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कांग्रेस और पीके एक दूसरे से छुटकारा पाने की फिराक में!

भले ही प्रियंका को आगे लाने में कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई हो, लेकिन चर्चा यह भी चल रही है कि कांग्रेस अपने रणनीतिकार प्रशांत किशोर से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही है। गत दिनों दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ यूपी कांग्रेस के नेताओं की एक अहम बैठक में पीके के मसले पर खुलकर चर्चा हुई तो इस अहम रणनीतिक बैठक में पीके की नामौजूदगी ने कई सवाल खड़े किये। इसी बैठक के बाद पीके और कांग्रेस के रास्ते अलग होने की चर्चाएं तेज हो गईं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के तमाम नेता पिछले कुछ अर्से से प्रशांत किशोर के कामकाज के तरीके से नाखुश हैं। वैसे, मामला एक तरफा भी नहीं है।  पीके के करीबियों की तरफ से भी उनके कांग्रेस से अलगाव की खबरें आ रही हैं।

भले ही प्रियंका को आगे लाने में कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई हो, लेकिन चर्चा यह भी चल रही है कि कांग्रेस अपने रणनीतिकार प्रशांत किशोर से छुटकारा पाने की कोशिश कर रही है। गत दिनों दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ यूपी कांग्रेस के नेताओं की एक अहम बैठक में पीके के मसले पर खुलकर चर्चा हुई तो इस अहम रणनीतिक बैठक में पीके की नामौजूदगी ने कई सवाल खड़े किये। इसी बैठक के बाद पीके और कांग्रेस के रास्ते अलग होने की चर्चाएं तेज हो गईं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के तमाम नेता पिछले कुछ अर्से से प्रशांत किशोर के कामकाज के तरीके से नाखुश हैं। वैसे, मामला एक तरफा भी नहीं है।  पीके के करीबियों की तरफ से भी उनके कांग्रेस से अलगाव की खबरें आ रही हैं।

गौरतलब हो हाल ही में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से सपा-कांग्रेस गठबंधन की बात करके  पीके कई कांग्रेसियों के निशाने पर आ गये थे। पीके की तालमेल की कोशिशों से कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई थी। बैठक में पीके को लेकर कुछ ऐसी बातें भी सामने आईं जिन्हें लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी काफी बढ गई। पीके की कार्यशैली और उससे पार्टी की हो रही असहजता पर चर्चा के दौरान बैठक में ज्यादातर लोगों की राय थी कि पीके की सेवाएं खत्म की जाएं।  इस बैठक में प्रियंका गांधी, यूपी के प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद, यूपी कांग्रेस चीफ राज बब्बर, कैंपेन कमिटी के अध्यक्ष संजय सिंह, क्रांग्रेस  की ओर से सीएम पद की दावेदार शीला दीक्षित व प्रमोद तिवारी शामिल थे। पीके से कांग्रेसी नेताओं की नाराजगी को लेकर जो लब्बोलुआव निकला उस आधार पर यह मान लिया गया कि पीके ने आलाकमान को भरोसे में लिए बिना ही जेडीयू के सांसद केसी त्यागी, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से मिलकर गठबंधन की बात की थी। पीके के इस कदम को पार्टी लाइन से अलग बताया गया।

बात यहीं तक सीमित नहीं थी। पीके एक बार सीएम अखिलेश से मिलने भी गए थे,जिन्हें अखिलेश ने बैरंग वापस लौटा दिया था। इसके बाद पीके ने मुलायम-अमर से दबाव बनवाकर मुलाकात की। अखिलेश के यह कहने के बाद कि खाट वाले लड़ाई में नहीं, यूपी कांग्रेस के नेता और नाराज हो गए। गौरतलब हो हाल ही में रीता बहुगुणा जोशी ने जब कांग्रेस छोड़ी तो पीके पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि कई अन्य कांग्रेसी भी पीके की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। पीके उनसे राय नहीं लेते, यह शिकायत लगभग सभी को है।

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

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