अवैध शराब की बिक्री को महिमामंडित करती इस फिल्म का गुजरात और बिहार में प्रदर्शन क्यों?

हमारे लिए कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता, बस किसी का बुरा नहीं होना चाहिए… फिल्म रईस का है ये डायलाग… इस सन्देश पर शाहरुख़ खान की नई फिल्म रईस में दिया गया है। फिल्म का नायक पूरी फिल्म में कई बार उपरोक्त सन्देश को दोहराता है। अब आप जरूर जानना चाहेंगे कि फिल्म के नायक का धंधा क्या है। फिल्म के नायक का धंधा शराब प्रतिबंधित राज्य गुजरात में दारु बेचने का है। है न कन्फ्यूजन! पूरी फिल्म की कहानी नायक के इसी कंफ्यूजन पर आधारित है।

फिल्म के नायक को अपनी गलती का एहसास तब होता है जब सोने का बिस्कुट तस्करी करने के बजाए गलती से विस्फोटक सामग्री rdx का एक बड़ा खेप शहर में पहुंचा देता है और पांच बड़े धमाके हो जाते हैं। इसके बाद येन केन प्रकारेण फिल्म के नायक रईस का पुलिस इनकाउंटर हो जाता है। फिर राईस को नायकत्व प्रदान करते हुए इस फिल्म का समापन किया जाता है। फिल्म में अवैध रूप से शराब बेचने के तहत रह के हथकंडे दिखाए गए हैं, टमाटर में दारु को इंजेक्ट कर उसे बेचते और खरीदते दिखाया गया है।

फिल्म में दिखाया गया है कि दारु और सोने के बिस्कुट की तस्करी तक तो बात धंधे की थी, लेकिन rdx की तस्करी गलत है। फिल्म की नजर से देखें तो दारु का कला धंधा करने से किसी का बुरा नहीं होता है, सोने क़ी तस्करी करने से किसी का बुरा नहीं होता है, लेकिन rdx की तस्करी करने से लोग मरते हैं इसलिए या गलत था। भारतीय कानून और संविधान की नजर से इस फिल्म को देखा जाए तो राईस के जीवन का वजूद ही गलतियों पर टिका हुआ था। खैर, जो भी हो दर्शक फिल्म को पसंद कर रहे हैं, तालियां दे रहे हैं, पैसे भी दे रहे हैं। आश्चर्य है फिल्म गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में भी बेरोकटोक चल रही है। खासकर बिहार में फिल्म रिलीज होने के महज चार दिन पहले शराब बंदी के समर्थन में लोगों ने मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड बनाया। आपको हैरानी होगी कि बिहार में भी फिल्म अच्छा बिजनेस कर रही है।

ऋषव मिश्रा कृष्णा
प्रभात खबर
नवगछिया
भागलपुर, बिहार
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