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राष्ट्रीय सहारा कॉमर्शियल प्रिटिंग से निकाले गए कर्मचारियों को मिला बंधुआ मुक्ति मोर्चा व फाइट फॉर राइट का समर्थन

सहारा से लेंगे एक-एक पैसे का हिसाब : राजपूत

नोएडा। बिना 17 माह का बकाया वेतन मांगने पर कर्मचारियों को निकालना उत्पीड़न ही नहीं बल्कि अपराध भी है। एक ओर सहारा देशभक्ति का ठकोसला कर रहा है वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को उनका वेतन देने को तैयार नहीं। सहारा से एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। यह बात फाइट फॉर राइट के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के वैचारिक सलाहकार चरण सिंह राजपूत ने सेक्टर 11 स्थित राष्ट्रीय सहारा के मेन गेट पर बर्खास्त कर्मचारियों के चल रहे धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मजीठिया, मणिसाना, बछावत वेजबोर्ड के हिसाब से बकाया वेतन के साथ बची नौकरी का हिसाब भी संस्था से लिया जाएगा।

सहारा से लेंगे एक-एक पैसे का हिसाब : राजपूत

नोएडा। बिना 17 माह का बकाया वेतन मांगने पर कर्मचारियों को निकालना उत्पीड़न ही नहीं बल्कि अपराध भी है। एक ओर सहारा देशभक्ति का ठकोसला कर रहा है वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को उनका वेतन देने को तैयार नहीं। सहारा से एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। यह बात फाइट फॉर राइट के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के वैचारिक सलाहकार चरण सिंह राजपूत ने सेक्टर 11 स्थित राष्ट्रीय सहारा के मेन गेट पर बर्खास्त कर्मचारियों के चल रहे धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मजीठिया, मणिसाना, बछावत वेजबोर्ड के हिसाब से बकाया वेतन के साथ बची नौकरी का हिसाब भी संस्था से लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक ओर संस्था के चेयरमैन सुब्रत राय थिंक विद मी पुस्तक लिख रहे हैं। देश को आदर्श व महान बनाने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने कर्मचारियों का शोषण व उत्पीड़न कर उन्हें बर्बाद करने में लगे हैं। बिना बकाया वेतन दिए बड़े स्तर पर कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रिंट मीडिया में मजीठिया वेजबोर्ड के हिसाब से वेतन नहीं दिया जा रहा है। जो कर्मचारी अपने हक की आवाज उठा रहे हैं, उनको बर्खास्त कर दिया जा रहा है। 22 कर्मचारी पहले ही बर्खास्त कर दिए गए थे कि 25 कर्मचारियों को अब बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय स्वामी अग्निवेश ने उन्हें आश्वस्त किया है कि सहारा में कर्मचारियों के साथ अपनाई जा रही दमानात्मक नीति के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी।

राजपूत ने व्यवस्था पर उंगली उठाते हुए कहा कि देशभक्ति का ढकोसला करने वाली इस संस्था के कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंच जाते हैं। सहारा में कर्मचारियों के उत्पीड़न की दास्तां जगजाहिर हो चुकी है पर किसी भी राजनीतिक दल ने इस संस्था के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। जिस संस्था का नाम गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री समेत 100 नेताओं को अरबों की रिश्वत देने के आरोप लग रहे हों, उस संस्था के कितने काले कारनामे दबाए गए होंगे, यह समझने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सहारा में उत्पीड़न के खिलाफ अब सड़कों पर उतरा जाएगा और देशभक्ति के नाम पर जनता को ठगने वाले संस्था के चेयरमैन को बेनकाब किया जाएगा। इस अवसर उन्होंने सहारा के पीड़ित कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे सब मिलकर अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें। यदि इसी तरह से उत्पीड़न सहते रहे तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संस्था देश के कितने नेताओं का खर्चा उठाती है। विभिन्न कार्यक्रमों में अरबों रुपए का खर्च करती है पर अपने कर्मचारियों को पैसा देने के लिए इसके पास पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कितने कर्मचारी हैं जो कई साल पहले नौकरी छोड़ चुके हैं पर अभी तक हिसाब नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस संस्था के काले कारनामों के खिलाफ मोर्चा खोला जाए। कारगिल के नाम पर 10 साल तक अपने कर्मचारियों के वेतन से 100-500 रुपए काटने वाली इस संस्था से इन पैसों का हिसाब पूछा जाए। सुप्रीम कोर्ट इस संस्था के चेयरमैन से पूछे कि जब उन्होंने अपने को जेल से छुड़ाने के नाम पर अपने वर्करों से अरबों की जो उगाही की है वह कहां है। उन्होंने पैरोल पर छुटे संस्था के चेयरमैन हक की आवाज उठाने पर सहारा मीडिया के कर्मचारियों से दुर्भावनावश व्यवहार कर रहे हैं। इस अवसर पर चुन्नी लाल, जसवंत सिंह, वीर बहादुर सिंह, किशन सिंह,, शेखर सिंह, राजकुमार राना, प्रताप सिंह, विजय कमार, चंद्रभूषण प्रसाद, चंदन सिंह, संतोष कुमार मिश्र, रमेश चंद्र, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, बीरेंद्र सिंह, भगवान सिंह रावत, लालजी, राम सिंह, रमेश पाठक, रामप्रकाश राजपूत, विजय सिंह आदि मौजूद थे।

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