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वाह रे डाट कॉम…!!

जगमोहन फुटेलाकोई बीस साल पुरानी बात है. बजाज ने एक ऐड निकाली थी. देश के सभी अखबारों में प्रमुखता से छपवाई. इसमें करीब एक क्विंटल वज़न वाली काया के मालिक और जनसत्ता रिपोर्टर विद्यासागर जी का बजाज स्कूटर पे बैठे हुए का फोटू था. नीचे लिखा था-चंडीगढ़ के विद्यासागर जी ने साढ़े सत्रह साल तक बजाज स्कूटर चलाया और इतने सालों बाद भी वो बिकने की हालत में था. एलएमएल के तब के जीएम भंडारी के मुताबिक़ बजाज की उस एक ऐड ने एलएमएल का बैंड बजा दिया. मैंने उनसे कहा कि अगर आपके डीलरों या आपकी कंपनी के लोगों ने उसके बाद कभी विद्यासागर जी को देखने की ज़हमत उठाई होती तो एलएमएल का बैंड बजने से बच भी सकता था. बल्कि बैंड तो शायद बजाज का बज गया होता. भंडारी बोले कैसे? मैंने बताया कि साढ़े सत्रह साल बजाज चलाने और बेचने के बाद विद्यासागर जी स्कूटर तो दरअसल एलएमएल ही खरीदा था. भंडारी के काटो तो खून नहीं था.

जगमोहन फुटेलाकोई बीस साल पुरानी बात है. बजाज ने एक ऐड निकाली थी. देश के सभी अखबारों में प्रमुखता से छपवाई. इसमें करीब एक क्विंटल वज़न वाली काया के मालिक और जनसत्ता रिपोर्टर विद्यासागर जी का बजाज स्कूटर पे बैठे हुए का फोटू था. नीचे लिखा था-चंडीगढ़ के विद्यासागर जी ने साढ़े सत्रह साल तक बजाज स्कूटर चलाया और इतने सालों बाद भी वो बिकने की हालत में था. एलएमएल के तब के जीएम भंडारी के मुताबिक़ बजाज की उस एक ऐड ने एलएमएल का बैंड बजा दिया. मैंने उनसे कहा कि अगर आपके डीलरों या आपकी कंपनी के लोगों ने उसके बाद कभी विद्यासागर जी को देखने की ज़हमत उठाई होती तो एलएमएल का बैंड बजने से बच भी सकता था. बल्कि बैंड तो शायद बजाज का बज गया होता. भंडारी बोले कैसे? मैंने बताया कि साढ़े सत्रह साल बजाज चलाने और बेचने के बाद विद्यासागर जी स्कूटर तो दरअसल एलएमएल ही खरीदा था. भंडारी के काटो तो खून नहीं था.

कमल से फूल वाली भाजपा के साथ भी यही हुआ है. क्षमा करेंगे भाजपाई, अपनी www.bjp.com के कांग्रेस के हत्थे चढ़ जाने के बाद प्रजेंस आफ माइंड तो उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी दिखाया. दिखाया होता तो कांग्रेस के असल नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस वाली डाट काम उनकी हो सकती थी. www.bhartiyarashtriyacongress.com भाजपा के रुदन क्रंदन और कांग्रेस को लीगल नोटिस देने वाले दिन भी खाली पड़ी थी. भाजपाई सोये रहे. डोमेन किसी ने उठा ली है. और वो बिक्री के लिए उपलब्ध भी है. भाजपा चाहे तो इसे अभी भी हथिया सकती है. ये अलग बात है कि इसके लिए अब उसे बोली लगानी पड़ेगी. बोली ऊंची भी जा सकती है. जो उसने किया वो उसके खुद के साथ न हो, इसके लिए बोली कांग्रेस भी लगाएगी. सो, प्रतिष्ठा की ये लड़ाई महंगी पड़ सकती है. डोमेन की बोली www.rkfworld.com पर लग रही है.

ये किस्सा भाजपा से क्षमायाचना के साथ बयां करना पड़ा है तो माफ़ी तो देश की कई दूसरी पार्टियों से भी मांगनी पड़ेगी. दांव पर तो नाम कई और पार्टियों के भी लगे हैं. जिन पार्टियों के नाम से डोमेन नीलामी पे लगे हैं उनमें जनहित कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, असम गण परिषद, मणिपुर पीपल्स फ्रंट, समाजवादी पार्टी, फॉरवर्ड ब्लाक, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट से लेकर महाराष्ट्रवादी गोमान्तक पार्टी तक जैसी करीब डेढ़ दर्ज़न पार्टियों के नामों वाले डाट काम डोमेन शामिल हैं. हो सकता है स्पेलिंग के मामूली फर्क मगर ठीक उसी उच्चारण के साथ.

मिसाल के तौर पर समाजवादी पार्टी के औपचारिक नाम में ‘वादी’ के लिए डब्ल्यू का प्रयोग होता है.rkfworld.com पर नीलामी पे लगे डोमेन में डब्ल्यू की जगह वी लगा है. दोनों के साथ लिखी और पढ़ी तो पार्टी समाजवादी ही जायेगी. कांग्रेस के डोमेन वाली स्पेलिंग हूबहू वही है अंग्रेजी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लिखने के लिए प्रयोग हो सकती है. जनहित कांग्रेस, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, असम गण परिषद, मणिपुर पीपल्स फ्रंट, समाजवादी पार्टी, फॉरवर्ड ब्लाक, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया समेत कई डोमेन की स्पेलिंग ठीक वही है जो चुनाव आयोग के रिकार्ड में दर्ज है. बहुजन समाज पार्टी वाले डोमेन में samaj को samaaj की तरह से लिया गया है. रोमन लिपि के कायदे से समाज लिखने के लिए वैसे भी एम के बाद एक की बजाय दो ‘ए’ लगने चाहियें. वर्ना वो समाज की बजाय समज भी बना रह सकता है.

rkfworld.com  ने इन सभी डोमेन की न्यूनतम दरें भी तय की हैं. इनके मुताबिक़ कांग्रेस का भाव सबसे अधिक कोई 25,000  हज़ार डालर है. दांव पर तो नाम कई और पार्टियों के भी लगे हैं. जिन पार्टियों के नाम से डोमेन नीलामी पे लगे हैं उनमें जनहित कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, असम गण परिषद, मणिपुर पीपल्स फ्रंट, समाजवादी पार्टी, फॉरवर्ड ब्लाक, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट से लेकर महाराष्ट्रवादी गोमान्तक पार्टी तक जैसी करीब डेढ़ दर्ज़न पार्टियों के नामों वाले डाट काम डोमेन शामिल हैं. हो सकता है स्पेलिंग के मामूली फर्क मगर ठीक उसी उच्चारण के साथ.

rkfworld.com  ने इन सभी डोमेन की जो दरें तय की हैं, उसके मुताबिक कांग्रेस का भाव सबसे अधिक लगभग पचीस हज़ार डालर है. हिन्दू शिव सेना डाट काम का रेट सबसे कम, कोई हज़ार डालर है. कदाचित एक दुखद सूचना ये है कि किसी भी बोली को खारिज या पूरी नीलामी को वजह बताए बिना रद्द किया जा सकता है. ज़ाहिर है, इंटरनेट की राजनीति करनी है तो डाट कॉम की कीमत तो पार्टियों को चुकानी ही पड़ेगी..!!

लेखक जगमोहन फुटेला वरिष्ठ पत्रकार हैं और इन दिनों वेब मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं.

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