: कुछ बातें बेमतलब 19 : कुछ कहावतें मजेदार होती हैं। मसलन एक कहावत बहुत ही मजेदार है। नारियां क्षमा करें, यह कहावत उनके खिलाफ है। पर है बहुत मजेदार। नारी, अगर इस कहावत को अपने पर न लें और अलग-अलग रुपकों में इसको समझें तो उन्हें भी मजा आएगा। तो कहावत है कि इयार का गुस्सा भतार पर! अब इसे यूं भी समझ सकते हैं कि हार का गुस्सा ईवीएम पर। या यूं कह सकते हैं कि मनमोहन का गुस्सा योजना आयोग पर। पता सिर्फ यह लगाना है कि मालिक कौन है। यहां भतार मालिक का प्रतीक है और इयार प्रतीक है उसका, जो मालिक की गैर मौजूदगी में एक झलक पाता है। यह झलक क्या है। झलक गृह मंत्रालय है। इसका इयार कौन है पी चिदंबंरम। अगर हमने इयार खोज लिया तो भतार भी खोजना पड़ेगा। बहुत परदे में रहता है गृह मंत्रालय। कुछ कुछ उस गाने की तरह कि परदा जो खुल गया तो फिर…भतार हो जाएगा नाराज। तो भतार श्री बहुत नाराज हैं। दिल्ली में बहुत बलात्कार होता है, उससे बहुत नाराज हैं। आसान लोकतांत्रिक तरीका तो यह था कि दिल्ली पुलिस को दिल्ली की नगरपालिका नुमा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार के जिम्मे छोड़ देते।
अब यह पत्रकार लोग पेड न्यूज से बाहर निकल कर, राडिया टेप की आवाज में घुस कर कुछ अजीब-गरीब सवाल पूछते हैं, पुलिस के भतार से कि बताइए कि दिल्ली में हुए बलात्कार के लिए कौन जिम्मेदार है। भतार को लगता है कि पत्रकार लोग इयार का गुस्सा भतार पर निकाल रहे हैं।
यह भतार बड़ा ही गंभीर है। आम तौर पर मनुष्य जब भतार हो जाता है तो गंभीर नहीं रहता। भतार तो हंसता हुआ नूरानी चेहरा, काली जुल्फें रंग सुनहरा होता है। क्या आपने कभी देखा है अपने गृह मंत्री को कभी सफेद बालों में। नहीं न।
लेकिन गंभीरता से जवाब देना था। दे दिया। दिल्ली में बाहर से आए लोग गंद फैलाते हैं। उन इलाकों का भी नाम बताया जहां यह बाहरवाला पाया जाता है। यह बाहरवाला ही दिल्ली को दिल्ली बनाता है। परसो तक ब्रहमचारी राहुल गांधी यही कहते थे।
तब याद आया इस भतार को कि अरे, वह तो भतार नहीं इयार है। इयार भी क्या है। घर में घुसा बाहरवाला ही है। फटाक से कहा कि गुनाहगार नहीँ बाहरवाला, मैं भी हूं बाहरवाला। पर असली सवाल यह भी कि दिल्ली में कौन है अंदरवाला।
बंटवारे के बाद बसाए गए यहां अंदर के बाहरवाला। दफ्तरों में सजाए गए बाहरवाला। साग-सब्जी नौकरी के लिए बुलाए गए पहाड़वाला। कुछ बड़ा निर्माण कार्य हुआ तो सामने आया बिहार वाला। पूरी की पूरी बस्ती बसाई दक्षिणवाला।
अब यहां पर यही मुद्दा कि कहावत कहां फिट होती है कि इयार का गुस्सा भतार पर। सब एक दूसरे के इयार हैं। यहां का इयार वहां का भतार है। तब तय हुआ कि कहावत बदली जाए। इसी से इयार और भतार का रिश्ता नहीं जुड़ेगा। गृह मंत्री गृह मंत्री ही बना रहेगा।
दिल्ली की परंपरा में बना दी गई मंत्रियों का समूह। मामला मुहावरा बदलने का था। पहले वाले मुहावरे का वजन भी बनाए रखना था। माल महाराज का और मिरजा को होली खेलना था। तो जनाब इसी पर मुहावरा बना कि खेत खाए गदहा, मार खाए जोलहा।
जुगनू शारदेय हिंदी के जाने-माने पत्रकार हैं. ‘जन’, ‘दिनमान’ और ‘धर्मयुग’ से शुरू कर वे कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादन/प्रकाशन से जुड़े रहे. पत्रकारिता संस्थानों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में शिक्षण/प्रशिक्षण का भी काम किया. उनके घुमक्कड़ स्वभाव ने उन्हें जंगलों में भी भटकने के लिए प्रेरित किया. जंगलों के प्रति यह लगाव वहाँ के जीवों के प्रति लगाव में बदला. सफेद बाघ पर उनकी चर्चित किताब “मोहन प्यारे का सफ़ेद दस्तावेज़” हिंदी में वन्य जीवन पर लिखी अनूठी किताब है. इस किताब को पर्यावरण मंत्रालय ने भी 2007 में प्रतिष्ठित “मेदिनी पुरस्कार” से नवाजा. फिलहाल दानिश बुक के हिन्दी के कंसल्टिंग एडिटर हैं तथा पटना में रह कर स्वतंत्र लेखन कर हैं.

