गणतंत्र दिवस के मौके पर कश्मीर के लालचौक पर तिरंगा फहराने के निर्णय से भाजपा के रणनीतिकारों की बुद्धि पर तरस आ रहा है, क्योंकि मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फजीहत झेल रही यूपीए सरकार का इस तरह बचाव ही करती नजर आ रही है, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान भी भारत पर दबाव बढ़ा सकता है। कश्मीर के लालचौक पर तिरंगा फहराने से अगर परिस्थतियां बदल जातीं, तो सिर्फ भाजपा समर्थक ही नहीं, बल्कि किसी भी दल के समर्थकों के अलावा हर भारतीय सब कुछ छोड़ कर तिरंगा फहराने के लिए दौड़ पड़ता, पर सभी जानते हैं कि इससे कुछ नहीं बदलने वाला। इसके विपरीत भाजपा की इस चोचलेबाजी से मंहगाई व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी चल रही यूपीए सरकार व कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि लोगों का ध्यान इस मुद्दे से हटाने में नाकाम रही यूपीए सरकार व कांग्रेस को भाजपा ही एक तरह से राहत देती नजर आ रही है।
बचाव की मुद्रा में आ चुकी यूपीए सरकार या कांग्रेस पर हमले और तेज करने की बजाय एक और नया शिगूफा छोड़ कर भाजपा जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने का ही काम करती दिख रही है, जबकि भाजपाई भी जानते हैं कि तिरंगा फहराने के बाद भी कश्मीर जिन समस्याओं से जूझ रहा है, वह समस्याएं जस की तस ही रहने वाली हैं, लेकिन भाजपा देशभक्ति के नाम पर वैमनस्यता का माहौल उत्पन्न करने जा रही है, जिससे अयोध्या में कारसेवा के दौरान हुई घटना की पुनरावृति भी हो सकती है। भावनात्मक मुद्दे पर लोग फिर बेकाबू हो सकते हैं और जानें भी जा सकती हैं, पर राजनीति के नाम पर घिनौना खेल खेलने वालों को इस बात की कतई चिंता नहीं है।
इसके अलावा भाजपाईयों को यह भी चिंता नहीं है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत कूटनीतिक दृष्टि से कमजोर पड़ सकता है, क्योंकि तिरंगा फहराने की इस घटना को पाकिस्तान दुष्प्रचारित ही करेगा, साथ ही इस तरह तिंरगा फहराने के आंदोलन से यही संदेश जायेगा कि कश्मीरी नहीं चाहते कि वहां तिरंगा फहराया जाये और देश के बाकी हिस्सों के लोग जबरन कश्मीर में तिरंगा फहराने का प्रयास रहे हैं।पाकिस्तान की इस दलील का भारत सरकार के पास जवाब भी नहीं होगा, इसलिए राष्ट्रहित में भाजपा को तिरंगा फहराने का आंदोलन वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि कश्मीर में भी देशभक्तों की संख्या कम नहीं है।
देश के आम आदमी को फिलहाल यह समझने की जरूरत है कि यह वही भाजपा है, जिसने सत्ता सुख के लिए अपनी मूल विचारधारा से ही किनारा कर लिया था और पहली बार चौबीस दलों से गठबंधन कर सरकार बनाने का रिकार्ड कायम किया था। साथ ही विपक्ष में आने पर पुन: वही राग अलापने लगती है, इसलिए भाजपा के बहकाबे में आने की बजाय देश के आम लोगों को मंहगाई व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही नजर गड़ाये रखनी चाहिए, ताकि यूपीए सरकार व कांग्रेस आम आदमी के हित में भी सोचने को मजबूर हो जायें।
लेखक बीपी गौतम स्वतंत्र पत्रकार है.

