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“पीपली” के मास्साब की काठ की हांडी!

पीपली लाइव के मास्साब याद हैं ना आपको…? अरे वही, जिन्होंने मंहगाई डायन वाला गाना लिखा था और भड़ास में भी जिनके बारे में ‘खूबई’ छपा था. देखो… आपको याददाश्त पर जोर डालना पड़ रहा है न…? मीडिया की दिलाई गई लोकप्रियता ऐसी ही प्याली में तूफ़ान की तरह होती है, इसके चढ़ने और उतरने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. खैर, आज चर्चा सिर्फ मास्साब की… तो साहब..गया प्रसाद प्रजापति जी पिछले दिनों खासे चर्चा में रहे… पीपली लाइव का उनका गाना फिल्म की रिलीज से पहले ही बहुत धूम मचा चुका था… आये दिन चैनलों पर [सशुल्क…. हाँ..! मास्साब स्टूडियो आने के तगड़े पैसे लेते थे] लाइव- शाईव होता रहा…मास्साब ने पहले सोने का अंडा देने वाली मुर्गी [आमिर खान प्रोडकसन ] को मार कर सारे अंडे साथ निकालने की जुगत निकाली. सो, आमिर पर खूब हमला किया कि “हमारा शोषण हुआ है..हम तो कोर्ट में आमिर को घसीटेंगे..वगैरह वगैरह…” आमिर ने छह लाख देकर इनका मुंह बंद करा दिया, फिर भी फिल्म की रिलीज के वक्त तक इनका क्रेज बना रहा.

पीपली लाइव के मास्साब याद हैं ना आपको…? अरे वही, जिन्होंने मंहगाई डायन वाला गाना लिखा था और भड़ास में भी जिनके बारे में ‘खूबई’ छपा था. देखो… आपको याददाश्त पर जोर डालना पड़ रहा है न…? मीडिया की दिलाई गई लोकप्रियता ऐसी ही प्याली में तूफ़ान की तरह होती है, इसके चढ़ने और उतरने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. खैर, आज चर्चा सिर्फ मास्साब की… तो साहब..गया प्रसाद प्रजापति जी पिछले दिनों खासे चर्चा में रहे… पीपली लाइव का उनका गाना फिल्म की रिलीज से पहले ही बहुत धूम मचा चुका था… आये दिन चैनलों पर [सशुल्क…. हाँ..! मास्साब स्टूडियो आने के तगड़े पैसे लेते थे] लाइव- शाईव होता रहा…मास्साब ने पहले सोने का अंडा देने वाली मुर्गी [आमिर खान प्रोडकसन ] को मार कर सारे अंडे साथ निकालने की जुगत निकाली. सो, आमिर पर खूब हमला किया कि “हमारा शोषण हुआ है..हम तो कोर्ट में आमिर को घसीटेंगे..वगैरह वगैरह…” आमिर ने छह लाख देकर इनका मुंह बंद करा दिया, फिर भी फिल्म की रिलीज के वक्त तक इनका क्रेज बना रहा.

इनको चैनलों के स्टूडियो में बैठाया जाता रहा, जहां ये आमिर के गुणगान भी जी भर के करते रहे. यहां तक कि इनकी मण्डली को जिन्दगी में पहली बार हवाई यात्रा का लुत्फ़ भी एक चैनल ने करवाया. मास्साब को फिल्म रिलीज़ के दिन आनन्-फानन में हवाई जहाज का टिकिट देकर दिल्ली बुलाया गया. कुल मिलाकर धूम मची रही स्टारडम की…मास्साब का लहज़ा ऐसा बदला था कि यदि उन दिनों उन्हें कोई चैनल वाला सड़क पर रोक कर बाइट भी लेना चाहे, तो उनका सबसे पहला सवाल रहता था कि..”भैया एमे हमाओ का-कैसो रहे…? मतलब जे कि कित्तो का भुगतान आप कर देहो..?” उन्हें समझाना पड़ता था कि मास्साब बाइट लेने में भुगतान नहीं होता, स्टूडियो बुलाने में होता है, मगर वो मानते नहीं थे और फ़ौरन गिनाने लगते थे, “आपसे पहले फलाने चैनल वाले आये और इत्तो दे गए…”  खैर किसी ने दिए भी और किसी ने यूं ही समझा बुझा कर / उधारी करके बाइट कर ली. बात आई गई हो गई. मास्साब को उम्मीद थी कि चूंकि वे सरकारी नौकरी में हैं और केंद्र सरकार के खिलाफ टोन उनके गाने की जाती है, लिहाज़ा सूबे की भाजपा सरकार उन्हें हाथो-हाथ लेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

मास्साब के मुंह में छपास और दिखास का खून लगा है, जो उन्हें ऐसे गुमनामी के जीवन में दोबारा लौटने नहीं देता. फिल्म जब ऑस्कर के लिए नोमिनेट हुई तब भी चैनल वाले नत्था और फिल्म के दुसरे किरदारों को पकड़ते रहे लेकिन मास्साब की तरह मीडिया का ध्यान श्‍यान नहीं गया. बैचैन मास्साब ने खुद से फोन लगाना शुरू किया..”भैया ऑस्कर पे हमाओ रेएक्सन ले लो…एको हम पैसा न लेबी..” उनकी मनुहार के बाद भी मीडिया ने उन्हें भाव नहीं दिया. मास्साब का इन दिनों बिना बाइट दिए पेट दुःख रहा है..अब वे कोई न कोई जुगत लगाते रहते हैं. इन दिनों एमपी में अच्छी पैदावार न होने से किसान परेशान हैं. यहां तक कि एक किसान ने तो आत्महत्या तक कर ली.

ज़ाहिर है कि मास्साब का गांव बड़वाई भी इससे अछूता नहीं रहा. कल उन्होंने तय किया कि  गांव के लोग मिलकर आमिर खान से मदद की गुहार लगाएं…खबर भी आमिर के नाम पर बिक जायेगी और सरपंच को भी बैठे बैठाए माल मिल जाएगा और मास्साब की फिर जय जय हो जायेगी. उत्साही मास्साब के लोगों ने कई जगह फोन किया लेकिन मेरे ख्याल से अभी तक किसी चैनल ने उन्हें भाव तो नहीं दिया…हो सकता है कोई खबर पिपाशु  इसे “तानने” की कोशिश करे और मास्साब की फिर चल निकले. हालांकि मास्साब समझ नहीं पाए कि देव बनना आसान है लेकिन देवत्व संभाल कर रखना बहुत मुश्किल है.  जय हो मास्साब आपकी…

लेखक प्रवीण कुमार भोपाल में पत्रकार हैं.

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