तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव की पुत्री एवं तेलंगाना जन जागृति की प्रदेश अध्यक्ष कविता से प्रदीप श्रीवास्तव ने बातचीत की. कविता से पार्टी की भावी योजना, उनकी खुद के भविष्य की योजना तथा तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर कई बातें हुई. प्रस्तुत है कविता से हुई बातचीत के प्रमुख अंश- एडिटर
कविता
यह पूछे जाने पर कि अगले दो माह में महानगर पालिका के चुनाव होने वाले हैं, क्या टीआरएस भी उसमें भाग लेगी? इस पर कविता का कहना था कि मनपा के चुनाव स्थानीय मुद्दों को लेकर लड़े जाते हैं, जिसमें गली मुहल्लों की समस्याएं होती हैं. पार्टी को अपनी स्थिति दिखलाने के लिये चुनाव लड़ना ही पड़ता है, वह कोई भी चुनाव हो, उनकी पार्टी जरूर लड़ेगी. उन्होंने आगे कहा कि इस चुनाव से एक बात तो सिद्ध हो गई है कि तेलंगानावासियों में तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर विश्वास पैदा हुआ है. हम उपचुनाव में सभी बारह सीटों पर जीते, जिसमें ग्यारह सीट टीआरएस को तथा एक सीट (निज़ामाबाद की) भारतीय जनता पार्टी को मिली है, जिसको हमारी पार्टी ने समर्थन दिया था. इससे देश में एक सन्देश जाता है कि अगर अब तेलंगाना राज्य का गठन नहीं हुआ तो फिर संभव नहीं? इसलिये अब तेलंगाना राज्य का गठन हो जाना चाहिए.
यह पूछे जाने पर कि क्या आप को लगता है कि श्रीकृष्णा आयोग कमेटी दिसंबर माह में अपनी रिपोर्ट तेलंगाना के पक्ष में देगी? इस पर कविता का कहना था कि मुझे नहीं लगता कि वह एक पक्षीय रिपोर्ट देगी, जहां तक मैं समझती हूं कि श्रीकृष्णा आयोग मिलीजुली रिपोर्ट ही देगी. अगर ऐसा होता है तो टीआरएस तेलंगाना के गठन के लिये फिर से एक बार व्यापक स्तर पर आन्दोलन छेड़ेगी. हम तेलंगाना लेकर रहेंगे. जब उनसे यह पूछा गया कि सन 2004 के चुनाव के दौरान इसी संवाददाता के साथ बात करते हुए चन्द्रशेखर जी ने कहा था कि तेलंगाना राज्य के गठन होने के बाद उसका पहला मुख्यमंत्री दलित ही होगा? इस बारे में आप क्या सोचती हैं? इस पर कविता ने कहा कि यदि चन्द्रशेखर राव साहब ने यह कहा था तो कुछ सोचकर ही कहा होगा. मैं यह बताना चाहती हूँ कि राव साहब जो कहते हैं उसे पूरा भी करते हैं.
क्या पार्टी में इस तरह का कोई नेता आपकी नजर में है, जो तेलंगाना का मुख्यमंत्री बनेगा? इस प्रश्न पर कुछ देर की चुप्पी साधने के बाद कविता ने कहा कि टीआरएस किसी एक समाज, जाति व वर्ग की पार्टी नहीं है, इसमे सभी लोग शामिल हैं, सभी का बराबर का हक़ है, जहां तक मैं समझती हूं, मेरी निगाह में तो कोई नहीं है. जब उनसे इस सवांददाता ने यह पूछा कि क्या आप 2014 के चुनाव में निज़ामाबाद से संसदीय चुनाव लड़ेगीं, क्योंकि इस उप चुनाव में आप ने जीतोड़ क मेहनत की है और पार्टी प्रत्याशी को जिताया भी? इसी को लेकर लोगों में इस बात की चर्चा है? इस प्रश्न पर मुस्कराते हुए कविता ने पहले तो कहा कि नहीं, बिलकुल नहीं, फिर कुछ देर रुकने के बाद बोली, अगर जरुरत पड़ी और यहां के लोगों की इच्छा होगी तो जरुर लडूंगी. अभी तो हम सब के सामने सबसे बड़ा सवाल है की पहले तेलंगाना राज्य का गठन हो, उसके बाद दूसरी प्राथमिकताएं देखी जायेंगी.
साक्षात्कार करने वाले प्रदीप श्रीवास्तव निजामाबाद से प्रकाशित हिन्दी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के स्थानीय संपादक हैं .

