PIL against 104 crore cash deposit by BSP

A Public Interest Litigation has been filed in Lucknow bench of Allahabad High Court today as regards the Rs. 104 crores cash money deposited  in old currency by Bahujan Samaj Party between 02 December 20 to 09 December 2016 in the Party’s Union Bank of India bank account in Karol Bagh branch, New Delhi after the demonetization order. Petitioner Pratap Chandra’s counsel Dr Nutan Thakur said that the Election Commission had issued Guidelines for financial transparency on 29 August 2014 which had been further clarified through its order dated 19 November 2014.

These Guidelines say that any political party must deposit its cash collections in its bank account within 10 working days of the fund collection. These directions say that if any political party violates these Guidelines, action including cancelling the recognition of the political party can be taken under the provisions of Para 16A of the Election Symbols (reservation and Allotment) Orders 1968.

Dr Thakur said that since the demonetization order came on 08 November 2016, hence as per these directions, the cash deposit in old currencies should necessarily have been undertaken by 20 November but BSP deposited Rs. 104 crores between 02 December to 20 December, which is a clear violation of these Guidelines. Hence the petition prays for directing the Election Commission to take cognizance of these facts and issue notice to BSP and take appropriate action under Para 16A of the Election Symbol Order.

बसपा द्वारा 104 करोड़ जमा करने पर याचिका

बहुजन समाज पार्टी द्वारा नोटबंदी के बाद दिल्ली के करोल बाग़ स्थित यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के अपने पार्टी अकाउंट में 02 दिसंबर से 09 दिसंबर 2016 के बीच 104 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराये जाने के सम्बन्ध में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दायर की गयी. याचिकाकर्ता प्रताप चन्द्र की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने 29 अगस्त 2014 द्वारा वित्तीय पारदर्शिता सम्बन्धी कई निर्देश पारित किये जिन्हें आयोग ने अपने आदेश दिनांक 19 नवम्बर 2014 द्वारा और अधिक स्पष्ट किया. इन निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी राजनैतिक दल उन्हें चंदे में प्राप्त नकद धनराशि को प्राप्ति के 10 कार्यकारी दिवस के अन्दर पार्टी के बैंक अकाउंट में अवश्य ही जमा करा देगा. इन निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी पार्टी ने इन निर्देशों का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ निर्वाचन चिन्ह (आरक्षण एवं बटाई) आर्डर 1968 के प्रस्तर 16ए में पार्टी की मान्यता रद्द करने सहित तमाम कार्यवाही की जा सकती है.

डॉ ठाकुर ने कहा कि चूँकि नोटबंदी का आदेश 08 नवम्बर को आया था, अतः इन निर्देशों के अनुसार अधिकतम 20 नवम्बर तक नकद धनराशि बैंक खाते में जमा कर देना चाहिए था पर बसपा ने 2 दिसंबर के बाद 104 करोड़ रुपये जमा कराये, जो सीधे-सीधे इन निर्देशों का उल्लंघन है. अतः याचिका में निर्वाचन आयोग को इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए बसपा को नोटिस जारी करते हुए आरोप सही पाए जाने पर निर्वाचन चिन्ह आर्डर के प्रस्तर 16ए के अनुसार कार्यवाही किये जाने की प्रार्थना की गयी है.

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