एक ऐसी दुल्हन जिसकी कीमत एक रात की पच्चीस हजार रुपये!

मुझे हाल में ही किसी कारण से सीतापुर जाना हुआ। यहां मुझे पता चला कि पनरभू गांव में कच्ची शराब गोमती नदी पर बनती है और पुलिस कुछ नहीं बोलती है। सब कुछ उसकी देख रेख में होता है। इस हालात को देखने के लिए मैं पहुँच गया पनरभू गाँव। यहां दारू के बाद सेक्स की बात हो रही थी। गाँव का ही एक युवा कह रहा था, जिसकी शादी नहीं हुई है, कि वो बीस हजार में एक दिन के लिए दुल्हन ला सकता है और सुहाग रात आराम से मना सकता है। ऐसे हालत है वहां के। ये कहानी नहीं हकीकत है।

गांव के प्रधान से लेकर जिले के मंत्री तक को है इसकी जानकारी। लेकिन एक ही जाति के होने के कारण मंत्री जी ने चुप्पी साध रखी है। वहीं अन्य जाति के लोगों को डर है कि कुछ बोलने पर वह कानूनी पचड़े में ना फंस जाएं। अगर आप अपनी ही जाति की किसी महिला से सेक्स करना चाहते हैं तो इस गांव की ये महिला उसी जाति की बन जाती है जिस जाति का उसका क्लाइंट है। उसके बाद पूरा मसौदा तैयार किया जाता है। महिला की बोली लगती है। उसको खरीद कर क्लाइंट अपने घर ले जाता है। महिला सेक्स करवाती है। लैट्रीन जाने का बहाना बना कर वहां से भाग निकलती है।  उसके बाद वह महिला पहुँचती है अपने साथी सुभाष के पास जो उसे दूसरे क्लाइंट के पास ले जाता है। सेक्स के लिए फीस किसी से पच्चीस हजार तो किसी से तीस हजार तक वसूला जाता है।

इस गांव का मुखिया भी दलित है और जिले के मंत्री के साथ उसकी काफी गहरी दोस्ती होने की वजह से सारे मामले को दबा दिया जाता है। इस दलित महिला का साथी सुभाष महिला के शरीर का सौदा करता है। सौदा पण्डितों से लेकर अहिर तक, धानुक से लेकर तेली तक, सबसे करते है, अपनी जरूरत के अनुसार। बोली फ़ोन पर ही लगाई जाती है। पहले शहरों में, महानगरों में देह व्यापार का धंधा होता था। सेक्स का धंधा एक तय एरिया में ही होता था जिसे आज के समय में रेड लाइट एरिया कहा जाता है। इतिहास में इस जगह को वैश्या घर, चकला, रण्डीखाना इत्यादि नामों से जाना जाता रहा। सेक्स का धंधा एक निर्धारित जगह में होता था जिससे समाज के सभ्य लोगों पर इसका असर ना पहुंचे और उन निर्धारित जगहों पर पुलिस कड़ी निगरानी रहती थी।

पहले लड़कियां बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, अशिक्षित  इत्यादि समस्याओं से मजबूर हो कर इस दलदल में उतरती थी  जो हमें  उन लोगों पूछने पर पता चला,  तब  उन्होंने अपनी अपनी मजबूरी गिना दी लेकिन  अब ये देह व्यपार का धंधा पढ़ा लिखे  समाज  के  कुछ युवा लोग करने लगे है। इस टेक्नोलाजी के दौर में स्मार्ट फ़ोन है जो दुनिया को जोड़ता है उसका  फायदा इस धंधे में  लिया जा रहा है जिससे नई  प्रजाति के क्लाइंटों को जोड़ा जा रहा है।  ठीक है अगर कोई चीज से फायदा मिल रहा है  भले ही वो गैर कानूनन हो कोई बात नहीं उसका फायदा लेना चाहिए। ऐसा ये महिला कहती है पूरी तरह से शराब के नशे में धुत थी।  हम बात आज शहरों की नहीं करेंगे क्यों कि  बात अब गांव तक जा पहुंची है।  जहां पर लोग अपनी इज्जत की खातिर क़त्ल कर देते है उन जगहों पर भी  पहुँच चुका है ये समाज विषैला धंधा।

