बांग्‍लादेशी ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के पितामह ने पद छोड़ा

श्रवण : सरकारी दबाव से परेशान होकर मोहम्‍मद यूनुस ने उठाया यह कदम : सरकारी दखलंदाजी एवं बेतुके हस्तक्षेप के कारण बांग्लादेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पितामह ने अपना पद छोड़ दिया है, इसी के साथ एक और कर्मवीर ने घटिया व्यवस्थाओं से तंग आकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के विश्व प्रसिद्ध उदार अर्थव्यवस्था के समर्थक गरीबों को स्वावलंबी बनाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने लघु ऋण प्रदाता संस्था ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों के चलते किया, जिस में सरकारी कार्यप्रणाली एवं न्यायालय के अनुचित हस्तक्षेप की बहुत बड़ी भूमिका है..कुछ समय पहले उनपर सरकार द्वारा विदेशी धन के लेन-देन का आरोप लगा था, जिस में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया गया.

सरकार द्वारा नियुक्त जांच समिति ने इस मामले पर कहा कहा था कि ग्रामीण बैंक के संस्थापक मुहम्मद यूनुस द्वारा विदेशी धन के लेन-देन में किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है। यह धन 15 वर्ष पहले नार्वे की सरकार से प्राप्त हुआ था। वित्त मंत्री ए.एम.ए मुहित ने मीडिया में इस मामले पर समिति के फैसले का यह कहते हुए समर्थन किया था क़ि, “यह लेन-देन दोनों देशों के बीच आपसी सहमति के जरिए हुआ था, इसलिए समिति ने इस इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं उठाई।” मामला यह था क़ि नार्वे में निर्मित हुई एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म में यूनुस द्वारा अनियिमितता बरती गई थी। लेकिन यूनुस ने इससे इनकार किया था और नार्वे सरकार भी इस मामले में यूनुस के साथ थी। नार्वे सरकार ने कहा था कि इस मुद्दे को कुछ वर्ष पहले ही सहमति से सुलझा लिया गया था।

बांग्लादेशियों के लिए शुरू में स्वयं एक बैंक एवं उसके बाद अपनी संस्था ग्रामीण बैंक के जरिये गरीबों में पूंजी का प्रसार-प्रचार करने वाले एवं आशान्वित लोगों को सस्ते मूल्य पर क़र्ज़ उपलब्ध कराने वाले यूनुस ने अपने बहुआयामी कार्य के द्वारा जनता को स्वावलंबी बनाया. जिसके कारण उन्हें विश्व-प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. यूनुस ने इस्तीफ़ा देने से पहले बैंकों में राजनीतिक दखलंदाजी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा क़ि प्रबंध निदेशक पद से उनके हटाए जाने के बाद बैंकिंग क्षेत्र की स्वायत्तता को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बैंक राजनीतिक दखलंदाजी से खुद को सफलता पूर्वक अलग रख पाएगा? यूनुस ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि यह देश में सभी को पता है कि वित्तीय संस्थाओं में राजनीतिक प्रभाव बढ़ने पर उसका क्या परिणाम होता है।

गुरुवार को सार्वजनिक किए गए अपने इस्तीफे में यूनुस ने कहा कि वह बैंक की गतिविधियों को बाधित होने से रोकने के लिए और कठिनाई से गुजर रहे ग्रामीण बैंक परिवार के संरक्षण के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैंक अपनी स्वतंत्रता और अपना चरित्र कायम रख पाएगा। बांग्लादेश के सर्वोच्च अदालत ने इससे ठीक दो दिन पहले ग्रामीण बैंक के प्रमुख पद से हटाए जाने के सरकार के फैसले के विरोध में यूनुस द्वारा दायर की गई याचिकओं को खारिज कर दिया था। ग्रामीण बैंक से ग्रामीण महिलाओं को ऋण देने के प्रारूप को कई देशों में अपनाया गया है।केंद्रीय बैंक ने यूनुस के सेवानिवृत्ति नियमों का उल्लंघन करने की बात करते हुए उन्हें ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया था। तब से वह इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

देश के केंद्रीय बैंक, बांग्लादेश बैंक का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र के नियमों के मुताबिक एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए, इसे ध्यान में रखते हुए 71 वर्षीय यूनुस को उनके पद से हटाए जाने का निर्णय लिया गया। सरकार ने भी कहा कि अदालत के फैसले के बाद अब यूनुस को बैंक से चले जाना चाहिए। बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने दो मार्च को यूनुस को इस तर्क के साथ ग्रामीण बैंक के प्रमुख पद से हटाने का आदेश दिया कि उनकी उम्र 60 वर्ष हो चुकी है और दूसरे बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तरह उन्हें भी बैंक के प्रमुख पद से हट जाना चाहिए। इससे पहले ‘स्टार ऑनलाइन’ वेबसाइट के मुताबिक अन्य याचिका तीन अप्रैल को ग्रामीण बैंक के नौ निदेशकों ने दायर की थी। जिसमे कहा गया था क़ि यूनुस को बैंक का प्रबंध निदेशक बने रहने दिया जाए. बांग्लादेश सरकार ने यूनुस को बैंक का अध्यक्ष बनाने की बैंक के निदेशकों की मांग नामंजूर कर दी थी। साथ ही सरकार ने बैंक को स्वतंत्र संस्था मानने इनकार कर दिया था। सरकार ने कहा कि यह बैंकिंग क्षेत्र को नियमित करने वाले कानूनों के तहत आती है।

उनके इस्तीफ़ा दिए जाने के विरोध में बांग्लादेश के पूर्व मंत्री मोदूद अहमद ने गुरुवार को मौजूदा हालात से उबरने के लिए लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा क़ि बांग्लादेश लगातार अकेला पड़ता जा रहा है। भारत के अलावा इसके किसी भी अन्य देशों जहाँ से आर्थिक मदद मिले उनसे कोई सम्बंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को नीचा दिखाये जाने की वजह से पश्चिमी देश भी अब बांग्लादेश को अपने मित्र के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इससे पहले आज रात ही ‘बीडी न्यूज24’  के हवाले से खबर आई थी क़ि बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के संस्थापक ने हसीना सरकार के साथ लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद गुरुवार को इस्तीफा दे दिया।

लेखक श्रवण कुमार युवा पत्रकार हैं.

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