विश्व प्रसिद्ध योग गुरू बाबा रामदेव इन दिनों उत्तर प्रदेश में युद्ध स्तर पर योग शिविर आयोजित करा रहे हैं, लेकिन साफ तौर पर योग के बहाने भीड़ जुटा कर वह राजनीति करते नजर आ रहे हैं। कपाल-भांति व अनुलोम-विलोम के साथ वह सरकारों और राजनेताओं को लताड़ते देखे जा सकते हैं, वहीं जनता को प्रभावित करने के लिए यह भी कहते देखे जा रहे हैं कि उन्हें सत्ता और सिंहासन नहीं चाहिए। बाबा रामदेव योग के लिए ही पहचाने जाते हैं, इसलिए शिविर में जनता अपेक्षा से कहीं अधिक पहुंचती दिखाई दे रही है, लेकिन बाबा सिर्फ योग ही नहीं सिखा रहे, वह योग से अधिक राजनीतिक चर्चा पर जोर देते दिख रहे हैं। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का सदस्य बनने का भी बार-बार आह्वान करते देखे जा रहे हैं। ज्ञान-मुद्रा, वायु-मुद्रा, धारणा शक्ति मुद्रा के साथ भस्रिका, ध्यान, भ्रामरी व उज्जायी करने के लाभ गिनाते समय ही वह प्रदेश व केन्द्र की सरकारों को कोसने लगते हैं।
हृदय मजबूत करने, बालों का झडऩा रोकने, मोटापा व मधुमेह से बचने के साथ माइग्रेन व ब्लड प्रेशर के रोग से बचने के गुरुमंत्र देते हुए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का नारा देने लगते हैं। राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों पर खुल कर बोलने लगते हैं, साथ ही जनता को प्रभावित करने के लिए वह यह भी कहने से नहीं चूकते कि सत्ता और सिंहासन पाने के लिए वह राजनीति में नहीं आ रहे हैं। वह यह भी कह देते हैं कि उन्हें योग करना होता तो हिमालय गुफाओं में या कहीं भी कर लेते। बोले-वह जन-जन तक योग को पहुंचा कर देश और दुनिया को निरोग बनाना चाहते हैं। इस बीच वह नशा मुक्ति का भी संदेश देने लगते हैं और उपस्थित जनता से नशा छोडऩे का संकल्प लेकर पुण्य कार्य करने से भी नहीं चूकते।
शीर्षासन कराने के बाद वह सीधे कहना शुरू कर देते हैं कि विदेशों में जमा काला धन वापस आ जाये तो भारत की आर्थिक स्थिति स्वत: ही सही हो जायेगी। वह कहते हैं कि भ्रष्टाचारियों को फांसी लगाने का कानून बनाना चाहिए, पर विदेशों में काला धन राजनेताओं का ही है, इसलिए न धन आयेगा और न ही फांसी लगाने का कानून बनेगा. यह सब करने के लिए सत्ता का सही हाथों में होना जरूरी है, साथ ही वह अपरोक्ष रूप से अपने ही हाथों को सही हाथ बताने का प्रयास करते नजर आते हैं। इसके अलावा उनके योग शिविरों में स्थानीय व चर्चित मुस्लिम धर्म गुरू मंच पर बैठे नजर आ रहे हैं एवं दलित वर्ग के लोगों के हाथों सम्मानित भी किये जा रहे हैं।
बाबा रामदेव से मेरी मुलाकात हुई तो मैंने सबसे पहला सवाल यही किया कि जीवन-मरण ईश्वर के हाथ में है, फिर वह यह क्यूं कहते हैं कि हत्या होने पर कांग्रेस दोषी होगी? सवाल पर वह पहले तो निरुत्तर हो गये, लेकिन बाद में संभल कर बोले कि कर्म करने के लिए इंसान स्वतंत्र है, इस लिए वह ऐसा कहते हैं, लेकिन जीवन-मरण इंसान के हाथ में नहीं है, इसका जवाब वह नहीं दे पाये और दूसरे सवाल पर आ गये। कश्मीर पर दिये विवादास्पद बयान पर उन्होंने कहा कि अरुंधति राय के विरुद्ध देशद्रोह के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। सवाल पर बोले-पाकिस्तान में नापाक हुक्मरान राज कर रहे हैं, तभी हालात खराब हैं। उन्होंने खुल कर कहा कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
लेखक बीपी गौतम स्वतंत्र पत्रकार है.

