मेरे बच्चे मुझसे अच्छे पत्रकार हैं

मुझे जीवन में करीब पांच साल शिक्षक के रूप में काम करने का मौक़ा मिला. पहली बार 1973 में जब मैं एक डिग्री कालेज में इतिहास का मास्टर था. दो साल बाद निराश होकर वहां से भाग खड़ा हुआ. वहां बीए के बच्चों को इतिहास पढ़ाया था मैंने. वे बच्चे मेरी ही उम्र के थे. कुछ उम्र के लिहाज़ से मेरे सीनियर भी रहे होंगे. लेकिन आज तक हर साल 5 सितम्बर के दिन वे बच्चे मुझे याद करते हैं. कुछ तो टेलीफोन भी कर देते हैं. दुबारा 2005 में फिर एक बार शिक्षक बना. इस बार पत्रकारिता पढ़ाता था. तीन बैच के बच्चे मेरे विद्यार्थी हुए. यह दौर मेरे लिए बहुत उपयोगी था. पत्रकारिता का जो सैद्धांतिक पक्ष है उसके बारे में बहुत जानकारी मुझको मिली. अपने विद्यार्थियों के साथ-साथ मैं भी नई बातें सीखता रहा. तीन साल बाद नौकरी से अलग  हो गया. शायद वहां मेरा काम पूरा हो चुका था. लेकिन इन वर्षों में मैं ने जिन बच्चों को पढ़ाया उन पर मुझे गर्व है.

समय की परेशानियों के चलते उन बच्चों को वैसी नौकरी नहीं मिली जैसी मिलनी चाहिए थी. लेकिन मुझे मालूम है कि वे अपने दौर के बेतरीन पत्रकार हैं. अगर उन्हें मौक़ा मिला तो वे अपने संगठन को बुलंदियों पर ले जायेंगे. मेरी इच्छा है कि कुछ संगठन आगे आयें और उन बच्चों को मौक़ा दें, जो लोग मुझे अच्छा पत्रकार मानते हैं मैं उनसे अपील करता हूँ कि वे मेरे बच्चों पर नज़र डालें. वे सब मुझसे बेहतर पत्रकार हैं. आज बहुत से बच्चों ने मुझे याद किया है. मैं भी उन सबसे कहना चाहता हूँ मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आती है मेरे बच्चों. देर हो रही है लेकिन तुम सब पत्रकारिता की बुलंदियों तक जाओगे. ठोकर खाकर कभी नहीं परेशान होना. मैं जानता हूँ कि तुम लोग हर हाल में बहुत ऊंचाई तक जाओगे.

लेखक शेष नारायण सिंह जाने-माने पत्रकार हैं. लखनऊ से प्रकाशित हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स के नेशनल ब्यूरो चीफ हैं.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *