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कहीं सहारा बनारस और कानपुर की यूनिट न बंद हो जाये!

सहारा में काम करने वालों की हालत पतली होती जा रही है। सेलरी न मिलने से परेशान चल रहे सहाराकर्मियों का भविष्य खतरे में दिख रहा है। सुना जा रहा है कि बनारस और कानपुर यूनिट को बंद करने की तैयारी चल रही है। इसके पीछे अनुमान है कि एक तो खर्च अधिक और आमदनी कम होना और ऊपर से मजीठिया लागू किये जाने का कोर्ट का आदेश।

सहारा में काम करने वालों की हालत पतली होती जा रही है। सेलरी न मिलने से परेशान चल रहे सहाराकर्मियों का भविष्य खतरे में दिख रहा है। सुना जा रहा है कि बनारस और कानपुर यूनिट को बंद करने की तैयारी चल रही है। इसके पीछे अनुमान है कि एक तो खर्च अधिक और आमदनी कम होना और ऊपर से मजीठिया लागू किये जाने का कोर्ट का आदेश।

मजीठिया लागू न करने के लिए सहारा कई तरह के प्रयास कर रहा है। लेकिन ये साजिशें ही कहीं उसी पर भारी न पड़ जाये। ढेर सारे लोग वर्षों से महज 3 से 5 हजार पर काम इसलिए कर रहे हैं कि कभी सहाराश्री का दिल पिघले और उनको भी स्टाफर कर दिया जाये। ऐसा होना तो दूर इनको वेतन न देकर और इनकी उपस्थिति गुप्त रख कर किसी नयी साजिश की ओर इशारा किया जा रहा है।

वर्षों से काम कर रहे सहाराकर्मियों को इंतजार है तो बस उच्चतम न्यायालय के आदेश का जो मजीठिया को सभी शर्तों के साथ लागू करवाये। सहारा के अंदर असमंजस का दौर जारी है। एक ओर जहां स्ट्रिंगर्स अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं वहीं स्टाफर्स की हालत पतली है।  उनको कई गुना काम करना पड़ रह है। उनको ट्रांसफर का भी भय सताने लगा है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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