चंद्रबाबू के समर्थन में कई पार्टियां एकजुट

प्रदीपजीनिज़ामाबाद : आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं तेलगु देशम पार्टी के मुखिया एन चन्द्रबाबू नायडू की अचानक हालत बिगड़ जाने के कारण देर रात टास्क फ़ोर्स ने उन्हें अपने कस्‍टडी में लेकर हैदराबाद स्थित निम्स (निजाम इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस) में भर्ती करवाया. जहां पर उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी. गौरतलब है कि बाबू प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण अपनी फसल खो देने वाले किसानों को सरकार से उनका मुआवजा बढ़ाने और देने की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से एमएलए क्वार्टर के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. इस दौरान जब डाक्टरों ने उनके स्वास्थ का नियमित परीक्षण किया तो पाया कि बाबू के ब्लड प्रेशर में गिरावट होने के साथ-साथ ब्लड सुगर की मात्रा में काफी कमी है. जिसकी सूचना तुरंत सरकार को दी गई. जिसके बाद देर रात बाबू को अनशन छोड़ने का अनुरोध किया गया, लेकिन बाबू जब नहीं माने तो टास्क फ़ोर्स ने उन्हें गिरफ्तार कर निम्स में भर्ती करवा दिया. जहां पर उनकी हालत ठीक बताई गई.

नई-पुरानी सभ्‍यताओं का समागम है कटक

कटक : एशिया का एकमात्र चावल अनुसंधान केन्‍द्र यहीं पर स्थित है : ‘कटक’ उड़ीसा की प्राचीन राजधानी. जिसका इतिहास हजार वर्षों से भी पुराना बताया जाता है. जो वर्तमान राजधानी ‘भुवनेश्वर’ से लगभग 35 किलोमीटर दूर हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित है. कटक में आपको पुरानी और नई संस्कृति का समागम कभी भी देखने का मौका मिल जायेगा. जनवरी माह का अंतिम सप्ताह, कटक के थियेटर मूवमेंट द्वारा आयोजित पंद्रह दिवसीय नाट्य एवम नृत्य समारोह के आमंत्रण पर में सिकंदराबाद से विशाखा एक्सप्रेस से सपरिवार भुनेश्वर पहुंचे, अठारह घंटे के सफ़र ने थका दिया था. कटक रेलवे स्टेशन के पास के एक होटल में हम लोगों ने डेरा डाला. विश्राम करने के बाद कार्क्रम में भाग लिया.

कौन जानता है पिंगली वेंकैय्या को!

[caption id="attachment_2360" align="alignleft" width="96"]प्रदीप श्रीवास्‍तवप्रदीपजी[/caption]: राष्‍ट्रीय ध्‍वज के निर्माता हैं पिंगली : वेंकैय्या द्वारा किये गए कार्य की न तो भारत सरकार ने और ना ही कांग्रेस ने सही ढंग से आदर दिया है : पंद्रह अगस्त को जहां हम स्वतंत्रता दिवस कि 63 वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे वहीं दूसरी ओर अपने राष्ट्रीय झंड़े की संरचना करने वाले पिंगली वेंकैय्या को कोई भी याद तक नहीं करेगा. राष्‍ट्रीय ध्वज की डिजाईन तैयार करने वाले स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या का जन्म आन्ध्र प्रदेश के कृष्‍णा जिले के “दीवी” तहसील के “भटाला पेनमरू” नामक गाँव में दो अगस्त 1878 को हुआ था. उनके पिता का नाम पिंगली हनमंत रायडू एवं माता का नाम वेंकटरत्‍न्‍म्‍मा था. पिंगली वेंकैय्या ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू एवं मछलीपट्टनम से प्राप्त करने के बाद 19 वर्ष कि उम्र में मुंबई चले गए.

उपचुनाव परिणाम नहीं, जन आक्रोश है

प्रदीप श्रीवास्‍तव: पृथक राज्‍य का मुद्दा केन्‍द्र सरकार के पाले में : हाल में तेलंगाना के 119 विधान सभा सीटों में से 12 बारह सीटों के लिये हुए उप चुनाव में 11 सीटों पर तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की. एक मात्र निज़ामाबाद शहर की सीट पर( तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा समर्थित ) भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वाई लक्ष्मीनारायण की झोली में गया. इस चुनाव परिणाम को पूरे तेलंगाना क्षेत्र की जनाभिव्यक्ति नहीं माना जा सकता है, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि बारह सीटों के लिये हुए यह चुनाव केवल विधान सभा की खाली हुई बारह सीटों कों भरने का उपक्रम नहीं, बल्कि तेलंगाना क्षेत्र में कराया गया एक जनमत संग्रह था. क्योंकि इन बारह सीटों के चुनाव से तेलंगाना क्षेत्र की सभी 119 सीटों की जन भावनाएं सिमटी हुईं थीं.

पैसे से मतदाता के मन को नहीं खरीद सकते : कविता

तेलंगाना राष्‍ट्र समिति के अध्‍यक्ष के चंद्रशेखर राव की पुत्री एवं तेलंगाना जन जागृति की प्रदेश अध्‍यक्ष कविता से प्रदीप श्रीवास्‍तव ने बातचीत की. कविता से पार्टी की भावी योजना, उनकी खुद के भविष्‍य की योजना तथा तेलंगाना राज्‍य के मुद्दे पर कई बातें हुई. प्रस्‍तुत है कविता से हुई बातचीत के प्रमुख अंश- एडिटर

[caption id="attachment_2349" align="alignleft" width="99"]कविताकविता[/caption]कविता ने कहा तेलंगाना के मुद्दे ने दिलाई उपचुनाव में टीआरएस को भारी जीत : उपचुनाव में मिली तेलंगाना राष्ट्र समिति की सफलता ने केवल आंध्र प्रदेश की जनता को ही नहीं बल्कि पूरे देश को यह दिखला दिया है कि तेलंगाना की जनता चाहती है कि पृथक तेलंगाना राज्य का गठन हो. यह विचार इस सवांददाता के साथ एक बातचीत में टीआरएस मुखिया के चन्द्रशेखर राव की बेटी एवं तेलंगाना जन जागृति की प्रदेश अध्यक्ष सुश्री कविता ने कही. उन्होंने आगे कहा कि इस बार के चुनाव में कई प्रदेश के कई रिकार्ड भी टूटे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का एक ही प्रत्याशी से दो बार हारना, तेदेपा जैसी बड़ी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो जाना मुख्य है. सुश्री कविता ने आगे कहा कि इस उपचुनाव से एक बात और सिद्ध हो गई कि पैसे से आप मतदाता के मन को नहीं खरीद सकते हैं