मिस्टर टर्न अराउंड का अर्धनारीश्वर

जुगनू शारदेय : कुछ बातें बेमतलब -3 : जब से संघ परिवार का कापी राइट भी हमारी परंपरा और संस्कृति पर हुआ है, तब से हम अर्धनारीश्वर की परंपरा भूल गए हैं। स्त्री–पुरूष की बराबरी की पहचान है अर्धनारीश्वर। इसका मतलब बहुत साफ है कि देह का आधा अंग महिला है और आधा मर्द। वैवाहिक मंत्रों में भी याद दिलाया जाता है कि हम दोनों एक दूसरे के लिए समर्पित हैं। बिहार में इस समर्पण का आदर्श उदाहरण पेश करते हैं बिहार ही नहीं देश के, और देश ही नहीं हमारे विकास प्रिय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के पूर्व बड़े भाई और नवीनतम मुहावरा बाजी में मिस्टर टर्न अराउंड लालू प्रसाद। अपनी पत्नी के प्रति समर्पित ऐसा महापुरुष संपूर्ण भारत वर्ष में बहुत मुश्किल से मिलता है। सामान्य ज्ञान के विद्यार्थियों से प्रश्न पूछा जाए कि उस राज्य का नाम बताओ जहां पति–पत्नी दोनों मुख्य मंत्री रहे हों तो उत्तर होगा- बिहार।

बस एक ही बार मिस्टर टर्न अराउंड लालू प्रसाद हो गए। जब उनका रामबिलास पासवान से समझौता हुआ तो ऐलान हुआ कि सत्ता मिलने पर मुख्य मंत्री लालू प्रसाद ही होंगे। यह उनका विश्वासघात था अपनी पत्नी राबड़ी देवी के प्रति। ब्रिटिश संसदीय परंपरा में नेता विरोधी दल ही नेता सत्ताधारी दल होता है। इस हिसाब से बिहार के मुख्य मंत्री पद पर दावा राबड़ी देवी का ही बनता है। लेकिन लालू जी एक दम मिस्टर टर्न अराउंड हो गए। यहां तक कि हम कलमघिस्सुओं ने लिख मारा कि राबड़ी देवी राजनीति से संन्यास ले रही हैं। हालांकि एक बालक अपनी पीएचडी के लिए रिसर्च कर रहा है कि राबड़ी देवी राजनीति में रह कर भी संन्यासी हैं या नहीं। नेता, विरोधी दल की हैसियत से उनकी गतिविधियों से यही लगता है कि वह संन्यासी ही हैं। लगता है वह बालक मिस्टर टर्न अराउंड लालू प्रसाद के पास अपनी खोज बीन के सिलसिले में पहुंच गया होगा।

आज कल रिसर्चर के साथ भी एक संकट हो गया है। अकसर वह ऐसे ही सवाल पूछते हैं जैसे खबरिया चैनल वाले पूछते हैं। किसी की समझ में नहीं आता कि उनके सवाल का जवाब क्या दिया जाए। लालू जी ने भी पूछ दिया होगा रिसर्चर से कि तुम्हारे इस सवाल का मतलब क्या यह नहीं है कि कहीं हम तो नहीं ले रहे हैं संन्यास। न हम संन्यास लेंगे और न ही राबड़ी देवी संन्यास लेंगी। राबड़ी देवी तो बिहार के विकास के लिए तपस्या कर रही हैं। सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना कर रही हैं कि बिहार दूधो नहाए–पुतो फले। बिहार दूधो नहा रहा है। पुतो फल भी रहा है। सच कहें तो पूरा परिवार फल फूल रहा है। न विश्वास हो तो उम्मीदवारों का नाम जान लें। पूरा परिवार ही उम्मीदवार है। हमारा परिवार हमेशा से परिवारवाद के विरोध में रहा है, कहा शान से अपनी मारक मुस्कान के साथ मिस्टर टर्न अरांउड लालू प्रसाद ने। इसलिए हमारे परिवार की तरफ से यानी एक मेरी तरफ से और एक अपनी तरफ से राबड़ी देवी चुनाव लड़ रही हैं विधान सभा का। यही है वास्तविक नर नारी समता -अर्धनारीश्वर!

जुगनू शारदेय हिंदी के जाने-माने पत्रकार हैं. ‘जन’, ‘दिनमान’ और ‘धर्मयुग’ से शुरू कर वे कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादन/प्रकाशन से जुड़े रहे. पत्रकारिता संस्थानों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में शिक्षण/प्रशिक्षण का भी काम किया. उनके घुमक्कड़ स्वभाव ने उन्हें जंगलों में भी भटकने के लिए प्रेरित किया. जंगलों के प्रति यह लगाव वहाँ के जीवों के प्रति लगाव में बदला. सफेद बाघ पर उनकी चर्चित किताब “मोहन प्यारे का सफ़ेद दस्तावेज़” हिंदी में वन्य जीवन पर लिखी अनूठी किताब है. इस किताब को पर्यावरण मंत्रालय ने भी 2007 में प्रतिष्ठित “मेदिनी पुरस्कार” से नवाजा. फिलहाल दानिश बुक के हिन्‍दी के कंसल्टिंग एडिटर हैं तथा पटना में रह कर स्वतंत्र लेखन कर हैं.

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