एक गधे का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र

आप लोगों ने अपनी सियासी लड़ाई में मुझे क्यों घसीटा ? मुझे क्यों अपमानित किया ? मेरा नाम क्यों बदनाम किया ? क्या मेरी फितरत में फिरकापरस्ती है ? क्यों में झासेबाज हूँ ? क्या मैं जुमलेबाज हूँ ? क्या मैं नोटबंदी की मौतों और तबाही का जिम्मेदार हूँ ? क्या मैं कुर्सी के लिये ध्रुवीकरण का माहौल पैदा कर समाज को बाँटने की कोशिश करता हूँ ? क्या मैं तरक्की के रास्ते बंद करके हर तरफ तबाही.. बदहाली.. बेरोजगारी. .जेहालत..भ्रष्टाचार.. नफरत.. धर्मवाद..जातिवाद और साम्प्रदायिकता के श्मशान बनवा देना चाहता हूँ।                                             

मुख्यमंत्री जी आपने क्या समझकर किसी से मेरी तुलना कर दी। किस हक से किसी को मेरा नाम दे दिया ? आप होगे मुख्यमंत्री, लेकिन हम आपसे दबने वाले नहीं। आप एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन मेरा वर्चस्व तो सारी दुनिया में चलता है।बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी कभी ना कभी बेवकूफी करता ही है। दुनिया में कोई एक भी व्यक्ति ऐसा नही होगा जिसने कभी ना कभी मूर्खता ना की हो। मूर्खता करने वाले हर शख्स को गधा यानी मेरे नाम से जोड़ा जाता है। ये मुझे बर्दाश्त है। लेकिन झूठा-फरेबी-मक्कार और साम्प्रदायिक होना हमे कतई बर्दाश्त नहीं। धोबी मेरी पीठ पर कपड़े लाद कर घाट पर जाता है तो हम कभी नही पूछते कि मेरी पीठ पर लदे गट्ठर में किस धर्म और जाति के लोगो के कितने कपड़े हैं ?  जो कपड़े हैं उसमें हिन्दुओ के कितने कपड़े है और कितने मुसलमानों के।

मुख्यमंत्री जी आपने मेरा नाम खराब कर दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री जी ने ये कह कर मेरा और भी अपमान कर दिया कि वो मुझसे यानी गधे से प्रेरणा लेते हैं। प्रधानमंत्री जी, हम बोझा उठाने वाले हैं लेकिन देश आपके गलत फैसलों का बोझ उठाने पर मजबूर है। नोटबंदी के बोझ से बहुत कमजोर हो गया है देश। एटीएम से चूरन वाले नोट निकल रहे है। आपकी दोनो सरकारें हैं लेकिन कश्मीर में तबाही मची है। सीमा पर आये दिन हमारे सैनिक शहीद हो रहे हैं। आतंकवादियों का आतंक बढ़ गया है। हमारे दुश्मन देशों के हौसले बढ़ गये हैं।                                         

मेरी प्रेरणा लेने वाले मेहनती.. वफादार और भरोसे के होते है। आपमें इसमे से कौन सी खूबी है ? आपने चायवाले के काल्पिक किरदार के झूठ को बेच कर देश का सबसे बड़ा पद हासिल कर लिया। और इसके बाद शाही/हाई प्रोफाइल जीवन का मजा ले रहे हो। लाखों के सूट-बूट में आपका एक पैर न्यूयॉर्क में तो एक पैर पैरिस में रहता है। देश की गरीब जनता और बदहाल किसानों के बीच आपको कभी नही देखा गया।

आप भरोसेमंद कैसे हो सकते हैं ? आपने विकास का जो वादा किया था वो झासा साबित हो गया। यूपी चुनाव जीतने की कोशिश में आप हिन्दू-मुसलमानों का बटवारा कर ध्रुवीकरण का हथियार अपना रहे हैं। विकास के बदले आप श्मशान की जरुरत ज्यादा महसूस कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी आप दोनो ही पशुओं के रक्षक है, उनका सम्मान करते है। प्रधानमंत्री जी आप तो बार-बार गाय को माता कहने के जुमले पेश करते हो। मुख्यमंत्री जी आप कृष्ण भगवान के भक्त हो। गाय से आपका भी बड़ा मार्मिक रिश्ता है। अन्न जानवरो के भी हमदर्द होगे आप लोग। इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री जी ने एक चुनावी सभा में  मेरे अपमान की फाइल चलायी। जिसके बाद एक चुनावी सभा मे ही प्रधानमंत्री ने उस फाइल पर अपनी सहमति की मोहर लगा दी।

प्रधानमंत्री जी मुससे अपनी तुलना मत करिये। मत कहिये कि आप मुझसे यानी गधे से प्रेरणा लेते हैं। इस तरह मेरा अपमान करना ठीक नही। एक बार ऐसा ही हुआ था जिसका अंजाम बुरा हुआ। इससे पहले मुझे एक बार और साम्प्रदायिकता से जोड़ा गया था। मुझे याद है लगभग तीन दशक पहले मेरे पुरखे गधो को साम्प्रदायिक दंगों में इस्तेमाल किया गया था। जिसका अंजाम बहुत बुरा हुआ था। लखनऊ की तहजीब के मलमल पर साम्प्रदायिक दंगो के दाग लगाने वाले फिरकावराना शिया-सुन्नी दंगों में दो फिरके के चंद फसादी लोगों ने एक दूसरे की भावनाएँ  और दंगे भड़काने के लिये मेरे पुरखे गधो पर आपत्तिजनक बाते लिखकर संवेदनशील इलाको में हका दिया था। जिसका अंजाम ये हुआ कि साम्प्रदायिक दंगो में तकरीबन दर्जन भर निर्दोष लोगों को अपनी जान गवाना पड़ी थी। सैकड़ों लोग घायल हुए थे और लाखों लोगो का भारी नुकसान हुआ था। इसलिये प्रधानमंत्री जी आप खुद को मुझसे ना जोड़े। मुख्यमंत्री जी किसी के साथ मेरा नाम जोड़ कर मेरा नाम बदनाम नहीं करें। आप लोग अपनी सियासत में मेरा नाम इस्तेमाल ना करें। आप लोग अपने शब्द वापस लेँ,  अन्यथा मैं आप दोनों पर मानहानि का मुकदमा ठोक दूँगा।                                          

आपका
गधादास उर्फ जुमलेबाज,                                                                                        
पता-गुजरात
फोन नम्बर- ढेचूँ..ढेचूँ…ढेचूँ..ढेचूँ. .ढेचूँ. .ढेचूँ. .ढेचूँ. .ढेचूँ..ढेचूँ…

लेखक नवेद शिकोह से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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