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क्यों बढ़ रही हैं रेप की घटनायें?

अपनी संस्कृति और मर्यादाओं के लिये विश्वपटल पर अलग छवि रखने वाले भारत देश में बलात्कार यानी रेप ऐसा जुर्म बनता जा रहा है जिसे न निगल पा रहे हैं और न उगल पा रहे हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि इस जमानती जुर्म के न सिर्फ आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, बल्कि रेप के तरीके भी अमानवीय होते जा रहे हैं। तो क्या जमानती जुर्म होने और कोई सख्त कानून न होने से बढ़ रही हैं रेप की घटनायें? जाहिर सी बात है कि इनसे बड़े स्तर पर देश की छवि धूमिल हो रही है।

अपनी संस्कृति और मर्यादाओं के लिये विश्वपटल पर अलग छवि रखने वाले भारत देश में बलात्कार यानी रेप ऐसा जुर्म बनता जा रहा है जिसे न निगल पा रहे हैं और न उगल पा रहे हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि इस जमानती जुर्म के न सिर्फ आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, बल्कि रेप के तरीके भी अमानवीय होते जा रहे हैं। तो क्या जमानती जुर्म होने और कोई सख्त कानून न होने से बढ़ रही हैं रेप की घटनायें? जाहिर सी बात है कि इनसे बड़े स्तर पर देश की छवि धूमिल हो रही है। बहरहाल बदलते परिवेश में लोगों के अंदर जिस्मानी भूख भी बढ़ रही है। उस भूख को शांत करने वो किसी भी हद तक जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में रेप की ऐसी-ऐसी घटनायें सामने आई हैं जिनके बारे में पूर्व में सोचना भी सम्भव नहीं था। निर्भया उर्फ़ दामिनी के केस ने एक ओर देश को झकझोर कर रख दिया वहीं दूसरी ओर रेप के बाद पीड़िता का कत्ल करने जैसी घटनायें भी बढ़ने लगीं। जाहिर सी बात है ऐसा खुद को सजा से बचाने किया जाता है। न कम्प्लेन करने वाली रहेगी न केस बनेगा। कुछ केसेज ऐसे भी हैं जिनमें आरोपी ने रेप किया, जमानत पर छूटा और फिर रेप कर दिया। अब उसने ऐसा क्यों किया इसके पीछे कई वजह बता दी जाती है।

मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में एक नाबालिग लड़के ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक आदिवासी महिला का रेप किया। जेल जाने के बाद कुछ महीनों में उसे जमानत मिल गई। जमानत के 24 घण्टों के अंदर उसने उसी जगह फिर एक युवती का रेप किया। और दोनों ही केस में उसने एक जैसा स्टेटमेंट दिया। क्योंकि जमानत मिलने या केस कमजोर करने में स्टेटमेंट की भूमिका भी अहम होती है। एक ओर केस में छत्तीसगढ़ के रायपुर के पास एक युवक ने रेप की कोशिश की लेकिन युवती के प्रतिरोध पर काबू न पाने की वजह से वह रेप नहीं कर पाया और उसने झुंझलाहट में अपनी बाइक उसके ऊपर से कई बार निकालकर उसे मारना चाहा।

ऐसी घटनाओँ के पीछे की जब वजह जाननी चाही तो मेडिकल साइंस के मुताबिक मानसिक अस्थिरता हो सकती है। कोई कहता है नशे की वजह से ऐसा होता है तो क़ानूनी भाषा में आदतन अपराधी बोल दिया जाता है। लेकिन इससे जिम्मेदार पल्ला तो नहीं झाड़ सकते। इन सब में पीड़िता की तकलीफ का कोई जिक्र नहीं होता। और आजकल तो फिल्म का प्रमोशन भी रेप से जोड़कर किया जाने लगा है। अब इन हालातों में रेप को क्या समझा जाये जुर्म या कुछ और? और इस कुछ और में हर वो तरीका है जिसमें आप इसके मायने निकाल सकते हैं।

आशीष चौकसे, पत्रकार
[email protected]

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