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चाहे जितना कह जाएं, अनकहा बहुत रह जाएगा

मुंबई विश्वविद्यालय, हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष आचार्य रामजी तिवारी ने प्रभाष जोशी को रुंधे गले से याद करते हुए जब कहा- चाहे जितना कह जाएं, अनकहा बहुत रह जाएगा, तब सबकी आंखें नम थीं. प्रभाष जी के साथ के कई प्रेरक प्रसंगों को सुनाते हुए वे बेहद भावुक थे. उन्होंने उनके समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. आचार्य तिवारी गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब द्वारा ‘आजादी के बाद की पत्रकारिता और प्रभाष जोशी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रभाष जी ने अपनी भाषा के जरिये पाठक से आत्मीय रिश्ता बनाया. इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी संघ के महासचिव अरुणेश नीरन ने कहा कि प्रभाष जी ने पत्रकारिता के संगीत में एक नया राग शुरू किया.

मुंबई विश्वविद्यालय, हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष आचार्य रामजी तिवारी ने प्रभाष जोशी को रुंधे गले से याद करते हुए जब कहा- चाहे जितना कह जाएं, अनकहा बहुत रह जाएगा, तब सबकी आंखें नम थीं. प्रभाष जी के साथ के कई प्रेरक प्रसंगों को सुनाते हुए वे बेहद भावुक थे. उन्होंने उनके समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. आचार्य तिवारी गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब द्वारा ‘आजादी के बाद की पत्रकारिता और प्रभाष जोशी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रभाष जी ने अपनी भाषा के जरिये पाठक से आत्मीय रिश्ता बनाया. इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी संघ के महासचिव अरुणेश नीरन ने कहा कि प्रभाष जी ने पत्रकारिता के संगीत में एक नया राग शुरू किया.

उन्होंने पत्रकारिता में नयी हिन्दी की स्थापना की जो मनुष्य से जुड़ी थी. आकाशवाणी के निदेशक सुप्रसिद्ध आलोचक अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि वे व्यवस्था की आंखों में आंखें डालकर कड़ी से कड़ी बात कहने की हिम्मत रखते थे. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष आनन्द राय ने कहा कि प्रभाष जोशी ने हिन्दी पत्रकारिता को गौरवमयी मुकाम दिया है और इसकी रक्षा करना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि है.

श्री राय ने प्रभाष जोशी की गोरखपुर की पहली यात्रा का संस्मरण सुनाया और कहा कि गोरखपुर के पत्रकार हर साल उनकी याद में समारोह आयोजित करेंगे.  स्वतंत्र चेतना समूह के प्रधान सम्पादक रामचंद्र गुप्त ने उनसे जुड़े संस्मरण सुनाये. प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष एस. पी. त्रिपाठी ने पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के व्यक्तित्त्व पर प्रकाश डाला. पूर्व अध्यक्ष पीयूष बांका ने कहा कि वे ग्रामीण पत्रकारों को भी सशक्त करना चाहते थे. राष्ट्रीय सहारा के संपादक मनोज तिवारी ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए पटना और दिल्ली के कई संस्मरण सुनाये. संचालन कर रहे प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सर्वेश दुबे ने आजादी के बाद की पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के योगदान पर प्रकाश डाला. प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल ने प्रभाष जी के गोरखपुर से जुड़ाव की चर्चा की. जनसत्ता के ब्यूरो चीफ एस. के. सिंह ने प्रभाष जोशी से मिली दीक्षा को याद करते हुए अपने भावांजलि दी.  

मंत्री धीरज श्रीवास्तव ने आभार ज्ञापित किया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव, राष्ट्रीय  सहारा के प्रमुख संवाददाता धर्मेन्द्र सिंह, दैनिक जागरण के  छायाकार अभिनव चतुर्वेदी, मोहन राव, श्रीकृष्ण त्रिपाठी, नवीन लाल, समेत कई प्रमुख पत्रकारों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. अतिथियों ने प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल और मंत्री धीरज श्रीवास्तव को इस बड़े आयोजन के लिए आभार जताया. 

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