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पीटीआई कर्मचारियों के नाम खुला पत्र

प्रिय साथियों

अभी कुछ दिनों से फेसबुक और पी गुरु जैसे सोशल साइट पर हम लोगों के महान नेताओं महाबीर सिंह यादव और जान गान्साल्वेज के क्रिया कलापों के बारे में प्रमाण सहित काफी जानकारी उपलब्ध कराइ गयी। जैसे फेडरेशन की सम्पत्ति बिना सभी सदस्यों की जानकारी के अपने बेटे के नाम पर करा लिया और दूसरे नेता पीटीआई मुम्बई में रहते हुए अपनी ब्यक्तिगत कम्पनी चला रहे ह ।जो लगभग शतप्रतिशत सही प्रतीत होती है। यह लोग लगभग 3 से 4 साल पहले रिटायर होने के बावजूद फेडरेशन के महत्वपूर्ण पदों पर लोंगों को अन्धेरे में रखकर बने हुए हैं । इसीलिए यह लोग पिछले 3-4 सालों से लगभग सभी पुराने तथाकथित दलाल एवं प्रमोद गोस्वामी; सुरेश अखैारी जैसे भाडों को कशीदें करने के लिये फेडरेशन की मीटींगों मे बुलाया जाता है जिससे मीटींग में पहुॅचकर इन महान नेताओं के बारे में भाषणबाजी करें और बाकी सभी सदस्यों को गुमराह करके अपना उललू सीधा करते रहे।

प्रिय साथियों

अभी कुछ दिनों से फेसबुक और पी गुरु जैसे सोशल साइट पर हम लोगों के महान नेताओं महाबीर सिंह यादव और जान गान्साल्वेज के क्रिया कलापों के बारे में प्रमाण सहित काफी जानकारी उपलब्ध कराइ गयी। जैसे फेडरेशन की सम्पत्ति बिना सभी सदस्यों की जानकारी के अपने बेटे के नाम पर करा लिया और दूसरे नेता पीटीआई मुम्बई में रहते हुए अपनी ब्यक्तिगत कम्पनी चला रहे ह ।जो लगभग शतप्रतिशत सही प्रतीत होती है। यह लोग लगभग 3 से 4 साल पहले रिटायर होने के बावजूद फेडरेशन के महत्वपूर्ण पदों पर लोंगों को अन्धेरे में रखकर बने हुए हैं । इसीलिए यह लोग पिछले 3-4 सालों से लगभग सभी पुराने तथाकथित दलाल एवं प्रमोद गोस्वामी; सुरेश अखैारी जैसे भाडों को कशीदें करने के लिये फेडरेशन की मीटींगों मे बुलाया जाता है जिससे मीटींग में पहुॅचकर इन महान नेताओं के बारे में भाषणबाजी करें और बाकी सभी सदस्यों को गुमराह करके अपना उललू सीधा करते रहे।

यह जानकर और दुख हुआ कि यह सारा खेल नेताओं द्वारा महराज कृष्ण राजदान के साथ मिलकर वर्षो से खेला गया और आगे भी खेल चलता रहे पूरी केाशिश की जा रही हैे । इन नेताओं ने पूर्व सी ई ओ के साथ मिलकर जो सेवा विस्तार का खेल कुछ चुनिन्दा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खेला इससे पीटीआई की वर्षो पुरानी परंम्परा को तहस नहस कर दिया और और पीटीआई की काम करने की स्वतंत्रता को भी खतरे मे डाल दिया।

जैसा कि सुना जा रहा है कि पीटीआई के महत्वपूर्ण पदों पर संस्था से बाहर के लोग आयेंगे इसका सम्पूर्ण जवाबदेही इन लोंगों की है अगर लोग समय पर रिटायर होते गये होते तो आज यह नौबत ही नहीं आती और ना ही पीटीआई का निदेशक मंडल कोई हस्तक्षेप करता । लेकिन इन लोगों ने महराज कृष्ण राजदान के साथ मिलकर एक दूसरे के पूरक बने रहे और निदेशक मंडल को मौका दिया।

