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दिल्‍ली में लोकतंत्र का गला घोंटा गया : अखिलेंद्र

भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलनरत लोगों पर कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के द्वारा हुआ लाठीचार्ज और अनशनरत बाबा रामदेव की गिरफ्तारी लोकतंत्र की हत्या है और यह प्रमाणित करता है कि देश आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। यह बयान आज जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ बाबा रामदेव के नेतृत्व में आंदोलनरत लोगों पर हुए दमन की कड़ी निंदा करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि रामदेव को ठग और बेईमान बताने वाले कांग्रेस के नेताओं को देश को बताना चाहिए कि जब वह यह बात पहले से ही जानते थे तो आखिर क्या वजह थी कि केन्द्र सरकार के आला मंत्री पलक पांवड़े बिछाए हवाई अड्डे पर जाकर उनका स्वागत कर रहे थे और आज आखिर कौन सा ऐसा खतरा पैदा हो गया कि आधी रात को लोगों पर दमन ढाया गया व बाबा रामदेव को गिरफ्तार किया गया।

भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलनरत लोगों पर कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के द्वारा हुआ लाठीचार्ज और अनशनरत बाबा रामदेव की गिरफ्तारी लोकतंत्र की हत्या है और यह प्रमाणित करता है कि देश आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। यह बयान आज जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ बाबा रामदेव के नेतृत्व में आंदोलनरत लोगों पर हुए दमन की कड़ी निंदा करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि रामदेव को ठग और बेईमान बताने वाले कांग्रेस के नेताओं को देश को बताना चाहिए कि जब वह यह बात पहले से ही जानते थे तो आखिर क्या वजह थी कि केन्द्र सरकार के आला मंत्री पलक पांवड़े बिछाए हवाई अड्डे पर जाकर उनका स्वागत कर रहे थे और आज आखिर कौन सा ऐसा खतरा पैदा हो गया कि आधी रात को लोगों पर दमन ढाया गया व बाबा रामदेव को गिरफ्तार किया गया।

उन्‍होंने कहा कि दरअसल मूल लड़ाई देश में भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ और लोकपाल बिल के निर्माण के लिए है, जिसे रोकने के लिए ही यह दमन ढाया गया है और लोकतंत्र की हत्या की गयी है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, लोकतंत्र की हत्या और जनांदोलनों पर दमन के मामले में कारपोरेट राजनीति करने वाले कांग्रेस-भाजपा, सपा-बसपा और राजद-जेडीयू जैसे किसी भी दल का दामन पाक साफ नहीं है। आज दिल्ली में बाबा रामदेव के साथ हुई घटना के बाद आपातकाल को याद करने वाली भाजपा की हालत तो यह है कि अभी कल ही लखनऊ में खत्म हुई उनकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के वक्त ही लखनऊ के झूले पार्क में आंदोलनरत नोएडा विकास प्राधिकरण के मजदूर की मौत हो गयी, यहां तक कि रात को मायावती सरकार ने लोगों को पीट-पीटकर बुक कर दिया, पर भाजपा के किसी नेता ने वहां जाना तक गंवारा नहीं समझा इतना ही नहीं, इस सम्बंध में एक राजनीतिक प्रस्ताव तक इस बैठक में नहीं लिया गया। जबकि वहीं उस दिन जन संघर्ष मोर्चा ने अपनी विकल्प रैली में कर्मचारियों पर हुए हमले और लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आंदोलन तेज करने का बकायदा संकल्प लिया।

उन्‍होंने कहा इतना ही नहीं भाजपा जिस बिहार के सुशासन की पूरे देश में तारीफ करती घूमती है, वहां कल रात में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलनरत किसान की हत्या कर पुलिस ने बकायदा उसकी लाश को बूटों तले कुचला। वास्तव में आज देश में आपातकाल कानून के रास्ते से आ रहा है और इसे लाने में कारपोरेट राजनीति करने वाले सभी दल शामिल है। यह देश में न्यूनतम लोकतांत्रिक गतिविधियों की भी इजाजत नहीं देना चाहते। पूरे देश में ही धरना, अनशन, प्रदर्शन और आमसभा जैसी न्यूनतम लोकतांत्रिक गतिविधियों पर रोक लगायी जा रही है। इसलिए उन्होंने जन संघर्ष मोर्चा की तरफ से देश की उन सभी ताकतों से अपील की है कि वह भ्रष्टाचार और आपातकाल के हालातों के खिलाफ खडे़ हों और इसे अंजाम देने वाले दलों से हटकर लाकतंत्र की रक्षा के लिए नयी जन पक्षधर राजनीतिक गोल बंदी करें।

लखनऊ से दिनकर कपूर की रिपोर्ट.

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