Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

देश-प्रदेश

चोर कांग्रेसी इस आंदोलन को बूटों से नहीं रौंद सकते

बाबा रामदेव का अहिंसात्मक सत्याग्रह और परेशान काला धन के मालिक… जी हां!  ये सिर्फ बाबा रामदेब का आन्दोलन नहीं है अपितु इस देश में रहने वाले नागरिक के द्वारा काला धन की वापसी के लिये किया गया अहिंसात्मक सत्याग्रह आन्दोलन है… जिसे ना तो सत्ता पर विराजमान चोर कांग्रेसी अपने बूटों से रौंद सकता है और ना ही महिलाओं के साथ ओछी हरकतें कर के इसे खतम करने का दावा कर सकता है…   अरे काले धन के आकाओं तुम जितना भी लाठी चलाओगे या आंसू गैस के गोले दागोगे ये आन्दोलन और अक्रामक होता जायेगा… जिसे तुम क्या कोई भी रोक नहीं पाएगा…  याद करो उस समय को जिस वक्त ये देश अंग्रेजों का गुलाम था…  हमने उस गुलामी की जंजीर को भी तोड़ा और हमें आजादी भी मिली… लेकिन तुम्हारी औकात क्या है…

बाबा रामदेव का अहिंसात्मक सत्याग्रह और परेशान काला धन के मालिक… जी हां!  ये सिर्फ बाबा रामदेब का आन्दोलन नहीं है अपितु इस देश में रहने वाले नागरिक के द्वारा काला धन की वापसी के लिये किया गया अहिंसात्मक सत्याग्रह आन्दोलन है… जिसे ना तो सत्ता पर विराजमान चोर कांग्रेसी अपने बूटों से रौंद सकता है और ना ही महिलाओं के साथ ओछी हरकतें कर के इसे खतम करने का दावा कर सकता है…   अरे काले धन के आकाओं तुम जितना भी लाठी चलाओगे या आंसू गैस के गोले दागोगे ये आन्दोलन और अक्रामक होता जायेगा… जिसे तुम क्या कोई भी रोक नहीं पाएगा…  याद करो उस समय को जिस वक्त ये देश अंग्रेजों का गुलाम था…  हमने उस गुलामी की जंजीर को भी तोड़ा और हमें आजादी भी मिली… लेकिन तुम्हारी औकात क्या है…

अरे अंग्रेज तो सीधे गोली मारते थे,  महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ तो नहीं करते थे…  लेकिन तुम तो इससे भी आगे निकले…  तुम तो महिलओं के इज्जत के साथ खेलता है…  तुम्हारे अंगरक्षक लड़कियों को सरे आम छेड़ता है…  और तुम चुपचाप टकटकी लगाये मजा ले रहे हो… खैर ये तुम्हारी पहचान है… सिब्बल और दिग्विजय जी ने बाबा को ठग, ढोंगी और न जाने क्या-क्या कहा कोई बात नहीं… ये भी माना सही था… लेकिन क्या 4- 5 जून की रात में सरकार द्वारा जो बर्बरता की गई क्‍या वो हमारे संविधान को शर्मसार नहीं किया… ये पुलिस की बर्बरता सोनिया गाँधी के द्वारा प्रायोजित थी…  ये पहले ही सोच लिया था क्या करना है…  क्या राम लीला मैदान में सभी आतंकवादी, नक्सली (सरकार कि भाषा में ) या कोई माओवादी जमा थे… जिसके साथ तुमने ऐसा बरताव किया…

सबसे ज्यादा सिब्बल जी को ही भाई काहे को परेशानी है… शायद तमाम काला धन के आकाओं को ही इस सत्याग्रह से परेशानी है… राम लीला मैदान में जो कुछ भी हुआ उसकी कल्पना मैं क्या, असंवेदनशील व्यक्ति भी नहीं कर सकता है… अरे इस सरकार से तो कहीं अच्छा नक्सलियों का फ़रमान सही होता है ये किसी महिला को तो अपना शिकार नहीं बनाते हैं…  सोनिया जी तो खुद महिला थीं क्या वो नहीं जानती कि महिलाओं के साथ किस तरह का बर्ताव होना चाहिए… खैर आपने अच्छा किया…

दीपक चौरसिया जी (स्टार न्यूज़ )  आप तो 4 मई की सुबह से ले के 3-4 बजे तक बाबा रामदेव का गुणगान कर रहे थे, अचानक आपको क्‍या हुआ… जो आप बाबा के खिलाफ बोलने लगे… आपने तो कहा था कि बाबा को मैं बहुत करीब से और पहले से ही जनता हूँ…  अगर आप उनके अवगुणों पहले से वाकिफ थे तो आप सुबह से ही बाबा का गुणगान क्‍यों कर रहे थे… खैर आपकी मर्जी… लेकिन ताजुब की बात तो तब हुई जब आपके स्टार न्यूज़ पर मैंने लालू को खुश देखा… बिहार विधान सभा चुनाव में हार से पस्त लालू के चेहरे पर पहली बार हंसी तो कल दिखी…  और स्टार न्यूज़ ने काफी समय भी दिया… जो लालू सीधे- तौर से काले धन की वापसी के विरोध में है… जिसने 15 वर्षों तक बिहार को नेस्‍तनाबूद किया… बिहार में जिसकी पहचान ख़त्म हुई… आप उस नेता को राष्‍ट्रीय चैनल पर उतना महत्व दिया,  वो भी उसे जो चाहता है काला धन का मुद्दा समाप्त हो…  दीपक जी आप जैसे संवेदनशील पत्रकारों से ऐसा उम्मीद नहीं करता हूं…

ये मुद्दा किसी बाबा से या किसी नेता से या किसी पार्टी से नहीं बल्कि पूरे राष्‍ट्र से जुड़ा हुआ मुद्दा है…  इस में हम सबों का साथ देना अति आवश्यक है… तभी जा के हमारा भारत आर्थिक रूप से सम्‍पन्‍न हो पाएगा… ये बाबा रामदेव का सवाल नहीं है इस बाबा की जगह कोई आम आदमी भी रहेगा तो पूरा भारतवासी उनका साथ देगा… क्‍योंकि देश की आम जनता अपनी सरकार से और उसके लुटेरे नेताओं तो पूरी तरह परेशान और हताश है…

लेखक चंदन सिंह पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...