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सत्‍ता मैं बैठे भ्रष्‍ट शिकारी इस देश का शिकार कर रहे हैं

आदरणीय यशवंतजी, पता नहीं क्यों अपने काम से इतर जब भी मैं अकेला बैठता हूं… तो रह-रह कर देश के बारे मैं सोचने को मजबूर हो जाता हूं… कभी सोने की चिड़िया कहा जाने वाला मेरा वतन आज भी सोने की चिड़िया तो हैं.. लेकिन अब सत्ता में बैठे शिकारी उसका शिकार करने में लगे हैं… हां मुझे ये भी पता है कि ये सोचकर मैं कुछ भी नहीं कर सकता क्योंकि भारत की सवा सौ करोड़ जनता में से करीब पचास करोड़ जनता रोज इस बुलंद भारत के बारे सोचती जरूर होगी कि जो भी देश में चल रहा है.. वो सही नहीं है… लेकिन वो भी ये सोच कर सो जाती है कि वो क्या कर सकती है…

आदरणीय यशवंतजी, पता नहीं क्यों अपने काम से इतर जब भी मैं अकेला बैठता हूं… तो रह-रह कर देश के बारे मैं सोचने को मजबूर हो जाता हूं… कभी सोने की चिड़िया कहा जाने वाला मेरा वतन आज भी सोने की चिड़िया तो हैं.. लेकिन अब सत्ता में बैठे शिकारी उसका शिकार करने में लगे हैं… हां मुझे ये भी पता है कि ये सोचकर मैं कुछ भी नहीं कर सकता क्योंकि भारत की सवा सौ करोड़ जनता में से करीब पचास करोड़ जनता रोज इस बुलंद भारत के बारे सोचती जरूर होगी कि जो भी देश में चल रहा है.. वो सही नहीं है… लेकिन वो भी ये सोच कर सो जाती है कि वो क्या कर सकती है…

पिछले चार-पांच महीनों से मैं हर रोज अखबारों में, चैनलों पर, लोगों की जबां पर बाबा रामदेव, अन्ना हजारे का आंदोलन और फिर राजनीतिक सियासत को पढ़ और सुन रहा हूं… एक दूसरे पर बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है… और कब तक चलेगा पता भी नहीं… हां लेकिन इस पूरे चक्रव्यूह में एक बात साफ हैं.. जिस पर अभी न तो कोई न्यूज चैनल पहुंच पाया है… और न ही कोई अखबार। हो सकता है जिस मुद्दे की बात मैं कहने जा रहा हूं….वो सभी को सही न लगे.. क्योंकि ये मेरा अपना मत है… हां लेकिन एक बार यदि सभी लोग शांत मन से इस मुद्दे पर चिंतन-मनन करें… तो कहीं हद तक हमको एक सही दिशा मिल सकती है…

चलो एक बार हम सब ये मान लेते हैं…. कि बाबा रामदेव के पास करोड़ों की सम्पत्ति है… उनके सहयोगी के पास नकली पासपोर्ट था… और जब उन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ मुहिम छेड़ी तो उसे लाठी के बल पर दबा भी दिया गया… फिर सरकार ने बाबा रामदेव की सम्पत्ति के ऊपर जांच बैठा दी और ये कहा कि बाबा ने इतनी संपत्ति कहां से अर्जित की… बाबा खुद ही भ्रष्टाचार में लिप्त है… ये कहकर जनता के जुनून और बाबा के आंदोलन को ठंडा कर दिया… और प्रेस कांफ्रेंस करके जनता के सामने अपना पल्ला झाड़ लिया कि बाबा रामदेव तो खुद ही भ्रष्टाचारी हैं. ये आप और मैं सब लोग जानते हैं… लेकिन प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किसी भी चैनल ने और अखबार ने न तो जनता को ये आईना दिखाया और ना ही किसी पत्रकार ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन मुलाज़िमों से ये पूछा कि ठीक है आज तुम कह रहे हो कि बाबा रामदेव भ्रष्टाचारी है.. .लेकिन आज यदि बाबा के पास करोड़ों की संम्पत्ति है तो वो पूंजी बाबा ने एक दिन में तो नहीं कमाई… और फिर बाबा ने इतनी पूंजी जमा कि तो उसके लिए जिम्मेदार कौन हैं…. सरकार और सरकार का प्रशासन..

