पलवल में पत्रकार और उसके परिजनों को हत्या के प्रयास में फंसाने की साज़िश का पर्दाफाश

पलवल में व्यापारी पर हुए जानलेवा हमले के मामले का खुलासा जिला पुलिस कप्तान राकेश कुमार आर्य ने पत्रकार वार्ता के दौरान किया। घटना की साजिश रचने और अंजाम देने वालों को भी पत्रकारों के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने इस मामले में व्यापारी के तीन साथियों को भी गिरफ्तार किया है, जबकि व्यापारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। एसपी ने कहा की व्यापारी ने योजना के तहत दूसरे लोगों को फंसाने के लिए चाक़ू मारने की साजिश रचि थी। इसमें और भी लोगों का हाथ होने की सम्भावना बतायी गई है। मामले में आरोपी बने वैश्य समाज के प्रधान और पत्रकार ओमप्रकाश गुप्ता, उनके बेटे और भाई को निर्दोष बताया गया है। इस तरह का झूठा मामला पलवल में पहली बार उजागर हुआ है। यह मामला हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा और युपीए अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी की चौखट तक पहुंच भी पहुँच गया था।

पलवल में गत 17 अप्रैल को थाना पुलिस कैम्प में मोहित बजाज के बयान पर संजय गुप्ता के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में संजय गुप्ता को पुलिस ने अदालत में पेश किया गया था। एसपी राकेश आर्य ने बताया की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी लेकिन यह जमानत मोहित बजाज को हजम नहीं हुई और इसने अपने साथियों के साथ मिलकर वैश्य समाज के प्रधान ओमप्रकाश, उनके बेटे संजय गुप्ता और उनके भाई चंदीराम गुप्ता को फंसाने की साजिस रची और 18 अप्रैल को शाम 7 से 8 बजे के बीच दोबारा मोहित को चाकू मारने का मामला बनाया गया। इन्होंने हंगामा करना शुरु कर दिया और इसका विरोध करके बाजार को बंद करा दिया गया। एसपी राकेश आर्य ने खुलासा करते हुए कहा की इस विरोध से पुलिस पर दबाब बनाया गया और पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की गई। मोहित बजाज को षडयंत्र के तहत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसको डाक्टरों ने जायदा सीरियस कहते हुए आईसीयु में वार्ड में रखा गया और किसी भी पुलिस अधिकारी और इससे नहीं मिलने दिया गया। पुलिस ने इन लोगों द्वारा की गई शिकायत पर इस मामले में संजय गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता व चन्दीराम गुप्ता सहित 5 लोगों के खिलाफ 19 अप्रैल को सुशील उर्फ रिंकू पुत्र रामलाल बजाज के बयान पर एफआईआर नंबर 176 को आईपीसी की धारा 148-149-323-324-307-506-195ए-120बी के तहत हत्या करने के प्रयास के साथ मारपीट का मामला दर्ज किया गया। इस मामले में पुलिस ने संजय गुप्ता को गत 22 अप्रैल को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें नीमका जेल भेज दिया। और पुलिस ने मामले की गहनता से जाँच में जुट गई।

जिला पुलिस कप्तान राकेश कुमार आर्य ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि गत 18 अप्रैल को सरकारी अस्पताल में कुछ युवक मोबाइल पर फोन पर बात कर लोगों को एकत्र कर रहे थे। वे बात करते समय जिस तरह की भाषा का प्रयोग रहे थे उसे लेकर पुलिस उनके पीछे लगी हुई थी। कुछ युवकों की कॉल डिटेल और जवाहर नगर मार्किट के दुकानदारों द्वारा दी गई जानकारी पर पुलिस ने कुछ युवकों को हिरासत में लिया। हिरासत में की गई पूछताछ के दौरान पुलिस ठोस नतीजे पर पहुंची। एसपी राकेश कुमार आर्य ने बताया कि गत 17 अप्रैल को हई वारदात में संजय गुप्ता को जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद मोहित बजाज आशीष गौतम महेन्द्र सिंह व विकास ग्रोवर ने साजिश रची।

साजिश के तहत मैडिकल स्टोर संचालक विकास ग्रोवर ने सर्जीकल ब्लेड दिया। महेन्द्र ने मोहित बजाज को पकड़ा और आशीष गौतम ने ब्लेड से कट मार दिया। कट मारने के बाद अफवाह फैला दी की मोहित बजाज को संजय गुप्ता आदि ने चाकू घोंप दिया है। और मोहित को पलवल के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन अस्पताल के डॉक्टर पर राजनेताओं ने दबाब बनाकर मेडिको-लीगल-रिपोर्ट को बदलवाया गया। बजाज की कॉल डिटेल के आधार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। षडयंत्र रचने वाले मोहित बजाज से और भी खुलासे होने की सम्भावना है। एसपी राकेश आर्य ने कहा की इस साजिश को रचने में कुछ पुलिसकर्मियों औऱ पत्रकारों का भी हाथ होने की सम्भावना है। उन्होनें कहा कि साजिश में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। पलवल में इस तरह के सैकड़ों झूठे मामलों में पहली बार इस तरह का मामला उजागर हुआ है।

 

पलवल से पत्रकार ऋषि भारद्वाज (इण्डिया न्यूज चैनल) की रिपोर्ट।

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