आरोपी डीएसपी बोला- बस एक बार हुई थी पीटीसी न्यूज के पत्रकार से मुलाकात

डबवाली : डीएसपी पूर्ण चंद पंवार ने कहा कि मृतक पीटीसी न्यूज के पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज होने उपरात जाच के लिए एक बार ही सतीश से मुलाकात हुई थी। इसमें प्रताड़ित करने या रुपये मागने जैसी कोई बात नहीं हुई। जाच के दौरान सतीश कुमार के साथ कई गणमान्य लोग भी आए थे जो इसका गवाह है। इस बारे में मृतक सतीश के बड़े भाई स्व. सुशील के साले दीपक ने कहा कि हमने कोई षड्यंत्र नहीं रचा। खुद निधि ने सतीश और उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कराया है। हम तो मात्र गवाह के तौर पर साथ गए थे।

यह हुआ था केस दर्ज : बीते वर्ष 10 दिसंबर को शहर पुलिस में शिकायत देकर निधि गुप्ता पुत्री स्वर्गीय सुशील मोदी ने अपने चाचा सतीश मोदी व उसकी पत्नी मीनाक्षी, बेटो वरुण और अरुण के खिलाफ दीवार तोड़कर मकान पर कब्जा करने और चोरी करने करने के आरोप लगाए थे। मामले में 15 जनवरी 2013 को उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी ने चारों के गिरफ्तारी वारट जारी किए हुए है। उधर, एसएसपी, सिरसा डा. राजश्री सिंह का कहना है कि पीटीसी न्यूज के पत्रकार ने आत्महत्या पंजाब के बठिंडा शहर में की है इसलिए सुसाइड नोट के अनुसार कार्रवाई भी वहां की पुलिस करेगी। उनके खिलाफ हमारे पास अरेस्ट वारंट थे। उसकी भतीजी ने मृतक व उसके परिवार के अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया हुआ था।

पीटीसी न्यूज के पत्रकार ने सुसाइड से पूर्व पीएम समेत कई लोगों को पत्र भेजा था

डबवाली (सिरसा) : मंडी डबवाली के पीटीसी न्यूज के पत्रकार सतीश कुमार ने रविवार सुबह बठिंडा (पंजाब) के रेलवे स्टेशन के समक्ष स्थित मार्केट में जहरीली वस्तु निगल कर खुदकुशी कर ली। कुछ देर बाद मृतक का बेटा अपने पिता को ढूंढते हुए घटनास्थल पर पहुंचा और बेहोशी की हालत में पिता को देख अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी जेब से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, इसमें नौ लोगों के नाम शामिल हैं इनमें डीएसपी स्तर के एक अधिकारी का नाम भी है। साथ ही प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सहित आधा दर्जन मंत्रियों को भेजी गई डाक की रसीदें भी मिली हैं।

मृतक के बेटे अरुण कुमार ने बताया कि उनका उसके मृत चाचा के सालों के साथ मंडी डबवाली स्थित एक मकान को लेकर विवाद चल रहा था। विवाद के चलते उक्त लोगों ने पुलिस से मिलकर उनके पूरे परिवार (पिता सतीश कुमार, उसकी माता मीनाक्षी, भाई वरुण और उसके खिलाफ) 10 दिसंबर 2012 को मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद पूरा परिवार पुलिस के डर से घर छोड़कर फरार हो गया और अदालत ने भी उनकी जमानत को रद कर दिया। अदालत ने उन्हें भगोड़ा करार दे दिया। वह और उसके पिता पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत करवाने के लिए दिल्ली से बठिंडा के रास्ते चंडीगढ़ जा रहे थे। शनिवार रात्रि वे दोनों बठिंडा पहुंचे। रविवार सुबह उसके पिता सतीश कुमार रेलवे स्टेशन के बाहर चले गए, जब काफी समय से वह वापस न आए तो पिता की तलाश में वह रेलवे स्टेशन के बाहर वाली मार्केट में गया और देखा कि उसके पिता बेहोश पड़े हैं।

इस पर उसने तुरंत सहारा जन सेवा सोसायटी के सदस्यों को सूचना दी और वह अपने पिता तो लेकर सिविल अस्पताल पहुंचा। अस्पताल में डॉक्टर ने उसके पिता को मृत घोषित कर दिया और बताया कि उसके पिता ने कोई जहरीली वस्तु खाई है। वहीं, थाना कोतवाली पुलिस को मृतक की जेब से मिले सुसाइड नोट में नौ लोगों के नाम लिख कर कहा गया है कि उक्त लोगों द्वारा परेशान करने के कारण उसने सुसाइड किया है। नोट में दीपक, अशोक व नरेश (मृतक के भाई के साले) अजय व राजिंदर (रिश्तेदार) और डीएसपी मंडी डबवाली पूर्ण सिंह, थाना इंचार्ज रवि कुमार और हवलदार प्रीतम सिंह के नाम शामिल हैं। वहीं, मृतक का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों के हवाले कर दिया गया है।

उधर, इस बारे में पूछे जाने पर थाना कोतवाली इंचार्ज जपसाल सिंह का कहना है कि सुसाइड नोट में उक्त सभी लोगों के नाम लिखे हैं, पुलिस मृतक के बेटे अरुण के बयान लेने के बाद मामले की जांच करेगी। जांच के बाद ही अगली कार्रवाई होगी। सतीश के बेटे अरुण ने कहा कि उनका परिवार राजस्थान में एक धार्मिक स्थान पर रह रहा था और बीते दिन वे दिल्ली और फिर बठिडा आए थे। परिवार के बाकी दो लोग मृतक की पत्नी मीनाक्षी और बड़ा बेटा वरुण अभी राजस्थान में है।

पीटीसी न्यूज के पत्रकार ने जहर खाकर जान दी, पुलिस वालों को जिम्मेदार ठहराया

एक दुखद सूचना आ रही है. ज्यादा डिटेल नहीं पता चल सका है. सिर्फ इतना मालूम हुआ है कि पीटीसी न्यूज, डबवाली के पत्रकार ने भठिंडा में जहर खाकर जान दे दी. सुसाइड नोट शव के पास मिला है. अपने सुसाइड लेटर में पत्रकार ने मौत के लिए डबवाली के डीएसपी, एसएचओ, एसआई और एचसी समेत कई लोगों को जिम्मेदार ठहराया है. यह मामला इसलिए गंभीर है कि पत्रकार जब पुलिस वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर ले रहा है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है. जिस खाकी वर्दी को लोगों और समाज की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है, वही खाकी वर्दी समाज और लोगों के लिए परेशानी का सबब हो चुका है. ये है सुसाइड लेटर…