तेरा-मेरा कोना
तू खड़ा होके कहां मांग रहा है रोटी, ये सियासत का नगर सिर्फ दगा देता है (गोपाल दास नीरज)। फिलहाल सियासत से अपने वास्ते...
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तू खड़ा होके कहां मांग रहा है रोटी, ये सियासत का नगर सिर्फ दगा देता है (गोपाल दास नीरज)। फिलहाल सियासत से अपने वास्ते...