैं- सरकार, उनको मैनेजर क्यों बनवा रहे हो.”
अंतिम टिप्पणी के रूप में आईआईएम अहमदाबाद के एक प्रोफ़ेसर साहब की बात रखूँगा- “अंग्रेजी आज ग्लोबल बिजनेस की भाषा है. जर्मनी, जापान, फ़्रांस, इटली, चीन जैसे देशों में भी कई सारे इंटरनल मेमो अंग्रेजी भाषा में होते हैं. इस तरह आज हिंदी भाषा में कैट परीक्षा लिए जाने की बात करना पूरी व्यवस्था को पीछे धकेल देने का प्रयास करना है. यह किसी भी प्रकार से उचित नहीं है.”
मैं यह सब कहने के बाद पुनः अपने प्रश्न कर आऊंगा- “आईआईएम हेतु कैट की परीक्षा केवल अंग्रेजी में ही क्यूँ- क्या हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वाले अच्छे मैनेजर नहीं बन सकते ?” तथा “आईआईएम प्रवेश के लिए कैट परीक्षा हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी क्यों नहीं?” आप इस विषय में क्या सोचते हैं?
लेखक अमिताभ ठाकुर आईपीएस अधिकारी हैं. लखनऊ में पदस्थ हैं.