आप सभी साथियों को अच्छी तरह से मालूम है कि इन तथाकथित बुद्धिजीवीयों ने अपने तौर तरीके से पीटीआई को चलाते रहे और जो मीटीगों मे पैसा इकटठा करके देते रहे या इनके इसारे पर नाचते रहे वह खूब फायदे में रहे चाहे वो पीटीआई के लिये काम करे या ना करे और जिन जिन लोगों ने यह नहीं किया या नहीं कर पाया वह इन लोगों के द्वारा खूब परेशान करके बरबाद कर दिया गया चाहे वो पीटीआई के लिये कितने भी अच्छे रहे हों इन लोगों को कोइ फर्क नहीं पड़ा। ताज्जुब की बात यह है कि इतना सब कुछ घपला करने के बावजूद अभी भी आफिस में आ रहे हैं शायद इन लोंगों का सेवा विस्तार महराज कृष्ण राजदान ने जाते जाते जीवन भर के लिये कर दिया है।

मजेदार बात यह है कि अभी हाल ही में पता चला है कि लखनऊ यूनियन के सदस्यों से हमारे महान नेता यम यस यादव ने कहा कि तुम लोगों को पटना मीटिंग में आने की कोई जरूरत नहीं है, प्रमोद आयेगा और प्रमोद लखनऊ में जल्द ही मीटिंग करायेगा, उसमें तुम लोग आ जाना। इससे यह साफ हो जाता है कि ऐसे महान नेताओं को पीटीआई के कर्मचारियों की कोई जरुरत नहीं है। यह महान नेता लोगों को प्रमोद गोस्वामी जैसे भाडो की ही जरुरत है जो हर तरह से इन नेताओं का फायदा करा सके। जैसे नोएडा प्लाट आवंटन तथा लखनऊ में ज्यादे से ज्यादे मीटींग कराकर पैसे इकटठा करके देना आदि।

अभी हाल ही में पता चला है कि माननीय यादव पीटीआई बोर्ड के उपर दबाव बनाने के लिये कन्फेडरेशन की मीटिंग लखनऊ में पत्रकारों में मशहूर दलाल प्रमोद गोस्वामी के सहयोग से कराकर यह दबाव बनाना चाह रहे है जिससे इनके उपर एफ आई आर अभी न हो और यह फेडरेशन की सम्पत्ति लेकर फरार हो जायें। लेकिन नये नियुक्त सी ई ओ को तत्काल बोर्ड से कहकर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिये जिससे यूनियन की सम्पत्ति वापस मिले और इन सभी तथाकथित दलालो को सजा मिले।

दोस्तों आप सभी पीटीआई के कर्मचारियों की यह खासियत है इन महान नेताओं के कार्यकाल में हमेशा मौन सहमति देते आये हैं और आज भी उसी तरह से कायम हैं। और यह लोग इसी का फायदा आजतक उठा रहे है और उठाते आये हैं।

और अगर यही हाल रहा तो यह लोग यूनियन को पूरी तरह से खत्म करके और फेडरेशन की सारी पूंजी लेकर चले जायेंगे और आप सभी लोग देखते रह जायेंगे। इसलिये इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर यूनियन से बाहर करें और कानूनी कार्यवाही करके यूनियन के समस्त सदस्यों को यह संदेश दिया जाय कि यूनियन के महत्वपूर्ण पद कर्मचारियों के हितों के लिये होता है अपनी जेब भरने या केवल चन्द लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं होता जैसा इन महान नेताओं ने किया।

पूरे देश में मतपत्र के जरिये चुनाव कराये जाये जो पिछले 15 वर्षों से नहीं हो रहा है इसीलिये यह लोग आजतक अपने पदों पर लगातार बने रहे और अपनी मनमानी करते रहे। अगर आप लोग ऐसा नहीं करेंगे तो यह महान नेतागण बेशर्मो की तरह पड़े रहेंगे।

इसलिये मित्रों जागो और सही का साथ दो और गलत का विरोध करो । नहीं तो वक्त माफ नहीं करेगा।

धन्यवाद

guru das
[email protected]

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