यदि बाबा ने गलत तरीके से पूंजी का अर्जन किया है तो उसकी जांच आज क्यों हो रही है… तभी क्यों नहीं की जब वो ये गलत तरीके अपना रहे थे… आज बाबा पर जांच इसलिए बैठा क्योंकि उसने जनता के सामने तुम्हें नंगा करने की कोशिश की… और रही बात फर्जी पासपोर्ट की तो वो पासपोर्ट भी तो सरकारी मुलाज़िमों ने बनाया था… बाबा के सहयोगी ने नहीं… जब उन्होंने फर्जी दस्तावेज जमा किए.. तब उनकी जांच क्यों नहीं की… तब उनको सजा क्यों नहीं दी… और यदि बाबा भ्रष्टाचारी हैं तो उनको भी वहीं दंड मिलेगा जो दूसरे भ्रष्टाचारियों को मिलेगा… तो फिर सरकार ने क्यों लाठी के बल पर बाबा के आंदोलन को दबाया… सरकार ने भ्रष्टाचार की शुद्दि के लिए चिंतन तो नहीं किया …बल्कि जिसने सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार की मुहिम छेडी…उसको ही भ्रष्टाचारी बता दिया…

अब मैं बात करता हूं अन्ना के आंदोलन की….

तो राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ये अच्छी तरह समझ लो कि ये जनता सब जानती है कि आज यदि तुम्हारे पास करोड़ों की संम्पत्ति है तो ये तुमने कैसे और कहां से कमाई.. और ये भी जानती है कि ये संम्पत्ति तुम्हारे पूर्वज तुमको विरासत में देकर नहीं गए… ये तुमने इसी देश में भ्रष्टाचार करके अर्जित की है… जब अन्ना ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ और जन लोकपाल बिल के समर्थन में आंदोलन छेड़ा तो तुमने अन्ना को भी अपने जैसा भ्रष्टाचारी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी… लेकिन तुम इस आंदोलन को इसलिए नहीं दबा पाए क्योंकि जब अन्ना ने आंदोलन किया तो उसको दबाने के लिए तुम्हारे पास कोई बहाना नहीं था… और आज जब देश की जनता ने तुमको कुछ करने का मौका दिया है तो तुम अन्ना और उसकी टीम की कमियां निकालने में लगे हो… चलो एक पल के लिए हम ये मान लेते हैं कि अन्ना सही हैं और अन्ना टीम के सदस्य की नीयत सही नहीं है… तो मेरे भ्रष्टाचारी प्रशासनिक मुलाजिमों और राजनेताओं जरा ये सोचो कि चार लोगों की गलत नीयत होने से यदि सवा सौ करोड़ भारतीयों को भला होता है तो इसमें बुराई क्या है….

और अंत में मैं अपने भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों…. जो तिहाड़ जेल की हवा खा रहे हैं.. और जो राजनेता और अधिकारी भ्रष्टाचार करने की सोच रहे हैं… उनसे एक गुज़ारिश करना चाहूंगा… कि वो ये सब करने से पहले एक बार चिंतन जरूर कर लें कि अपने कर्मों की सजा इंसान को खुद ही भुगतनी पड़ती है… उसमें कोई शरीक नहीं होता… तिहाड़ से बाहर आने के दिनों को गिन रहे मेरे भ्रष्ट राजनेताओं और अधिकारियों तुमने भ्रष्टाचार किया…. उसकी सज़ा तुम खुद ही काट रहे हो…. जिनके लिए तुमने भ्रष्टाचार किया… उनके में से कोई तुम्हारी सजा बांटने नहीं आया… जबकि भ्रष्टाचार से की हुई कमाई को सब बांट रहे हैं… उससे तुम्हारी बीबी, बच्चे, सगे सम्बन्धी और तुमने जिनको गलत तरीरे से फायदा पहुंचाया.. वो सब मजे कर रहे हैं…

लेखक रामवीर सिंह डागुर पिछले तीन साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं… और पंजाब केसरी, मीडिया चक्र न्यूज एजेंसी और ईटीवी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में लेखक सिंगापुर में प्रोक्यूरमेंट डिपार्डमेंट में कार्यरत हैं। इनसे संपर्क [email protected] और मोबाइल नंबर 0065 – 84245001 के जरिए किया जा सकता है.

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