पूरी कहानी बताते हैं आपको। इस गांव में किसी की इतनी हिम्म्त तक नहीं है कि इसका विरोध कर सके। सबसे ज्यादा आबादी एसी-एसटी की है लेकिन बोलबाला पण्डितों का है। ये वही पण्डित हैं जो कि गांव में क्या होना है क्या नहीं, सब कुछ तय करते हैं। हर समय दलितों को यहां दबाया गया है। ऐसे समय में इस जिले के एक नामी धार्मिक स्थल नीमसार से लेकर गांव बेलहरी तक पूरी तरह से फ़ैल चुका है यह देह का धंधा। नीमसार के चक्रतीर्थ से व्यास गद्दी से पूरब की तरफ ९ किलोमीटर चलने के बाद गांव बेलहरी आता है जहां पर इस देह के धंधे के अपराध को अंजाम दिया जा रहा है।

मुख्य आरोपी सुभाष दलित पेशे से अपराधी है जिस पर हत्या का मुकदमा दर्ज है। अपने ही गांव के मुण्डली नाम के शख्स की हत्या कर दी थी। आरोप साबित ना होने के चलते वो छः माह जेल बिताकर बाहर छूट कर आ गया है और दूसरी शादी करके इस महिला को अपने गांव ले आया। दो बच्चे हैं पहली पत्नी से। पहली पत्नी का देहांत हो गया है। इसके दोनों बच्चे अब बड़े हो चुके हैं।  मुण्डली की हत्या से पहले झोपड़ी पड़ी थी जो अब पक्का मकान बन चुका है। चार पहिया गाडी है सुभाष चमार के पास। सफ़ेद रंग की सेंट्रो कार से महिला अपनी देह बेचने जाती है।

उत्तर प्रदेश का एक धार्मिक स्थल मान जाता है सीतापुर। जिले का नीमसार कस्बा। पर आज यहाँ आज देह व्यापार अपनी चरम सीमा पर है। लगातार बढ़ता जा रहा है। नीमसार से लेकर बेलहरी तक देह व्यापार के तार जुड़े हुए हैं। इसका सरगना सुभाष चमार है। पुलिस जान बूझकर अनजान बन रही है। उसका कहना है कि यह उस महिला की अपनी निजी संपत्ति है, उसका जो चाहे वो करे, बेचे या फ्री में अपनी अस्मिता को खड़े बाजार या फोन पर कीमत तय करके उसे नीलाम कर दे, हम कुछ नहीं कर सकते। इसके सभी क्लाइंट पेशे से किसान हैं जो कर्ज के बोझ के दबे हुए हैं। जिससे एक बार पैसा ले लेती है, उसके यहां दोबारा नहीं जाती है। खास कर उसकी पसंद समाज के युवा लडके है जिनके हाथों नीलाम होना चाहती है। शराब से लेकर इस शबाब का जलवा पूरे इलाके में फैलता जा रहा है।

ये सब कोई जानता है  कि पुलिस को चंदा मिलता है शायद  इसलिए पुलिस चुपचाप ये सब होने दी रही है । बेलहरी गाँव में ही पुलिस रिपोर्टिंग पुलिस चौकी हैं। मामला जब चौकी पर आता है तो दरोगा ये कह कर भगा देता है कि जब रात को मजा लिया तो क्या दरोगा साहब को पूंछा था की साहब आज रात को हम मजा लेंगे  नहीं ना, तो जाओ यहां से भोंxxx, के भाग साले चले आये दरोगा साहब मदद करेंगे।

लेखक सुधीर बाबू ने यात्रा के दौरान ये सब घटनाक्रम खुद देखा है. Sudhir Babu से संपर्क [email protected] या 9069035251 के जरिए किया जा सकता है.

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