इं‍जीनियरिंग परीक्षा घोटाला : सैकड़ों फेल छात्रों को कर दिया गया पास

विनायक विजेता: सुशासन का हाल-2 : कई घोटालों कारण अक्सर सुर्खियों में रहा बिहार के घोटाला अध्याय में एक और अध्याय जुड़ने वाला है। यह अध्याय वीपी मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के नियंत्रणाधीन पूर्णिया के दो इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़ा है। पूर्णिया में मीलिया इंस्ट्टीयूट ऑफ टेक्नॉलाजी और विद्या बिहार इंस्ट्टीयूट ऑफ टेक्नॉलाजी नामक दो इंजीनियरिंग कालेज है। बीते दिसम्बर माह में जामिया मीलिया के फाइनल ईयर के और विद्या बिहार के प्रथम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं हुईं। परीक्षा के बाद मूल्यांकन के लिए दोनों कॉलेजों की कापियां एमआईटी, मुजफ्फरपुर भेजी गई। मूल्यांकन के दौरान इन दोनों इंजीनियरिंग कॉलेजों के लगभग सत्तर प्रतिशत परीक्षार्थी अनुतीर्ण हो गए। इसके बाद इस मामले में खेल शुरू हो गया।

वीपी मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति, परीक्षा नियंत्रक, दोनों कॉलेजों के प्राचार्य और अन्य स्टाफ की मिली भगत से इंजीनियरिंग परीक्षा घोटाले की नींव डाल दी गई। जितने छात्र अनुतीर्ण थे सबों से एक भारी भरकम राशि वसूल कर फेल हुए छात्रों की कॉपियां पुनर्मूल्यांकन के लिए दो माह पूर्व बीआईटी, सिंदरी भेज दी गई। बीआईटी सिंदरी में सारे कापियों का पुनर्मूल्यांकन यहां पदस्थापित विद्युत अभियंत्रण विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. उपेन्द्र प्रसाद की निगरानी में कराया गया, जिनके एक साला पूर्णिया स्थित इन दोनों कालेजों में से एक में अच्छे पद पर पदस्थापित हैं। इस मामले में सबसे आश्चर्यजनक और चौकाने वाले तथ्य तो यह है कि पूरे भारतवर्ष में कहीं भी इंजीनियरिंग परीक्षा की कॉपियों का तब तक पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, जब तक इसके लिए सक्षम न्यायालय कोई आदेश जारी नहीं करे।

पर इस मामले में रोचक तथ्य यह है कि एक बार एमआईटी, मुजफ्फरपुर में कापियों का मूल्यांकन हो जाने के बाद नियम और प्रावधानों को ताक पर रखकर उसे पुनर्मूल्यांकन के लिए बीआईटी सिन्दरी भेजा गया। आखिर यह सब किसके आदेश से और क्यों हुआ इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार पूर्व में मूल्यांकन में जितने भी छात्र अनुतीर्ण हुए थे उनमें अधिकांश प्रभावशाली परिवार से आते हैं। सूत्रों पर यकीन करें परीक्षा में अनुतीर्ण छात्रों को पुनर्मूल्यांकन में उतीर्ण करने के एवज में प्रति छात्र दो से पांच लाख रुपये वसूल किए गए, जिसका बंदरबांट उपर से नीचे के स्तर पर किया गया। बिहार में इस तरह की यह पहला घोटाला है जब इंजीनियरिंग के फेल छात्रों की कापियों का पुनर्मूल्यांकन करा उन्हें अनुतीर्ण से उतीर्ण करार दिया गया। बताया जाता है कि इन दोनों इंजीनियरिंग कॉलेजों के फेल हुए छात्रों से पुनर्मूल्यांकन में उतीर्ण करने के एवज में लगभग दस करोड़ रुपये वसूल किए गए।

लेखक पटना से प्रकाशित दैनिक ‘सन्मार्ग’  में बतौर विशेष संवाददाता कार्यरत हैं.

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