हरिवंश जी का कामराज नाडार पर केंद्रित लेख श्रेष्ठतम लेखों में से एक है। हां, केंद्र सरकार भ्रष्ट मंत्रियों की सरकार के नाम से जानी जाती है। अजब बात यह कि राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ बोल रहे हैं और उनके मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। आजादी के लगभग 25 साल बाद तक कांग्रेस ही केंद्र में सत्तारूढ़ रही। इसी दौरान देश पीछे होता गया। लालफीताशाही का नंगा नाच होता रहा। आम आदमी लगातार हाशिए की तरफ धकेला गया। आज हालत यह है कि अगर आप आम आदमी हैं तो आपकी कोई पूछ नहीं है। सत्ता का हर तंत्र आपको डराएगा, धमकाएगा। आप बेचारे बन कर रहिए। आप गंभीर रूप से बीमार हो गए तो अपने पैसे खर्च कर निजी चिकित्सक से इलाज कराइए। सरकार की आपके प्रति जवाबदेही नहीं है। सरकारी अस्पताल में जाएंगे तो दवा आपको अपने पैसे से खरीदनी पड़ेगी। दवाएं कितनी महंगी हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है।
आपको मामूली बुखार है और आप डाक्टर को दिखाने जाएंगे तो आपको पांच सौ से सात सौ रूपए खर्च करने पड़ेंगे। शिक्षा का हाल क्या है? नामी- गिरामी शिक्षण संस्थान दुकानें खोल कर बैठे हैं। धन दीजिए और प्रवेश पाइए। आपके पास धन नहीं है तो आप किसी लायक नहीं हैं। आपकी संतान साधारण पढ़ाई- लिखाई कर बेरोजगार बन कर बैठी रहेगी। यहां भी सरकार आपकी तरफ से आंखें मूंद कर बैठी रहेगी। सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। आइए अब बुनियादी सुविधाओं की बात करें। हर भारतीय का हक है कि उसे स्वच्छ पीने का पानी मिले। क्या यह सुविधा आपको मिलती है? जवाब है- नहीं। आप सरकारी अस्पतालों के नलों से आने वाले पानी की जांच करा लीजिए, जांच परिणाम आपको डरा देंगे। निहायत गंदा पानी होता है सरकारी अस्पताल के नलों का। देखने में तो यह पानी साफ होता है लेकिन जब स्वच्छता के मानक पर इसकी जांच की जाती है तो आप चौंक जाएंगे।
बिजली की कीमत भी अब साधारण नहीं रही। आपका बच्चा बिजली नहीं जलाएगा तो पढ़ेगा कैसे? इसमें सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। गांवों में तो कुछ ही घंटे बिजली रहती है। गांव के लोग भुगतें लेकिन सरकार उधर से आंख मूंदे रहती है। तो सरकारें करती क्या हैं? यह सवाल तब अब महत्वपूर्ण हो जाता है जब कामराज नाडार जैसे नेताओं की चर्चा होती है। हरिवंश जी ने बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। यह चर्चा जारी रहनी चाहिए। जब देश की जनता का पैसा लूटा जाता रहेगा और जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए दर- दर की ठोकरें खाती रहेगी तो मिस्र और लीबिया जैसा जन आंदोलन क्यों नहीं होगा?
लेखक विनय बिहारी सिंह कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी ब्लाग दिव्य प्रकाश के माडरेटर भी। उनसे संपर्क करने के लिए [email protected] का सहारा ले सकते हैं।

