समाज-सरोकार
आज सुबह से ही मुझे बधाइयों का तांता लगा हुआ है. बल्कि सुबह क्यों, रात ग्यारह बजे के बाद से ही मुझे कई सारी...
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आज सुबह से ही मुझे बधाइयों का तांता लगा हुआ है. बल्कि सुबह क्यों, रात ग्यारह बजे के बाद से ही मुझे कई सारी...
मैंने अपने फेसबुक वाल पर कुछ प्रश्न पूछे. मसलन- “आईआईएम हेतु कैट की परीक्षा केवल अंग्रेजी में ही क्यूँ- क्या हिंदी या अन्य भारतीय...
हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री, कौन है आरुषी का असली कातिल?, तलवार दम्पति पर चलेगा मुक़दमा - ये चंद ऐसे शीर्षक हैं जो...
दिव्या नाम था उसका,दिव्य थी ज्योति सी,कक्षा छह की छात्रा,अभी आगे लंबा भविष्य,अपनी माँ का सपना,अपने पिता की धरोहर,औकात से बढ़ कर,
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या विकराल और अनियंत्रित स्वरुप ले सकती है, यह इन्टरनेट के आने से सभी जगह देखा जा सकता है. इन दिनों...
कल लखनऊ के एक अखबार में एक खबर पढ़ रहा था. खबर ठीक-ठाक स्थान घेरे हुए था. चार कालम का तो होगा ही. खबर...